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श्रीकृष्ण जन्माष्टमीः जानें स्मार्तों के लिए कब और सन्यासियों के लिए कब?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 20 Aug 2016 09:02 AM IST
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
- फोटो : डेमो फोटो
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तीज के बाद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। स्मार्तों के लिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व 24 अगस्त को है। वैष्णव और संन्यासी 25 अगस्त को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाएंगे। यह बात सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताई है।
बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार 24 अगस्त 2016 को अर्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी तिथि है। उन्होंने कहा कि स्मार्तों का यह व्रत इसी दिन होगा। भगवान श्री कृष्ण का जन्म अर्धरात्रि को हुआ है। 25 अगस्त को अष्टमी नवमी युता इसलिए वैष्णवों के लिए यह व्रत 25 अगस्त को है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र है लेकिन अष्टमी नहीं है। रोहिणी नक्षत्र और नवमी होने के कारण जयंती योग बनता है।
बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार कुछ आचार्यों का कहना है कि जयंती योग वाले ही दिन स्मार्त और वैष्णवों को व्रत करने का निर्णय देते हैं। वैष्णव लोगों के अतिरिक्त सभी गृहस्थी लोगों को धर्म शास्त्र में स्मार्त कहा गया है।
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स्मार्त शब्द के स्थान पर गृही या गृहस्थी शब्द का प्रयोग है। सभी गृहस्थी लोग जिन्होंने विधि पूर्वक वैष्णव संप्रदाय से दीक्षा नहीं ली है वे स्मार्त कहलाते हैं। वैष्णव मूल रूप से संन्यासियों का यति ब्रह्मचारी और वैष्णव संप्रदाय से दीक्षा लेने वाले वैष्णव कहलाते हैं।
देवालय पूजक परिषद का कहना है...
देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष उमा शंकर पांडेय, कोषाध्यक्ष डॉ लाल बहादुर दुबे, रवींद्र मिश्र का कहना है कि 24 अगस्त को रात्रि व्यापिनी अष्टमी होने के कारण 24 अगस्त को ही जन्माष्टी मनाई जाएगी।
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बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार 24 अगस्त 2016 को अर्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी तिथि है। उन्होंने कहा कि स्मार्तों का यह व्रत इसी दिन होगा। भगवान श्री कृष्ण का जन्म अर्धरात्रि को हुआ है। 25 अगस्त को अष्टमी नवमी युता इसलिए वैष्णवों के लिए यह व्रत 25 अगस्त को है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र है लेकिन अष्टमी नहीं है। रोहिणी नक्षत्र और नवमी होने के कारण जयंती योग बनता है।
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बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार कुछ आचार्यों का कहना है कि जयंती योग वाले ही दिन स्मार्त और वैष्णवों को व्रत करने का निर्णय देते हैं। वैष्णव लोगों के अतिरिक्त सभी गृहस्थी लोगों को धर्म शास्त्र में स्मार्त कहा गया है।
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स्मार्त शब्द के स्थान पर गृही या गृहस्थी शब्द का प्रयोग है। सभी गृहस्थी लोग जिन्होंने विधि पूर्वक वैष्णव संप्रदाय से दीक्षा नहीं ली है वे स्मार्त कहलाते हैं। वैष्णव मूल रूप से संन्यासियों का यति ब्रह्मचारी और वैष्णव संप्रदाय से दीक्षा लेने वाले वैष्णव कहलाते हैं।
देवालय पूजक परिषद का कहना है...
देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष उमा शंकर पांडेय, कोषाध्यक्ष डॉ लाल बहादुर दुबे, रवींद्र मिश्र का कहना है कि 24 अगस्त को रात्रि व्यापिनी अष्टमी होने के कारण 24 अगस्त को ही जन्माष्टी मनाई जाएगी।