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चंडीगढ़: डॉ. कमल गुप्ता व देवेंद्र बबली को मंत्री बनाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती, इन लोगों को बनाया गया प्रतिवादी

Thu, 30 Dec 2021 11:44 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 30 Dec 2021 11:44 PM IST
सार

हरियाणा में मंगलवार को भाजपा विधायक डॉ. कमल गुप्ता व जजपा विधायक देवेंद्र सिंह बबली ने मंत्री पद की शपथ ली। अब इन्हें मंत्री बनाने के फैसले को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि कुल विधायकों के 15 फीसदी को ही मंत्री बनाया जा सकता।

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Appointment of two new ministers in Haryana challenged in High Court
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिसार से भाजपा विधायक डॉ. कमल गुप्ता और टोहाना से जजपा विधायक देवेंद्र बबली को हरियाणा सरकार में मंत्री बनाए जाने के फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। एडवोकेट जगमोहन सिंह भट्टी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसे संविधान का उल्लंघन बताया है। दायर याचिका में उन्होंने कहा कि संविधान के 91 वें संशोधन के तहत राज्य में कैबिनेट मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल विधायकों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती है। 

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उन्होंने कहा है कि हरियाणा विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या 90 है। ऐसे में संविधान संशोधन के अनुसार कैबिनेट में अधिकतम 13.5 मंत्री हो सकते हैं, जिसके आधार पर इस समय हरियाणा में 14 मंत्री हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि 13.5 की जगह 14 मंत्री भी संविधान संशोधन का उल्लंघन है।
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याचिका में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, कमल गुप्ता, देवेंद्र बबली को प्रतिवादी बनाते हुए सरकार द्वारा दो और मंत्री बनाने के फैसले को गैरकानूनी, तानाशाह पूर्ण, असंवैधानिक और तय प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुए दोनों विधायकों की नियुक्ति रद्द करने की मांग की गई है।
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याचिकाकर्ता का आरोप है कि हरियाणा सरकार द्वारा जो मंत्री पद और कैबिनेट रैंक बांटे जा रहे हैं, उनका सीधा दबाव जनता पर पड़ रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि विधायकों को खुश करने के लिए मंत्रियों की संख्या बढ़ाई जा रही है और उनको भुगतान जनता की कमाई से किया जाता है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अपील की है कि तय संख्या से अधिक मंत्री होने के चलते इन अतिरिक्त मंत्रियों को हटाया जाए। साथ ही याचिका लंबित रहने तक उनको मिलने वाले लाभ पर रोक लगाई जाए।

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