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PGI चंडीगढ़ में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा ये मासूम, आप कर सकते हैं मदद

Sun, 20 May 2018 10:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 20 May 2018 10:33 AM IST
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auto drive for help of child admitted in pgi chandigarh
पीजीआई में भर्ती मरीज
छोटी सी उम्र और बेहिसाब दर्द। आंखों के सामने अंधेरा और उम्मीद की बस एक धुंधली किरण, लेकिन आप कर सकते हैं मदद। ये कहानी है पीजीआई में भर्ती 11 वर्षीय सौरभ की। सौरभ जब तीन साल का था तब उसके दिमाग की नसों में पानी भर गया। पेशे से प्राइवेट ड्राइवर पिता रमेश कुमार ने जैसे-तैसे पीजीआई में ऑपरेशन कराया। तब सौरभ के दिमाग में प्लास्टिक की नली डालकर डॉक्टरों ने उसकी जान बचा ली लेकिन उम्र बढ़ने पर प्लास्टिक की नली बदली जानी थी।
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पीजीआई में दोबारा ऑपरेशन हुआ लेकिन इस बार सौरभ की आंखों की रोशनी चली गई। अब जांच के लिए सैंपल बंगलूरू भेजा जाना है ताकि गड़बड़ी का पता लगाया जा सके। डॉक्टरों के मुताबिक सौरभ के इलाज पर करीब ढाई लाख रुपये का खर्च आएगा। बेटे के इलाज के चक्कर में पिता रमेश कुमार की नौकरी भी जा चुकी है। सौरभ के इस हाल और पिता की कमजोर आर्थिक स्थिति का पता जब ऑटो ड्राइवर अनिल कुमार को चला तो उन्होंने मदद की ठान ली। वह खुद पीजीआई पहुंचे और सौरभ के पिता रमेश कुमार से मुलाकात की।
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अनिल का दावा है कि वह अपने ऑटो की किस्त देने जा रहे थे, मगर जब उन्हें सौरभ के बारे में पता चला तो वह सीधे पीजीआई पहुंच गए और ऑटो की किश्त के दो हजार रुपये पिता रमेश कुमार को दे दिए। उसके बाद शनिवार को वह हाउसिंग बोर्ड पहुंचे और सभी ऑटो चालकों से रुपये इकट्ठा किए। किसी ऑटो चालक ने 500 रुपये दिए तो किसी ने 200। इस तरह अनिल ने कुल पांच हजार रुपये इकट्ठा किए और सारे रुपये उन्होंने सौरभ के पिता को सौंप दिए।
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अनिल कुमार ने बताया कि उनका मिशन जारी रहेगा। जहां से भी उन्हें पैसा मिलेगा, वो इकट्ठा कर बच्चे के पिता को सौंप देंगे। पांच हजार रुपये इकट्ठा होने के बाद बच्चे के टेस्ट के सैंपल बंगलूरू भेजने की तैयारी शुरू हो गई है। रमेश कुमार और ऑटो ड्राइवर अनिल ने शहरवासियों से गुहार लगाई है कि वह बच्चे की मदद के लिए उनकी आर्थिक मदद करें। यदि कोई व्यक्ति सौरभ की मदद करना चाहता है तो वे बच्चे के पिता रमेश कुमार के मोबाइल नंबर 7527953529 पर संपर्क कर सकते हैं।


घायलों और प्रेग्नेंट लेडीज को मुफ्त में अस्पताल पहुंचाते हैं अनिल
पेशे से ऑटो ड्राइवर समाज सेवा के लिए काफी प्रसिद्ध हैं। दुर्घटना में घायल होने वाले और प्रेग्नेंट लेडीज को वह मुफ्त में हास्पिटल पहुंचाते हैं। उनकी वजह से कई घायलों की जान बच चुकी है। दूसरों की मदद करने में वे अक्सर आगे रहते हैं। अनिल मानते हैं कि इंसानियत से बड़ा कोई दूसरा धर्म नहीं है। वे इसे अपना कर्तव्य भी मानते हैं।
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