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एस्टेट ऑफिस के खिलाफ उतरे चंडीगढ़ के आर्किटेक्ट्स

Sat, 27 Feb 2021 10:14 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 27 Feb 2021 10:14 PM IST
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Architects of the Chandigarh protest against the Estate Office
चंडीगढ़। एस्टेट ऑफिस की कार्यप्रणाली से शहर के आर्किटेक्ट्स परेशान हैं। शनिवार को लेक क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि कैसे एस्टेट ऑफिस में भ्रष्टाचार चरम पर है। एक काम करवाने के लिए कई-कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई साल तक काम को लटका कर रखा जाता है। आखिर में तंग आकर उस काम को करवाने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करना पड़ता है।
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वरिष्ठ आर्किटेक्ट उमेश कुमार बतरा ने बताया कि उन्होंने जो बिल्डिंग प्लान पास करने के लिए साल 2014 में जमा किया था, उसे आज तक पास नहीं किया गया। दिसंबर 2020 में ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की गई थी, लेकिन उसका भी कोई लाभ नहीं है। एस्टेट कार्यालय के कर्मचारी खुद उसमें रुकावट पैदा कर रहे हैं। अन्य आर्किटेक्ट्स ने कहा कि एस्टेट ऑफिस के कर्मचारी लोगों को हाईकोर्ट जाने की सलाह देते हैं। अगर सभी काम हाईकोर्ट से ही कराना है तब तो एस्टेट ऑफिस को बंद कर देना चाहिए। एक प्लान को पास करने में सालों लग जाते हैं। बेवजह की आपत्तियां जोड़ कर लोगों को परेशान किया जाता है और फिर उस आपत्ति को दूर करने के लिए पैसों की मांग की जाती है। विभाग के कर्मचारी पैसों की आस में ही रहते हैं, इसलिए एस्टेट ऑफिस भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। इस मौके पर पल्लव मुखर्जी, कुलजीत सिंह, सुनील महाजन, नवीन मंगलानी, तरुण माथुर, मदन शर्मा, अरुण महाजन समेत कई नामी इंजीनियर व आर्किटेक्ट ने एस्टेट ऑफिस के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए।
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प्लान एडवाइजरी कमेटी ने पास किया, लेकिन एस्टेट ऑफिस ने लटकाया
20 अप्रैल 2014, 17 दिसंबर 2014 और 30 नवंबर 2015 को तीन बिल्डिंग प्लान पास करने के लिए जमा किया, लेकिन आज तक पास नहीं हुए। प्लान एडवाइजरी कमेटी से भी मंजूरी मिल गई है, जिसमें यूटी के चीफ आर्किटेक्ट भी होते हैं, बावजूद इसके एस्टेट ऑफिस ने लटका रखा है, जबकि यह काम 30 दिन में होना चाहिए था। विभाग की तरफ से कारण भी नहीं बताया जाता है कि क्यों लटकाया गया है। ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम शुरू किया गया है, जो किसी काम का नहीं है।
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-उमेश कुमार बतरा वरिष्ठ आर्किटेक्ट
काम कराने के लिए हाईकोर्ट का करना पड़ा रुख
2017 में इंडस्ट्रियल प्लॉट के नक्शे के लिए प्लान जमा कराया। करीब ढाई साल बाद दिसंबर 2019 में उनकी तरफ से जवाब आया। पैसे जमा कराने को कहा गया। जब पैसे जमा करा दिए तो पांच दिन बाद कहा गया कि उन्हें नए दाम के तहत पैसे जमा कराने होंगे, जो 200 रुपये नहीं 3400 रुपये प्रति स्क्वॉयर फुट होंगे। उन्होंने कहा कि देरी एस्टेट ऑफिस ने की है, इसकी सजा वह क्यों भुगतें। आखिर में हाईकोर्ट में केस करना पड़ा है।
-अरुण महाजन, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़ के सचिव
ट्रांसफर फीस और एफएआर बढ़ाने की फीस बेहद ज्यादा (फोटो सहित)
एस्टेट ऑफिस के कर्मचारियों व अधिकारियों की वजह से शहरवासियों का कोई भी काम नहीं हो रहा है। छोटे काम के लिए कई-कई बार चक्कर काटना पड़ता है। प्रशासन की ओर से तय ट्रांसफर और एफएआर बढ़ाने की फीस बेहद ज्यादा है, जिसकी वजह से ज्यादातर उद्योगपति शहर से अपना कारोबार बंद करके पड़ोसी राज्यों का रुख कर रहे हैं।

नवीन मंगलानी, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज
एस्टेट ऑफिस बना भ्रष्टाचार का अड्डा
एस्टेट ऑफिस में एक काम कराने के लिए भी लोगों को कई साल चक्कर काटने पड़ते हैं। वहां कोई सुनवाई भी नहीं होती है। कर्मचारी न तो ठीक से बात करते हैं, न ही समय पर काम करते हैं। इसका खामिजाया लोगों को भुगतना पड़ रहा है। लोगों को काम कराने के लिए अदालत का रुख करना पड़ता है। आने वाले दिनों में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से भी मिलेंगे।
-पल्लव मुखर्जी, आर्किटेक्ट
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