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मेयर बने एक माह बीता, नहीं हो पाया कमेटियों का गठन
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 16 Feb 2017 05:21 PM IST
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चंडीगढ़ की मेयर आशा जसवाल
- फोटो : File Photo
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आशा जसवाल को मेयर बने एक माह से ज्यादा हो गया, लेकिन अभी तक सब कमेटियों का गठन नहीं हो पाया है और इस कारण विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। जबकि इस समय भाजपा के पास निगम में पूर्ण बहुमत भी है। वहीं खाली पड़ी पार्किंग और मल्टीलेवल पार्किंग के घाटे को पूरा करने पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। यहां तक इन अहम मुद्दों पर चर्चा तक भी नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि अहम कमेटियों का चेयरमैन और सदस्य बनने को भाजपा पार्षदों में होड़ मची हुई है। ऐसे में कमेटियों की अधिसूचना होने पर भाजपा पार्षदों में हंगामा मचने के भी आसार हैं। अभी तक कि म्युनिसिपल एक्ट में जिन तीन सब कमेटियों (रोड, वाटर सप्लाई और हाउस टैक्स) का जिक्र है, उनका गठन मेयर नहीं कर पाईं हैं, जबकि पिछली सदन की बैठक में ही मेयर को कमेटियों का गठन करने का अधिकार दे दिया गया था। बाकी बची 12 सब कमेटियों की अधिसूचना प्रशासक की ओर से होनी है। कमेटियों का कार्यकाल एक साल का होता है, जिसमें से डेढ़ माह का समय बीत गया है। 31 दिसंबर तक ही कमेटियां काम करेंगी। मालूम हो कि 15 लाख रुपये तक के प्रस्ताव अलग-अलग विंग में कमेटियों में ही पास होते हैं।
गुटबाजी के कारण हारी हीरा लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
पिछली सदन की बैठक में पूर्ण बहुमत के बावजूद भाजपा की हीरा नेगी वित्त एवं अनुबंध कमेटी के चुनाव में हार गई। हीरा की हार भाजपा की गुटबाजी के कारण ही हुई। भाजपा की ओर से दावा किया गया कि वोट क्रास करने वालों की तलाश करके कार्रवाई की जाएगी, लेकिन यह दावे भी खोखले ही साबित हुए।
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कांग्रेस को भी एक कमेटी दी जाएगी
भाजपा की ओर से प्लानिंग बनाई गई है कि कांग्रेस पार्षद को भी एक सब कमेटी का चेयरमैन बनाया जाएगा। कांग्रेस के कुल 4 ही पार्षद हैं। ऐेसे में गुरबख्श रावत या रविंदर कौर गुजराल को किसी कमेटी का चेयरमैन बनाया जा सकता है।
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बताया जा रहा है कि अहम कमेटियों का चेयरमैन और सदस्य बनने को भाजपा पार्षदों में होड़ मची हुई है। ऐसे में कमेटियों की अधिसूचना होने पर भाजपा पार्षदों में हंगामा मचने के भी आसार हैं। अभी तक कि म्युनिसिपल एक्ट में जिन तीन सब कमेटियों (रोड, वाटर सप्लाई और हाउस टैक्स) का जिक्र है, उनका गठन मेयर नहीं कर पाईं हैं, जबकि पिछली सदन की बैठक में ही मेयर को कमेटियों का गठन करने का अधिकार दे दिया गया था। बाकी बची 12 सब कमेटियों की अधिसूचना प्रशासक की ओर से होनी है। कमेटियों का कार्यकाल एक साल का होता है, जिसमें से डेढ़ माह का समय बीत गया है। 31 दिसंबर तक ही कमेटियां काम करेंगी। मालूम हो कि 15 लाख रुपये तक के प्रस्ताव अलग-अलग विंग में कमेटियों में ही पास होते हैं।
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गुटबाजी के कारण हारी हीरा लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
पिछली सदन की बैठक में पूर्ण बहुमत के बावजूद भाजपा की हीरा नेगी वित्त एवं अनुबंध कमेटी के चुनाव में हार गई। हीरा की हार भाजपा की गुटबाजी के कारण ही हुई। भाजपा की ओर से दावा किया गया कि वोट क्रास करने वालों की तलाश करके कार्रवाई की जाएगी, लेकिन यह दावे भी खोखले ही साबित हुए।
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कांग्रेस को भी एक कमेटी दी जाएगी
भाजपा की ओर से प्लानिंग बनाई गई है कि कांग्रेस पार्षद को भी एक सब कमेटी का चेयरमैन बनाया जाएगा। कांग्रेस के कुल 4 ही पार्षद हैं। ऐेसे में गुरबख्श रावत या रविंदर कौर गुजराल को किसी कमेटी का चेयरमैन बनाया जा सकता है।
देरी हुई मगर प्रक्रिया जारी
आशा जसवाल
- फोटो : अमर उजाला
20 पार्किंग खाली पड़ी हैं
शहर में 26 पेड पार्किंग हैं जिनमें से 20 खाली पड़ी हैं। इन पार्किंग को फिर से ठेके पर देने के लिए कोई भी फैसला नहीं लिया जा रहा है। इससे जहां लोगों को दिक्कत हो रही है, वहीं निगम को घाटा हो रहा है। दो साल में नगर निगम को 4 करोड़ का घाटा हो चुका है। बिना कर्मचारियों के पार्किंग चलाने से वाहन इधर-उधर पार्क हो जाते हैं और जाम लगता है। इसी तरह से मल्टीलेवल पार्किंग सफेद हाथी साबित हो रही है। हर माह निगम को सेक्टर-17 की मल्टीलेवल पार्किंग चलाने से 4 लाख रुपये का घाटा हो रहा है। निगम ने प्रशासन से मल्टीलेवल पार्किंग के सरफेस में विज्ञापन की मंजूरी मांगी थी जो मांग प्रशासन ने खारिज कर दी है। इन घाटों को पूरा करने के लिए कोई भी पार्षद और अधिकारी भी नहीं सोच रहा है जबकि इस समय सभी नए पार्षद हैं।
कब प्रस्ताव तैयार होंगे
बड़ी हैरानी की बात है कि मेयर कमेटियों का गठन ही नहीं हो रहा। भाजपा के अपने पार्षद खुद ही कमेटियों के चेयरमैन बनने के लिए उलझे हुए हैं। ऐसे में मेयर निर्णय नहीं ले पा रही हैं। कब कमेटियां बनेंगी और कब नए प्रस्ताव तैयार होंगे और अब कब उन्हें पास करवाया जाएगा।
दवेंद्र सिंह बबला, कांग्रेस महासचिव और पार्षद
देरी हुई मगर प्रक्रिया जारी
कमेटियों के गठन में कुछ देरी हुई है, लेकिन प्रक्रिया जारी है। सभी पक्ष को ध्यान में रखकर कमेटियों का गठन किया जाएगा। पेड पार्किंग में आ रही परेशानियों का भी ध्यान है। मल्टीलेवल पार्किंग का घाटा किस तरह से पूरा किया जा सकता है इस बारे में पिछले साल के मेयर अरुण सूद ने काफी काम किया था उनसे भी बैठक करके इस ओर कदम उठाया जाएगा।
आशा जसवाल, मेयर
शहर में 26 पेड पार्किंग हैं जिनमें से 20 खाली पड़ी हैं। इन पार्किंग को फिर से ठेके पर देने के लिए कोई भी फैसला नहीं लिया जा रहा है। इससे जहां लोगों को दिक्कत हो रही है, वहीं निगम को घाटा हो रहा है। दो साल में नगर निगम को 4 करोड़ का घाटा हो चुका है। बिना कर्मचारियों के पार्किंग चलाने से वाहन इधर-उधर पार्क हो जाते हैं और जाम लगता है। इसी तरह से मल्टीलेवल पार्किंग सफेद हाथी साबित हो रही है। हर माह निगम को सेक्टर-17 की मल्टीलेवल पार्किंग चलाने से 4 लाख रुपये का घाटा हो रहा है। निगम ने प्रशासन से मल्टीलेवल पार्किंग के सरफेस में विज्ञापन की मंजूरी मांगी थी जो मांग प्रशासन ने खारिज कर दी है। इन घाटों को पूरा करने के लिए कोई भी पार्षद और अधिकारी भी नहीं सोच रहा है जबकि इस समय सभी नए पार्षद हैं।
कब प्रस्ताव तैयार होंगे
बड़ी हैरानी की बात है कि मेयर कमेटियों का गठन ही नहीं हो रहा। भाजपा के अपने पार्षद खुद ही कमेटियों के चेयरमैन बनने के लिए उलझे हुए हैं। ऐसे में मेयर निर्णय नहीं ले पा रही हैं। कब कमेटियां बनेंगी और कब नए प्रस्ताव तैयार होंगे और अब कब उन्हें पास करवाया जाएगा।
दवेंद्र सिंह बबला, कांग्रेस महासचिव और पार्षद
देरी हुई मगर प्रक्रिया जारी
कमेटियों के गठन में कुछ देरी हुई है, लेकिन प्रक्रिया जारी है। सभी पक्ष को ध्यान में रखकर कमेटियों का गठन किया जाएगा। पेड पार्किंग में आ रही परेशानियों का भी ध्यान है। मल्टीलेवल पार्किंग का घाटा किस तरह से पूरा किया जा सकता है इस बारे में पिछले साल के मेयर अरुण सूद ने काफी काम किया था उनसे भी बैठक करके इस ओर कदम उठाया जाएगा।
आशा जसवाल, मेयर