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Ram Mandir Bhumi Pujan: पाक-चीन के खिलाफ तीन युद्ध लड़े, फिर राम मंदिर आंदोलन में उतरे
Wed, 05 Aug 2020 12:58 PM IST
खुशबू गोयल
अमित रूखाया, फतेहाबाद
अमित रूखाया, फतेहाबाद
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 05 Aug 2020 12:58 PM IST
सार
- ईश्वरचंद मिड्डा भी राम मंदिर आंदोलन में पुलिस को छकाते हुए पहुंचे थे अयोध्या तक
- 1965 में रक्षा मेडल और समाजसेवा स्टार से भी नवाजे जा चुके हैं मिड्डा
- परिवार ने भी पूरे आंदोलन के दौरान घर-घर जाकर किया था हनुमान चालीसा पाठ
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रामलला
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन कर रहे थे, एक सेवानिवृत्त फौजी अपनी आंखों में खुशी के आंसू लिए घी के दिये जला रहे थे। इस फौजी ने पाकिस्तान के खिलाफ 1965-1971 की लड़ाइयां और चीन के खिलाफ 1962 की जंग लड़ी है। देश की मिट्टी का कर्ज उतारने के बाद इस फौजी ने रामनाम के आंदोलन में भी में अपनी जान को दांव पर लगा दिया था।
हालात ऐसे थे कि 22 दिन तक घरवालों को उनकी खबर ही नहीं थी कि वो इस दुनिया में हैं भी या नहीं। हम बात कर रहे हैं चार मरला कालोनी निवासी ईश्वरचंद मिड्डा की जिन्हें उनके जानने वाले प्यार से फौजी साहब कहते हैं। उन्हें साल 1965 में रक्षा मेडल और समाजसेवा स्टार अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। सात साथियों के साथ पुलिस को छकाते हुए अयोध्या पहुंचे थे।
शरीर के बिल्कुल पास से गुजरी थी गोलियां
चार मरला कालोनी निवासी ईश्वरचंद मिड्डा उर्फ फौजी साहब फतेहाबाद से हिसार-दिल्ली होते हुए पहले लखनऊ पहुंचे थे। इसके बाद वो अयोध्या के लिए रवाना हुए थे । मुलखराज चावला, मेहर चंद गांधी, गंगाधर मेहता, बंसल दंपती सहित कई लोग इस सफर में उनके साथ थे।
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ईश्वरचंद मिड्डा की मानें तो उस समय पुलिस प्रशासन का पूरा जोर ही इस बात पर था कि कारसेवकों को अयोध्या ना पहुंचने दिया जाए। इस दौरान कई बार सांप्रदायिक तनाव भी फैला। एक-आध बार तो ऐसा भी हुआ कि गोलीबारी की नौबत आ गई और गोली शरीर के बिल्कुल पास से गुजर गई।
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हालात ऐसे थे कि 22 दिन तक घरवालों को उनकी खबर ही नहीं थी कि वो इस दुनिया में हैं भी या नहीं। हम बात कर रहे हैं चार मरला कालोनी निवासी ईश्वरचंद मिड्डा की जिन्हें उनके जानने वाले प्यार से फौजी साहब कहते हैं। उन्हें साल 1965 में रक्षा मेडल और समाजसेवा स्टार अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। सात साथियों के साथ पुलिस को छकाते हुए अयोध्या पहुंचे थे।
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शरीर के बिल्कुल पास से गुजरी थी गोलियां
चार मरला कालोनी निवासी ईश्वरचंद मिड्डा उर्फ फौजी साहब फतेहाबाद से हिसार-दिल्ली होते हुए पहले लखनऊ पहुंचे थे। इसके बाद वो अयोध्या के लिए रवाना हुए थे । मुलखराज चावला, मेहर चंद गांधी, गंगाधर मेहता, बंसल दंपती सहित कई लोग इस सफर में उनके साथ थे।
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ईश्वरचंद मिड्डा की मानें तो उस समय पुलिस प्रशासन का पूरा जोर ही इस बात पर था कि कारसेवकों को अयोध्या ना पहुंचने दिया जाए। इस दौरान कई बार सांप्रदायिक तनाव भी फैला। एक-आध बार तो ऐसा भी हुआ कि गोलीबारी की नौबत आ गई और गोली शरीर के बिल्कुल पास से गुजर गई।
खुफिया कर्मचारी बस-ट्रेन में आकर बोलते थे जय श्रीराम
ईश्वर चंद मिड्डा की मानें तो पुलिस व सादी वर्दी में घूमने वाले खुफिया विभाग के कर्मचारी बसों-ट्रेन में आकर जोर से जय श्रीराम के नारे बोलते थे और जो भी उन जयघोष का जवाब देते थे उन्हें कारसेवक मानकर गिरफ्तार कर लिया जाता था। खुद उनके सामने ऐसा कई बार हुआ था लेकिन उन्हें संघ की ओर से पहले से ही इस बाबत आगाह किया हुआ था।
22 दिन तक घरवालों को नहीं मिली कोई खबर
ईश्वरचंद मिड्डा के परिजनों की मानें तो घर से अयोध्या रवानगी के बाद लगभग 20 से 22 दिन तक फौजी साहब का कोई पता ही नहीं था। चूंकि परिवार भी राममंदिर आंदोलन में शामिल था और इसलिए मिड्डा के अयोध्या कूच करने के बाद उनके घर की महिलाओं व बेटियों ने कालोनी में घर-घर में जाकर सुंदरकांड के पाठ करने शुरू कर दिए ताकि लोगों को राममंदिर आंदोलन के लिए जागरूक किया जा सके।
भरी आंखों और मुस्कान के साथ बोले, आज घी के दीये जलाऊंगा
‘अमर उजाला’ से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि जिस राममंदिर के लिए उन्होंने इतने प्रयत्न किए, आंदोलन के दौरान इतना कुछ सहा और करना पड़ा। अब जब राममंदिर का सपना पूरा होता दिख रहा है तो अब क्या करेंगे। ‘घी के दीये जलाऊंगा राम के नाम के’ भरी आंखों और मुस्कान के साथ ये था उनका जवाब।
22 दिन तक घरवालों को नहीं मिली कोई खबर
ईश्वरचंद मिड्डा के परिजनों की मानें तो घर से अयोध्या रवानगी के बाद लगभग 20 से 22 दिन तक फौजी साहब का कोई पता ही नहीं था। चूंकि परिवार भी राममंदिर आंदोलन में शामिल था और इसलिए मिड्डा के अयोध्या कूच करने के बाद उनके घर की महिलाओं व बेटियों ने कालोनी में घर-घर में जाकर सुंदरकांड के पाठ करने शुरू कर दिए ताकि लोगों को राममंदिर आंदोलन के लिए जागरूक किया जा सके।
भरी आंखों और मुस्कान के साथ बोले, आज घी के दीये जलाऊंगा
‘अमर उजाला’ से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि जिस राममंदिर के लिए उन्होंने इतने प्रयत्न किए, आंदोलन के दौरान इतना कुछ सहा और करना पड़ा। अब जब राममंदिर का सपना पूरा होता दिख रहा है तो अब क्या करेंगे। ‘घी के दीये जलाऊंगा राम के नाम के’ भरी आंखों और मुस्कान के साथ ये था उनका जवाब।