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जिस नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट को पीजीआई ने निकाला, मंत्रालय ने किया बहाल
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 23 Apr 2016 02:41 PM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीजीआई के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें नर्सिंग सुपरिटेंडेंट जसपाल कौर के प्रोबेशन पीरियड को बढ़ाने और नौकरी से निकालने का आदेश दिया था। स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीजीआई को लेटर भेजकर दोनों फैसलों को रद्द करने और उसकी रिपोर्ट हफ्ते भर में भेजने के निर्देश दिए हैं।
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इस बारे में जब पीजीआई के आला अधिकारियों से बात की तो उन्होंने मामले में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक वह ऑर्डर नहीं देख लेते तब तक कुछ भी कमेंट नहीं करेंगे। हालांकि जसपाल कौर रेगुलर नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट के पद कार्य कर रही हैं। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ कैट में याचिका दायर की थी। कैट ने पीजीआई के फैसले पर रोक लगा दी थी।
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इसी साल नौ मार्च को संस्थान ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास पूरा मामला भेजा था। मंत्रालय के अधिकारियों ने मामले की जांच की और पाया कि जसपाल कौर के प्रोबेशन पीरियड को बढ़ाने और नौकरी से निकाले जाने के दौरान पीजीआई ने नियमों का पालना नहीं किया।
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यह है पूरा मामला
पीजीआई की नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट जसपाल कौर 2011 तक जीएमसीएच-32 में असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत थीं। इसी दौरान पीजीआई में नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट की पोस्ट निकली। उन्होंने इसके लिए अप्लाई किया और उनकी 2012 में नियुक्ति भी हो गई। उनका दो साल तक प्रोबेशन पीरियड था। लेकिन उनका एक साल और प्रोबेशन पीरियड बढ़ा दिया गया।
चार मार्च 2015 को उन्होंने पीजीआई को एक पत्र लिखा और पूछा कि उन्हें कब रेगुलर किया जा रहा है। अगले ही दिन यानी पांच मार्च को पीजीआई ने उन्हें नौकरी से रिलीव कर दिया था। उन्होंने बताया था कि आम तौर पर प्रोबेशन पीरियड दो साल का होता है, लेकिन उनका प्रोबेशन एक साल और बढ़ा दिया गया।
कैट का दरवाजा खटखटाया
पीजीआई से नौकरी निकाले जाने के बाद जसपाल कौर ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और पीजीआई के खिलाफ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) का दरवाजा खटखटाया। कैट ने उनकी याचिका स्वीकार की और मामले की सुनवाई की। जसपाल कौर ने कैट को बताया कि पीजीआई ने उन्हें नौकरी से निकाले जाने का कारण नहीं बताया। याचिका को स्वीकार करते हुए जसपाल कौर को नौकरी से निकाले जाने के फैसले पर स्टे लगा दिया। उसके बाद से जसपाल कौर रेगुलर पीजीआई में काम कर रही हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
पीजीआई प्रशासन के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जसपाल कौर प्रोबेशन पीरियड में चल रही थी। प्रोबेशन पीरियड के दौरान उनके किए गए कार्यों से प्रशासन संतुष्ट नहीं था। इसलिए उनका एक साल प्रोबेशन पीरियड बढ़ा दिया गया था, लेकिन फिर भी उनके कार्यों में प्रगति नहीं हुई थी। उसके बाद उन्हें नौकरी से निकालने का फैसला लिया गया था।