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Chandigarh News: गगनचुंबी पहाड़ों पर चढ़ेगा सेना का एंबुलेंस ट्रक
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प्रदर्शनी में माैजूद पदाधिकारी।
चंडीगढ़। गगनचुंबी पहाड़ों पर दुश्मनों की गोलीबारी से घायल होने वाले जवानों को अब कंधों पर लादकर कैंप अस्पताल तक लेकर आने के लिए आठ-आठ जवानों को नीचे नहीं आना पड़ेगा। इसके लिए सेना में नई तकनीक वाले एसएमवी-1200 एंबुलेंस व अन्य मददगार ट्रक शामिल होने वाले हैं। इन ट्रकों पर 30 डिग्री से अधिक गर्मी या फिर माइनस 15 डिग्री में भी फर्क नहीं पड़ेगा। यह चालक सहित आठ जवानों को ले जाने की क्षमता है। इसके अलावा भी सेना की ताकत को बढ़ाने और जवानों की रक्षा करने के लिए नई गैजेट्स, हेल्मेट, ट्रांसमीटर, थर्मल स्कैनिंग साइट गन के अलावा मल्टी सेंसर, मीडियम रेंज सर्विलांस सिस्टम और क्रयू सर्वड एरिया वैपन भी शामिल किए जा रहे हैं। सेना के मैक टैक सेमीनार में नए उपकरण व हथियारों को प्रदर्शित किया गया है।
सीएच-1038टी और एचसीएच-1038टी बोल्ट फ्री राइफल हेल्मेट
जवानों के सिर पर गोली लगने से रक्षा करने के लिए एसीएच-1038टी और एचसीएच-1038टी बोल्ट फ्री राइफल हेल्मेट तैयार किए है। यह हेल्मेट एके-47 की गोलियों से भी सिर को सुरक्षा देने में सक्षम है।
थर्मल मोस्किटो लोकेटर कैमरा, 20 किलोमीटर तक साफ दिखेगा
थर्मल मोस्किटो लोकेटर कैमरे से दिन की साइट में थर्मल इमेज को सर्च किया जा सकता है। जबकि लांग रेंज मल्टीफंक्शनल इंफ्रारेड कैमरा 20 किलोमीटर दूर तक बॉर्डर पर छोटी से छोटी गतिविधि को बहुत नजदीक से दिखा सकता है। बॉर्डर पर अक्सर पहाड़ी क्षेत्रों में सेना जवान ऊंचाई तक देखने में पहले दूरबीन का प्रयोग करते थे, लेकिन इस नए कैमरे से 20 किलोमीटर तक बिल्कुल साफ दिखाई देता है। इसके अलावा मल्टी सेंसर, मीडियम रेंज एवं सर्विलांस सिस्टम और एमडब्ल्यू-5000 साइटिंग सिस्टम भी दूर तक देखने में क्षमता रखता है।
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सेना की नई थर्मल गन, 2 किलोमीटर तक मारक की स्टीक क्षमता
कानपुर की एमकेयू द्वारा सेना के लिए थर्मल गन भी तैयार की गई है। यह थर्मल गन करीब दो किलोमीटर दूर तक मारक क्षमता रखती है। इसकी खासियत यह है कि इसमें लगे स्कैनिंग कैमरा के जरिये यह 2 किलोमीटर दूरी के अंदर किसी भी जगह छिपे हुए दुश्मन को स्कैन करके उसे मार सकती है। इस गन को वाई-फाई से प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा एके-47 को भी अपग्रेड कर दिया गया है, जिसमें अब चार घंटे की बैटरी लाइफ दी गई है। यह नेट्रो वीजन पर आधारित होगी।
दुश्मनों के ड्रोन को दो किलोमीटर की रेंज में जाम करेगी एंट्री ड्रोन गन
चेन्नई की एरो स्पेस में तैयार की गई चैलेंजर एंटी ड्रोन गन भी भारतीय सेना सहित नौसेना और एयरफोर्स में भी शामिल हाे गई है। इस गन के जरिये दुश्मनों के ड्रोन को दो किलोमीटर की रेंज में जाम किया जा सकेगा।
वायुसेना जवानों के लिए तैयार हुआ एविऐशन नाइट विजन गॉगल्स हेल्मेट
