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एशियाई देशों के सामने सुरक्षा और विकास बड़ी चुनौती: प्रणब

Thu, 01 Oct 2015 08:13 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 01 Oct 2015 08:13 AM IST
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asian countries face security and development challenges: pranab

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सुरक्षा और विकास को दक्षिण और मध्य एशियाई देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने कहा है कि सभी देश इस मुद्दे पर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

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दक्षिण एशियाई देशों को एकजुट होकर इन चुनौतियों का सामना करना की जरूरत है। राष्ट्रपति बुधवार को चंडीगढ़ सेक्टर-19 स्थित सेंटर फार रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (क्रिड) में आयोजित कान्फ्रेंस में बोल रहे थे।
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उन्होंने ने साउथ एंड सेंट्रल एशिया में पीस एंड सिक्योरिटी पर आयोजित इस कान्फ्रेंस का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पंजाब-हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी भी मौजूद थे। राष्ट्रपति ने कहा कि दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों में भारत की विदेश नीति को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।
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हालांकि पहले विदेश मंत्रालय में स्टाफ की कमी के कारण पॉलिसी बनाने में चुनौती का सामना करना पड़ता था। अब मुझे इस बात की खुशी है कि विदेश मंत्रालय ने अपनी पॉलिसी डिविजन को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यही नहीं विदेश नीति के लिए अब मंत्रालय विशेषज्ञों और रिसर्च इंस्टीट्यूट की भी मदद ली जा रही है।

कहा- 'विकास के लिए विदेश नीति की यह अप्रोच बहुत प्रासंगिक है'

asian countries face security and development challenges: pranab

राष्ट्रपति ने कहा कि देश की विदेश नीति का प्रमुख काम शांति और सद्भावना बनाए रखना है। साथ में पूरे विश्व को एक साथ चलना होगा।

ऐसे में विदेश नीति एक औजार का काम करती है जो सभी देशों को एक साथ बांधने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति और विकास के लिए विदेश नीति की यह अप्रोच आज दक्षिण और सेंट्रल एशियाई देशों के लिए बहुत प्रासंगिक है।

प्रणब दा ने कहा कि वर्तमान सरकार अपने गठन के पहले दिन से ही दक्षिण एशियाई देशों के साथ गठजोड़ और एकता बनाने का प्रयास कर रही है। दक्षिण एशियाई देशों की भौगोलिक स्थिति भी इन देशों के सामने एक बड़ी चुनौती है। दक्षिण एशियाई देशों के साथ एक गठजोड़ के तहत एकजुटता के प्रयास किए जा रहे हैं।

21वीं सदी विजन की शताब्दी:
इस दौरान हरियाणा-पंजाब के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि 21वीं शताब्दी विजन की शताब्दी है। आज के दौर में यदि हम विकास पर गौर नहीं करेंगे तो पीछे रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि विकास तो हो रहा है, लेकिन आदमी की सोच संकीर्ण होती जा रही है। इसे बदलने की जरूरत है।

राज्यपाल सोलंकी ने इस अवसर पर दक्षिण और मध्य एशिया में पीस और सिक्योरिटी पर आयोजित पुस्तक का विमोचन भी किया। वीरवार को इस कान्फ्रेंस के समापन समारोह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मुख्य मेहमान के तौर पर शिरकत करेंगे।

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