खरीदारी का बहुत शुभ दिन है आज, जानिए शुभ मुहूर्त
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चंडीगढ़ का बाजार दीवाली के पहले गुलजार हो गया है। इसका कारण है गजकेशरी योग के संग 95 साल बाद गुरुपुष्य पर राजयोग। माना यह जाता है कि इस दौरान खरीदारी करना काफी शुभ होता है।
इसी योग का प्रभाव है कि चंडीगढ़ का सर्राफा बाजार इस योग के प्रभाव से गुलजार है। सिटी में कार डीलरों के यहां इसी वजह से सौ से ज्यादा कारों की बुकिंग हो चुकी है। दो दिन तक पुष्य नक्षत्र होगा और इन दो दिन में ज्वेलर्स ने चांदी कूटने की योजना तैयार कर डाली है।
ज्योतिष शास्त्र में इस मुहूर्त को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री और सेक्टर-18 के श्री राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी लाल बहादुर दुबे ने बताया कि गुरुपुष्य योग गुरुवार को सुबह 10.45 बजे से शुरू होगा और शुक्रवार दोपहर 1.36 बजे तक चलेगा।
16 अक्तूबर को बनने वाला गुरु पुष्य योग सबके लिए खास है। इस पुष्य नक्षत्र पर गुरु उच्च राशि में रहेगा और चंद्रमा साथ होने से गजकेदारी राजयोग का संयोग बन रहा हैं। चंडीगढ़ ज्वेलर्स एसोसिएशन के राजीव सहदेव के अनुसार गुरुपुष्य योग के लिए मार्केट तैयार है। कई लोगों ने अपने जेवरों की बुकिंग करवाई है और वीरवार को खरीदेंगे।
अगले 70 साल ऐसा संयोग नहीं
ज्योतिषियों के मुताबिक यह संयोग 95 साल पहले 16 अक्टूबर 1919 को बना था। अब अगले 70 सालों तक ऐसा संयोग नहीं आएगा। अब ऐसा संयोग 11 अक्टूबर 2085 को बनेगा। इस संयोग पर गुरु अपनी उच्च राशि में रहेगा और चंद्रमा भी साथ होने से गजकेसरी नाम का राजयोग बन रहा हैं।
यह है खरीदारी का महामुहूर्त
ज्योतिषियों के मुताबिक यह संयोग खरीदारी का महामुहूर्त हैं। इस पुष्य नक्षत्र पर गुरु उच्च राशि में होगा। उच्च राशि में गुरु होने से गुरु से संबंधित वस्तुएं खरीदने से लाभ होगा। सर्वार्थसिद्धि और अमृत सिद्धि योग बनने से ये संयोग और शुभ होगा। इस बार 16 अक्तूबर को अन्य शुभ योगों के साथ आने वाला गुरु पुष्य संयोग, सुख समृद्धि और संपदा लेकर आएगा।
स्वार्थसिद्धि और अमृत सिद्धि के साथ बन रहे पुष्य नक्षत्र में सोना, सोयाबीन, पीले कपड़े, आभूषण और मांगलिक कार्यों की खरीदारी करना श्रेष्ठ रहेगा। धनतेरस से पहले खरीदारी का यह महामुहूर्त स्टेशनरी, बहीखाते, इलेक्ट्रनिक सामान, मोबाइल, कंप्यूटर और भूमि, भवन, वाहन खरीदने के लिए भी शुभ हैं। यह शुभ संयोग शेयर मार्केट, स्टाक एक्सचेंज और व्यापारिक सौदों के लिए खास हैं।
वार और नक्षत्रों के विशेष संयोग
यह योग वार और नक्षत्रों के विशेष संयोग से मिलकर बनता है। गुरुवार को अगर अश्वनी, पुष्य, पुनर्वसु, अनुराधा और रेवती होतो सर्वार्थसिद्धि और अमृत सिद्धि योग बनते है। ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र को शुभ नक्षत्र माना गया है। देवताओं के गुरु बृहस्पति इस नक्षत्र के स्वामी है।
सर्वार्थसिद्धि और अमृत सिद्धि योग
ज्योतिषियों के मुताबिक गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग गुरु पुष्य नाम का अत्यंत शुभ योग सर्वार्थसिद्धि और अमृत सिद्धि योग बनाता है। इस योग में खरीदारी, बैंक से संबंधित कार्य, नया व्यापार-अफिस शुरू करना, पूजा-पाठ, संबंधित शुभ कार्य करने से उन कार्यों के पूरे परिणाम प्राप्त होते हैं।
इस महामुहूर्त में खरीदारी से घर में लक्ष्मी का वास होगा, इस योग में खरीदी गई वस्तुएं आपके लिए ज्यादा लाभकारी सिद्ध होंगी। इस दिन किसी भी नए कार्य की शुभ शुरुआत कर सकते हैं तो सर्वार्थसिद्धि योग बनता है।