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Haryana: लोकसभा चुनाव के नतीजों से तय होगा विधानसभा चुनाव का भविष्य, कई दिग्गजों की साख दांव पर
Tue, 28 May 2024 05:47 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 28 May 2024 05:47 PM IST
सार
हरियाणा में अक्तूबर में चुनाव होने तय हैं। 15 सितंबर के आसपास चुनाव आचार संहिता लग जाएगी। ऐसे में राजनीतिक दलों को अभी से तैयारियों में जुट जाएंगे। हरियाणा के विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे, स्थानीय नेतृत्व और जातीय समीकरण काफी मायने रखते हैं।
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सियासी समीकरण
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
हरियाणा में इसी साल के आखिरी होने वाले विधानसभा चुनाव की बिसात लोकसभा चुनाव के नतीजों से तय होगी। परिणाम कुछ भी रहे, मगर नए सियासी समीकरण की आधारशिला चार जून को ही पड़ जाएगी।
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चुनाव परिणामों से यह भी पता चल सकेगा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में किसका पलड़ा भारी रहने वाला है। जिसकी भी सीटे ज्यादा आएंगी, उसका फायदा उसे पांच महीने बाद जरूर मिलेगा। वहीं, यह चुनाव सीएम नायब सिंह सैनी, पूर्व सीएम मनोहर लाल, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, अभय चौटाला, कुमारी सैलजा व दुष्यंत चौटाला के राजनीतिक भाग्य का फैसला भी करेंगे। राज्य में अक्तूबर में चुनाव होने तय हैं। 15 सितंबर के आसपास चुनाव आचार संहिता लग जाएगी। ऐसे में राजनीतिक दलों को अभी से तैयारियों में जुट जाएंगे। हरियाणा के विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे, स्थानीय नेतृत्व और जातीय समीकरण काफी मायने रखते हैं। राज्य की जनता भी इस बारे में काफी जागरूक है। उन्हें पता है कि केंद्र और राज्य में किसे चुनना है।
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हालांकि भाजपा के लिए विधानसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन को दोहराना बड़ी चुनौती होगी। दरअसल भाजपा को जो वोट लोकसभा मिलता है, वो वोट उसे विधानसभा में नहीं मिलता। पिछले दो लोकसभा चुनावों में उसे अच्छा वोट मिला, मगर विधानसभा में उससे वह वोट फिसल गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 34.8 फीसदी वोट मिला। वहीं, कुछ समय बाद हुए विधानसभा चुनाव में उसका वोट बैंक फिसल गया। भाजपा को 33 फीसदी वोट मिला और भाजपा ने बहुमत भी हासिल कर लिया।
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ऐसा ही कुछ ट्रेंड 2019 में देखने को मिला। लोकसभा चुनाव में भाजपा को 58 फीसदी वोट मिला। वहीं, पांच महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में वोटबैंक गिरकर 36.7 फीसदी पर पहुंच गया। यहां तक कि भाजपा को सरकार बनाने में मुश्किलें आ गईं। जजपा और निर्दलीय विधायकों के सहयोग से ही भाजपा सरकार बना पाई थी। यदि लोकसभा चुनाव में भाजपा के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आते हैं तो भाजपा के लिए विधानसभा चुनाव की राह थोड़ी मुश्किल हो सकती है।
कांग्रेस पर भी पड़ेगा असर
इन चुनावों का असर जितना असर भाजपा को होगा, उतना ही असर कांग्रेस भी पड़ेगा। पिछले दो बार से कांग्रेस विधानसभा चुनाव में पिछड़ रही है। गुटबाजी की वजह से कांग्रेस अपना लक्ष्य भेद नहीं पा रही है। यदि नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं मिले तो आगे की राह कांग्रेस के लिए मुश्किल हो जाएगी। यह नतीजे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का भविष्य भी तय करेंगे। चार जून को आने वाले परिणाम यह तय करेंगे कि क्या दो बार के सीएम रहे हुड्डा कांग्रेस के पक्ष में जाट वोट बैंक को मजबूत करने और मोदी फैक्टर पर काबू पाने में सक्षम हैं या नहीं। हुड्डा को कांग्रेस के भीतर एसआरके गुट (सैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी) की चुनौती से भी पार पाना होगा। कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवारों के चयन में एसआरके गुट को लगभग दरकिनार कर दिया गया था, हालांकि सैलजा को सिरसा से उम्मीदवार बनाया गया। वहीं, यदि सैलजा सिरसा से जीतती हैं तो एसआरके गुट की ताकत बढ़ेगी। क्योंकि उनके पक्ष में हुड्डा गुट की ओर से कोई चुनाव प्रचार के लिए नहीं पहुंचा था।