इंडियन एयरफोर्स जवानों के लिए भी आसमान में हेलीकॉप्टर में से जमीन पर देखने के लिए नाइट विजन गॉगल्स तैयार की गई है। इसके अलावा वायुसेना में भी नाइट विजन गॉगल्स (एनवीजी) को जोड़ा गया है जिसका प्रयोग भी शुरू हाे गया है। वायुसेना नेट्रो एनबी-3101 एनवीजी का उपयोग कम रोशनी की स्थिति में भी विस्तृत छवि बनाने के लिए प्रयोग करती है। इससे आसमान से नीचे जमीन पर गहराई का भी पता चलता है।
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सीएच-1038टी और एचसीएच-1038टी बोल्ट फ्री राइफल हेल्मेट
जवानों के सिर पर गोली लगने से रक्षा करने के लिए एसीएच-1038टी और एचसीएच-1038टी बोल्ट फ्री राइफल हेल्मेट तैयार किए है। यह हेल्मेट एके-47 की गोलियों से भी सिर को सुरक्षा देने में सक्षम है।
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थर्मल मोस्किटो लोकेटर कैमरा, 20 किलोमीटर तक साफ दिखेगा
थर्मल मोस्किटो लोकेटर कैमरे से दिन की साइट में थर्मल इमेज को सर्च किया जा सकता है। जबकि लांग रेंज मल्टीफंक्शनल इंफ्रारेड कैमरा 20 किलोमीटर दूर तक बॉर्डर पर छोटी से छोटी गतिविधि को बहुत नजदीक से दिखा सकता है। बॉर्डर पर अक्सर पहाड़ी क्षेत्रों में सेना जवान ऊंचाई तक देखने में पहले दूरबीन का प्रयोग करते थे, लेकिन इस नए कैमरे से 20 किलोमीटर तक बिल्कुल साफ दिखाई देता है। इसके अलावा मल्टी सेंसर, मीडियम रेंज एवं सर्विलांस सिस्टम और एमडब्ल्यू-5000 साइटिंग सिस्टम भी दूर तक देखने में क्षमता रखता है।
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सेना की नई थर्मल गन, 2 किलोमीटर तक मारक की स्टीक क्षमता
कानपुर की एमकेयू द्वारा सेना के लिए थर्मल गन भी तैयार की गई है। यह थर्मल गन करीब दो किलोमीटर दूर तक मारक क्षमता रखती है। इसकी खासियत यह है कि इसमें लगे स्कैनिंग कैमरा के जरिये यह 2 किलोमीटर दूरी के अंदर किसी भी जगह छिपे हुए दुश्मन को स्कैन करके उसे मार सकती है। इस गन को वाई-फाई से प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा एके-47 को भी अपग्रेड कर दिया गया है, जिसमें अब चार घंटे की बैटरी लाइफ दी गई है। यह नेट्रो वीजन पर आधारित होगी।
दुश्मनों के ड्रोन को दो किलोमीटर की रेंज में जाम करेगी एंट्री ड्रोन गन
चेन्नई की एरो स्पेस में तैयार की गई चैलेंजर एंटी ड्रोन गन भी भारतीय सेना सहित नौसेना और एयरफोर्स में भी शामिल हाे गई है। इस गन के जरिये दुश्मनों के ड्रोन को दो किलोमीटर की रेंज में जाम किया जा सकेगा।
वायुसेना जवानों के लिए तैयार हुआ एविऐशन नाइट विजन गॉगल्स हेल्मेट
इंडियन एयरफोर्स जवानों के लिए भी आसमान में हेलीकॉप्टर में से जमीन पर देखने के लिए नाइट विजन गॉगल्स तैयार की गई है। इसके अलावा वायुसेना में भी नाइट विजन गॉगल्स (एनवीजी) को जोड़ा गया है जिसका प्रयोग भी शुरू हाे गया है। वायुसेना नेट्रो एनबी-3101 एनवीजी का उपयोग कम रोशनी की स्थिति में भी विस्तृत छवि बनाने के लिए प्रयोग करती है। इससे आसमान से नीचे जमीन पर गहराई का भी पता चलता है।