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सूचना के बाद भी नहीं रुकी विरासती फर्नीचर की नीलामी
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चंडीगढ़। शिकायत के बावजूद इटली के मिलान शहर में पंजाब विश्वविद्यालय के विरासती फर्नीचर की नीलामी को रोका नहीं जा सका। इस नीलामी में पीयू के छह विरासती फर्नीचर को 55.68 लाख में बेचा गया है। तमाम कोशिशों के बावजूद चंडीगढ़ के विरासती फर्नीचर की विदेश में नीलामी जारी है।
कुछ सालों में करोड़ों रुपये के विरासती फर्नीचर नीलाम किए जा चुके हैं। हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से 24 नवंबर को इस नीलामी की शिकायत की थी, लेकिन इसे रोका नहीं जा सका। जग्गा ने कहा कि अब विरासती फर्नीचर की नीलामी को रोकने के साथ ही इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिरकार देश से बाहर ये विरासती फर्नीचर पहुंच कैसे रहा है। उन्होंने यूनाइटेड नेशन्स (यूएन) के समक्ष भी इस मुद्दे को उठाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि ये भी जांच होनी चाहिए कि पहले से जानकारी देने के बावजूद एंबेसी और लोकल लॉ इंफोर्समेंट एजेंसियों की ओर से नीलामी रोकने के लिए प्रयास किया गया या नहीं।
पीयू की कुर्सियाें व मेज की हुई नीलामी
इटली में जो विरासती फर्नीचर नीलाम हुआ है, इनमें लकड़ी की दो कुर्सियां, पीयू के एडमिन ब्लॉक के लकड़ी की दो मेज, दो हाथ वाली कुर्सियां, दो छोटी चौकियां, दो मॉडल कुर्सियां और दो अन्य चौकियां शामिल हैं। इससे पहले लंदन में हुई नीलामी में भारतीय उच्च आयोग और पुलिस ने दखल की दी थी, लेकिन उस नीलामी को भी रोका नहीं जा सका था। गौरतलब है कि पियरे जेनरे चंडीगढ़ के स्विस-फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए के साथ काम करते थे। इसी कारण ली कार्बूजिए ने चंडीगढ़ में घरों, सड़कों और पार्कों की प्लानिंग से लेकर सरकारी दफ्तरों में रखी जाने वाली कुर्सियों, मेज आदि को लेकर भी अलग से डिजाइन की जिम्मेदारी पियरे जेनरे को दी थी। विदेश में इनके चाहने वाले मुंहमांगे दामों पर फर्नीचर को खरीदते हैं। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि बड़ी संख्या में शहर का विरासती फर्नीचर विदेश तक कब और कैसे पहुंचा है। कौन लोग हैं, जो चंडीगढ़ के फर्नीचर को विदेश में ले जाकर करोड़ों में बेच रहे हैं।
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कुछ सालों में करोड़ों रुपये के विरासती फर्नीचर नीलाम किए जा चुके हैं। हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से 24 नवंबर को इस नीलामी की शिकायत की थी, लेकिन इसे रोका नहीं जा सका। जग्गा ने कहा कि अब विरासती फर्नीचर की नीलामी को रोकने के साथ ही इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिरकार देश से बाहर ये विरासती फर्नीचर पहुंच कैसे रहा है। उन्होंने यूनाइटेड नेशन्स (यूएन) के समक्ष भी इस मुद्दे को उठाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि ये भी जांच होनी चाहिए कि पहले से जानकारी देने के बावजूद एंबेसी और लोकल लॉ इंफोर्समेंट एजेंसियों की ओर से नीलामी रोकने के लिए प्रयास किया गया या नहीं।
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पीयू की कुर्सियाें व मेज की हुई नीलामी
इटली में जो विरासती फर्नीचर नीलाम हुआ है, इनमें लकड़ी की दो कुर्सियां, पीयू के एडमिन ब्लॉक के लकड़ी की दो मेज, दो हाथ वाली कुर्सियां, दो छोटी चौकियां, दो मॉडल कुर्सियां और दो अन्य चौकियां शामिल हैं। इससे पहले लंदन में हुई नीलामी में भारतीय उच्च आयोग और पुलिस ने दखल की दी थी, लेकिन उस नीलामी को भी रोका नहीं जा सका था। गौरतलब है कि पियरे जेनरे चंडीगढ़ के स्विस-फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए के साथ काम करते थे। इसी कारण ली कार्बूजिए ने चंडीगढ़ में घरों, सड़कों और पार्कों की प्लानिंग से लेकर सरकारी दफ्तरों में रखी जाने वाली कुर्सियों, मेज आदि को लेकर भी अलग से डिजाइन की जिम्मेदारी पियरे जेनरे को दी थी। विदेश में इनके चाहने वाले मुंहमांगे दामों पर फर्नीचर को खरीदते हैं। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि बड़ी संख्या में शहर का विरासती फर्नीचर विदेश तक कब और कैसे पहुंचा है। कौन लोग हैं, जो चंडीगढ़ के फर्नीचर को विदेश में ले जाकर करोड़ों में बेच रहे हैं।
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