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Chandigarh News: पीजीआई में सरकारी दस्तावेजों पर अब सिर्फ हस्ताक्षर से काम नहीं चलेगा
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चंडीगढ़। पीजीआई में सरकारी कामकाज से जुड़े दस्तावेजों में अब अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान स्पष्ट रहेगी। सतर्कता विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि अधिकारी या कर्मचारी किसी सरकारी फाइल, नोट, पत्र, मांग-पत्र, बिल, वाउचर या अन्य दस्तावेज पर केवल हस्ताक्षर या शुरुआती अक्षर लिखकर न छोड़ें। हस्ताक्षर के नीचे संबंधित अधिकारी या कर्मचारी का पूरा नाम और पद भी लिखना होगा।
पीजीआई के सतर्कता विभाग ने जारी सर्कुलर में कहा है कि सरकारी रिकॉर्ड और फाइलों की जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज सामने आए, जिन पर संबंधित कर्मचारी या अधिकारी ने केवल इनिशियल या हस्ताक्षर किए हुए थे। ऐसे मामलों में बाद में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि दस्तावेज को किस व्यक्ति ने तैयार किया, जांचा, आगे भेजा या मंजूर किया था।
जांच एजेंसी ने भी उठाया था सवाल
हाल ही में एक मामले में बाहरी जांच एजेंसी ने भी पीजीआई के कुछ सरकारी रिकॉर्ड की जांच के दौरान इसी तरह की अस्पष्टता की ओर ध्यान दिलाया था। इसके बाद विभाग ने सरकारी दस्तावेजों में अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान स्पष्ट रखने के लिए यह कदम उठाया है।
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हर स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की कोशिश
विभाग का कहना है कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए यह जरूरी है कि किसी दस्तावेज पर कार्रवाई करने वाले हर अधिकारी या कर्मचारी की पहचान साफ हो। इससे भविष्य में किसी फाइल या दस्तावेज को लेकर सवाल उठने पर यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि किस स्तर पर किस अधिकारी या कर्मचारी ने कार्रवाई की थी।
नाम-पद लिखने के लिए टाइप या रबर स्टैंप को प्राथमिकता
विभाग ने कहा है कि संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के नाम और पद को हस्ताक्षर के नीचे स्पष्ट रूप से लिखा जाए। इसके लिए टाइप किए हुए नाम-पद या रबर स्टैंप का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा। यानी दस्तावेज देखने वाले व्यक्ति को सिर्फ हस्ताक्षर देखकर अधिकारी की पहचान का अनुमान नहीं लगाना पड़ेगा।
सभी विभागों को पालन कराने के निर्देश
पीजीआई के सभी विभागाध्यक्षों, सुपरिंटेंडिंग हॉस्पिटल इंजीनियर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीन काम करने वाले अधिकारियों, फैकल्टी और गैर-फैकल्टी कर्मचारियों को इस व्यवस्था की जानकारी दें। साथ ही सरकारी दस्तावेजों में इस नियम का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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पीजीआई के सतर्कता विभाग ने जारी सर्कुलर में कहा है कि सरकारी रिकॉर्ड और फाइलों की जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज सामने आए, जिन पर संबंधित कर्मचारी या अधिकारी ने केवल इनिशियल या हस्ताक्षर किए हुए थे। ऐसे मामलों में बाद में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि दस्तावेज को किस व्यक्ति ने तैयार किया, जांचा, आगे भेजा या मंजूर किया था।
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जांच एजेंसी ने भी उठाया था सवाल
हाल ही में एक मामले में बाहरी जांच एजेंसी ने भी पीजीआई के कुछ सरकारी रिकॉर्ड की जांच के दौरान इसी तरह की अस्पष्टता की ओर ध्यान दिलाया था। इसके बाद विभाग ने सरकारी दस्तावेजों में अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान स्पष्ट रखने के लिए यह कदम उठाया है।
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हर स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की कोशिश
विभाग का कहना है कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए यह जरूरी है कि किसी दस्तावेज पर कार्रवाई करने वाले हर अधिकारी या कर्मचारी की पहचान साफ हो। इससे भविष्य में किसी फाइल या दस्तावेज को लेकर सवाल उठने पर यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि किस स्तर पर किस अधिकारी या कर्मचारी ने कार्रवाई की थी।
नाम-पद लिखने के लिए टाइप या रबर स्टैंप को प्राथमिकता
विभाग ने कहा है कि संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के नाम और पद को हस्ताक्षर के नीचे स्पष्ट रूप से लिखा जाए। इसके लिए टाइप किए हुए नाम-पद या रबर स्टैंप का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा। यानी दस्तावेज देखने वाले व्यक्ति को सिर्फ हस्ताक्षर देखकर अधिकारी की पहचान का अनुमान नहीं लगाना पड़ेगा।
सभी विभागों को पालन कराने के निर्देश
पीजीआई के सभी विभागाध्यक्षों, सुपरिंटेंडिंग हॉस्पिटल इंजीनियर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीन काम करने वाले अधिकारियों, फैकल्टी और गैर-फैकल्टी कर्मचारियों को इस व्यवस्था की जानकारी दें। साथ ही सरकारी दस्तावेजों में इस नियम का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।