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PGI में ऑटोइम्यून डिजीज के टेस्ट बंद, मरीजों को लग रही चपत
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 10 Feb 2018 12:22 AM IST
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चंडीगढ़ का पीजीआई अस्पताल
- फोटो : File Photo
पीजीआई में ऑटोइम्यून डिजीज (अर्थराइटिस, सोराइसिस, मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस, ल्यूपस व वैसक्यूलाइटिस) से संबंधित जांचें पिछले 25 जनवरी से बंद पड़ी हैं। इससे ऑटोइम्यून से जुड़े मरीजों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गईं हैं। उन्हें टेस्ट के लिए प्राइवेट लैबों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
साथ ही दो से पांच गुना अधिक रेट भी देने पड़ रहे हैं। यह ऐसे टेस्ट हैं, जो छोटी लैब में नहीं होते बल्कि शहर की कुछ चुनिंदा ही लैब हैं, जहां पर यह टेस्ट किए जाते हैं। ऐसी लैब को ढूंढ पाना आसान नहीं होता है। इससे भी मरीजों परेशान हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि टेस्ट को बंद हुए करीब 15 दिन बीत गए हैं मगर किसी ने सुध नहीं ली है।
पीजीआई से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 25 जनवरी को इम्यूनोपैथोलॉजी डिपार्टमेंट की ओर से एक अधिकारिक आदेश पारित हुआ, जिसमें बताया गया है कि किट खत्म होने की वजह से कई टेस्ट बंद करने पड़ रहे हैं। उसके बाद से टेस्ट बंद कर दिए गए। पीजीआई के सूत्रों ने बताया कि अब किट की खरीदारी की तैयारी शुरू कर दी गई है। मगर इस पर भी एक्सपर्ट सवाल उठा रहे हैं।
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उनका कहना है कि जब किट खत्म होने वाली थी तभी इस बारे में संज्ञान क्यों नहीं लिया गया? पहले ही किट के आर्डर क्यों नहीं किए गए। इससे साफ पता चलता है कि डिपार्टमेंट की ओर से घोर लापरवाही की गई है। इसकी जांच भी होनी चाहिए आखिर पहले आर्डर क्यों नहीं किए गए।
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साथ ही दो से पांच गुना अधिक रेट भी देने पड़ रहे हैं। यह ऐसे टेस्ट हैं, जो छोटी लैब में नहीं होते बल्कि शहर की कुछ चुनिंदा ही लैब हैं, जहां पर यह टेस्ट किए जाते हैं। ऐसी लैब को ढूंढ पाना आसान नहीं होता है। इससे भी मरीजों परेशान हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि टेस्ट को बंद हुए करीब 15 दिन बीत गए हैं मगर किसी ने सुध नहीं ली है।
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पीजीआई से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 25 जनवरी को इम्यूनोपैथोलॉजी डिपार्टमेंट की ओर से एक अधिकारिक आदेश पारित हुआ, जिसमें बताया गया है कि किट खत्म होने की वजह से कई टेस्ट बंद करने पड़ रहे हैं। उसके बाद से टेस्ट बंद कर दिए गए। पीजीआई के सूत्रों ने बताया कि अब किट की खरीदारी की तैयारी शुरू कर दी गई है। मगर इस पर भी एक्सपर्ट सवाल उठा रहे हैं।
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उनका कहना है कि जब किट खत्म होने वाली थी तभी इस बारे में संज्ञान क्यों नहीं लिया गया? पहले ही किट के आर्डर क्यों नहीं किए गए। इससे साफ पता चलता है कि डिपार्टमेंट की ओर से घोर लापरवाही की गई है। इसकी जांच भी होनी चाहिए आखिर पहले आर्डर क्यों नहीं किए गए।
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रोजाना आते हैं 100 से अधिक मरीज
pgi chandigarh
- फोटो : File Photo
रोजाना आते हैं 100 से अधिक मरीज
पीजीआई में रोजाना करीब 100 से ज्यादा मरीज आते हैं, जो ऑटोइम्यून डिजीज से पीड़ित होते हैं। इन सभी को टेस्ट की जरूरत पड़ती है। इनमें से कुछ ऐसे टेस्ट हैं, जिनकी कीमत बाहर पांच हजार रुपये है।
टेस्ट किस बीमारी पीजीआई में रेट प्राइवेट बाहर रेट
एएनए ऑटोइम्यून डिस्आर्डर 250 800
एएनए ब्लोट ऑटोइम्यून डिस्आर्डर 1000 4000-4500
एएनटीआई सीसीपी रिम्युमेटायड आर्थराइटिस 250 1200
आरओ/एलए एंटीबाडीज से संबंधित 250 (दोनों के) 1700 (एक के)
किट खत्म होने की वजह से टेस्ट बंद कर दिए गए हैं। किट मंगवाई जा रही है। कोशिश है कि जल्द से जल्द टेस्ट शुरू करवाए जाएं।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई
पीजीआई में रोजाना करीब 100 से ज्यादा मरीज आते हैं, जो ऑटोइम्यून डिजीज से पीड़ित होते हैं। इन सभी को टेस्ट की जरूरत पड़ती है। इनमें से कुछ ऐसे टेस्ट हैं, जिनकी कीमत बाहर पांच हजार रुपये है।
टेस्ट किस बीमारी पीजीआई में रेट प्राइवेट बाहर रेट
एएनए ऑटोइम्यून डिस्आर्डर 250 800
एएनए ब्लोट ऑटोइम्यून डिस्आर्डर 1000 4000-4500
एएनटीआई सीसीपी रिम्युमेटायड आर्थराइटिस 250 1200
आरओ/एलए एंटीबाडीज से संबंधित 250 (दोनों के) 1700 (एक के)
किट खत्म होने की वजह से टेस्ट बंद कर दिए गए हैं। किट मंगवाई जा रही है। कोशिश है कि जल्द से जल्द टेस्ट शुरू करवाए जाएं।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई