दिल्ली के दिग्गजों को रास नहीं आया पंजाब
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दिल्ली के दिग्गजों को पंजाब रास नहीं आया। इस बार चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने राष्ट्रीय नेताओं को पंजाब के चुनाव मैदान में उतारा था। जिनमें भाजपा के अरुण जेटली अमृतसर से लड़े और कांग्रेस की अंबिका सोनी आनंदपुर साहिब सीट से।
मगर दोनों ही नेता चुनाव हार गए। यह पहला मौका था जब दोनों प्रमुख पार्टियों के दो राष्ट्रीय नेता पंजाब की सरजमीं से चुनाव लड़े थे। दोनों नेताओं में दिलचस्प समानताएं हैं।
दोनों का लंबा सियासी करिअर होने के बावजूद ये पहले कभी चुनाव नहीं लड़े थे। दोनों ही बाहरी हलकों से चुनाव मैदान में उतरे थे।
एक सोनिया की करीबी तो दूसरा मोदी का नजदीकी
हालांकि दोनों ही पंजाबी परिवारों से हैं। दोनों की छवि स्वच्छ है, इन्हें अच्छे वक्ता और रणनीतिकार के रूप में जाना जाता है। एक तरफ जेटली, नरेंद्र मोदी के करीबी हैं, तो अंबिका को सोनिया गांधी का नजदीकी माना जाता है।
जेटली ने एबीवीपी से सियासत शुरू की थी, तो अंबिका यूथ कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रधान रही थीं। दोनों के लिए पहला चुनाव आसान नहीं था। जेटली का मुकाबला अमृतसर में प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ था। हालांकि जेटली ने चुनाव में काफी मेहनत की, लेकिन शिअद-भाजपा के खिलाफ नाराजगी का खामियाजा उन्हें उठाना पड़ा और हार गए।
दूसरी तरफ अंबिका का मुकाबला शिअद के प्रेम सिंह चंदूमाजरा से था। आनंदपुर सीट पर अंबिका ने भी पूरी ताकत लगाई, लेकिन आम आदमी पार्टी के पक्ष में वोटों के ध्रुवीकरण का नुकसान उन्हें हो गया और शिअद जीत गई।