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हरियाणा में किसानों को राहत: बढ़ाई ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन की तिथि, अब इस दिन तक कर सकते हैं अप्लाई
Wed, 03 Sep 2025 08:04 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाया ब्यूरो चंडीगढ़
अमर उजाया ब्यूरो चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Wed, 03 Sep 2025 08:04 PM IST
सार
बारिश और जलभराव के चलते हरियाणा सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर खराब हुई फसलों का ब्यौरा देने के लिए आवेदन तिथि को आगे बढ़ा दिया है। डिटेल में पढ़ें खबरें...
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फसलों में नुकसान का जायजा लेते किसान
- फोटो : संवाद
विस्तार
बाढ़ और जलभराव से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने के लिए सरकार ने ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को 15 सितंबर, 2025 तक खुला रखने का निर्णय लिया है। इस पोर्टल के माध्यम से किसान अपनी खरीफ फसलों में हुए नुकसान की जानकारी अपलोड कर सकते हैं और क्षतिपूर्ति के लिए दावा दर्ज कर सकते हैं। अब तक करीब 4 लाख एकड़ खरीफ फसलों के नुकसान के दावे इस पोर्टल पर दर्ज किए जा चुके हैं।
प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने बुधवार को एक उच्चस्तरीय रिव्यू बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें प्रदेश में सामान्य से अधिक वर्षा के कारण उत्पन्न हुई स्थिति और बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। इस बैठक में विभिन्न विभागों, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन इकाइयों और अन्य हितधारकों के साथ तैयारियों का जायजा लिया गया। विपुल गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दावों का सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए ताकि किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके। प्रदेश में इस मानसून सीजन में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिसके कारण कई क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है।
राजस्व मंत्री ने पहले से लागू किए गए उपायों की प्रभावशीलता की समीक्षा की और कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। बैठक में फ्लड कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली, राहत सामग्री (रिलीफ स्टॉक), और बचाव उपकरणों (रेस्क्यू इक्विपमेंट) की उपलब्धता की समीक्षा की गई। विभाग ने सेना, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), और स्वयंसेवकों (वॉलंटियर्स) के साथ समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया को भी मजबूत करने पर जोर दिया। इस वर्ष हरियाणा को स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (एसडीआरएफ) के तहत लगभग 636 करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त हुआ है। यह फंड आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा सभी जिला उपायुक्तों को आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए रिजर्व फंड उपलब्ध कराया गया है, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग को भी विशेष रिजर्व फंड प्रदान किया गया है।
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कैबिनेट मंत्री ने बताया कि आईआरबी भोंडसी की पहली बटालियन जिसमें 950 जवान शामिल हैं, को हरियाणा स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के रूप में नामित किया गया है। यह बल आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत और बचाव कार्यों के लिए तैयार है। यह टीम यमुनानगर, अंबाला, पंचकूला, करनाल, कैथल, पलवल, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, हिसार, रोहतक, और गुरुग्राम जैसे संवेदनशील जिलों में तैनात की गई है। इसके अलावा एचएसडीआरएफ के लिए 1149 पद स्वीकृत किए गए हैं, जो आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्यों के लिए 151 नावों को राज्य के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया गया है। ये नावें जलभराव और बाढ़ की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में सहायक होंगी। बैठक में वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि भारी बारिश की वजह से कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित हुआ है। विभाग ने प्रभावित लोगों को तत्काल राहत और सहायता प्रदान करने के साथ साथ किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी उपाय किए हैं।
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प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने बुधवार को एक उच्चस्तरीय रिव्यू बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें प्रदेश में सामान्य से अधिक वर्षा के कारण उत्पन्न हुई स्थिति और बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। इस बैठक में विभिन्न विभागों, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन इकाइयों और अन्य हितधारकों के साथ तैयारियों का जायजा लिया गया। विपुल गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दावों का सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए ताकि किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके। प्रदेश में इस मानसून सीजन में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिसके कारण कई क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है।
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राजस्व मंत्री ने पहले से लागू किए गए उपायों की प्रभावशीलता की समीक्षा की और कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। बैठक में फ्लड कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली, राहत सामग्री (रिलीफ स्टॉक), और बचाव उपकरणों (रेस्क्यू इक्विपमेंट) की उपलब्धता की समीक्षा की गई। विभाग ने सेना, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), और स्वयंसेवकों (वॉलंटियर्स) के साथ समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया को भी मजबूत करने पर जोर दिया। इस वर्ष हरियाणा को स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (एसडीआरएफ) के तहत लगभग 636 करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त हुआ है। यह फंड आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा सभी जिला उपायुक्तों को आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए रिजर्व फंड उपलब्ध कराया गया है, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग को भी विशेष रिजर्व फंड प्रदान किया गया है।
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कैबिनेट मंत्री ने बताया कि आईआरबी भोंडसी की पहली बटालियन जिसमें 950 जवान शामिल हैं, को हरियाणा स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के रूप में नामित किया गया है। यह बल आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत और बचाव कार्यों के लिए तैयार है। यह टीम यमुनानगर, अंबाला, पंचकूला, करनाल, कैथल, पलवल, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, हिसार, रोहतक, और गुरुग्राम जैसे संवेदनशील जिलों में तैनात की गई है। इसके अलावा एचएसडीआरएफ के लिए 1149 पद स्वीकृत किए गए हैं, जो आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्यों के लिए 151 नावों को राज्य के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया गया है। ये नावें जलभराव और बाढ़ की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में सहायक होंगी। बैठक में वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि भारी बारिश की वजह से कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित हुआ है। विभाग ने प्रभावित लोगों को तत्काल राहत और सहायता प्रदान करने के साथ साथ किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी उपाय किए हैं।