Haryana News: आशा कार्यकर्ताओं और सरकार में पांच घंटे चली बैठक, नहीं बनी सहमति, जारी रहेगी हड़ताल
यूनियन अध्यक्ष सुरेखा और महासचिव सुनीता ने मीटिंग के बाद जारी बयान में बताया कि सरकार के साथ तीन दौर की वार्ता हो चुकी है। राज्य की 20 हजार आशा वर्कर्स मजबूती के साथ हड़ताल पर डटी है। यह सरकार को तय करना है कि वह आंदोलन को कितना लंबा खींचना चाहती है।
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पिछले 54 दिनों से हड़ताल पर चल रही आशा कार्यकर्ताओं की शुक्रवार को हरियाणा सरकार के साथ पांच घंटे तक मैराथन बैठक चली। बैठक में सभी 10 मांगों पर मंथन किया लेकिन सरकार ने केवल आश्वासन दिया। वहीं, केवल आश्वासन पर हड़ताल खत्म करने को लेकर आशा कार्यकर्ता यूनियन पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में बैठक के बाद यूनियन ने एलान किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती, उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
पंचकूला के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में सुबह 11 बजे से शुरू बैठक शाम चार बजे तक चली। सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने बैठक की अध्यक्षता की, जबकि स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जी अनुपमा, एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) के निदेशक राज नारायण कौशिक, आशा कॉर्डिनेटर चांद सिंह मदान शामिल थे।
यूनियन की ओर से आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की अध्यक्ष सुरेखा, महासचिव सुनीता, सीटू महासचिव जय भगवान, यूनियन उपाध्यक्ष प्रवेश, रानी, कोषाध्यक्ष अनीता व उपाध्यक्ष सुधा शामिल रहे। मुख्य प्रधान सचिव ने आश्वासन दिया कि सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए अगले सप्ताह तक मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर मांगों का समाधान किया जाएगा।
10 अक्तूबर तक हड़ताल, 8 को करनाल में ललकार रैली
यूनियन अध्यक्ष सुरेखा और महासचिव सुनीता ने मीटिंग के बाद जारी बयान में बताया कि सरकार के साथ तीन दौर की वार्ता हो चुकी है। राज्य की 20 हजार आशा वर्कर्स मजबूती के साथ हड़ताल पर डटी है। यह सरकार को तय करना है कि वह आंदोलन को कितना लंबा खींचना चाहती है। राज्य में आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल 10 अक्तूबर तक जारी रहेगी। आठ अक्तूबर को प्रदेश की सभी आशा कार्यकर्ता करनाल में ललकार रैली में शामिल होंगी।
ये हैं आशा कार्यकर्ताओं की मांग
- सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिले
- 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन
- इंसेंटिव में 50% कटौती की बहाली
- ईपीएफ और ईएसआई की सुविधा
- रिटायरमेंट उम्र 65 साल करने और सम्मानजनक पेंशन
- ग्रेच्युटी की मांग