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कैबिनेट बैठक : मसालों पर वैट के मामले में भड़के अनिल जोशी
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Sat, 30 Jul 2016 12:12 AM IST
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Minister Anil Joshi
- फोटो : file photo
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मसाले पर वैट कम करने की पंजाब विधानसभा में घोषणा के बावजूद अधिसूचना जारी न होने से शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी खफा हो गए। भड़के जोशी ने यहां तक कह डाला कि मसालों पर वैट का मामला कैबिनेट की प्रोसिडिंग में नहीं आया तो वह बायकॉट कर देंगे। इस पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने मामले में हस्तक्षेप कर वैट कम करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी और इसे कैबिनेट की अगली बैठक में विधिवत पारित करवाने का आश्वासन दिया।
विधानसभा में बजट के दौरान मंत्री अनिल जोशी ने अपने गृह क्षेत्र अमृतसर स्थित प्रदेश की सबसे बड़ी मसाला मंडी का मामला उठाते हुए दिल्ली की तर्ज पर साबुत हल्दी को वैट मुक्त करने और धनिया, जीरा, काली मिर्च और अजवाइन पर वैट कम करने का मुद्दा उठाया था। उस वक्त उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने इसे स्वीकार करते हुए वित्त मंत्री को आवश्यक कदम उठाने को कहा था। उसके बाद काफी समय तक इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं हुई और जोशी लगातार मामला उठाते रहे। इसी दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि तकनीकी रूप से इस मामले को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही अधिसूचना जारी होगी।
उधर, जोशी ने पहले ही कह दिया था कि इस बार कैबिनेट के एजेंडे में इस मुद्दे को शामिल न किया गया तो वह बायकॉट करेंगे। इसके बावजूद कैबिनेट की बैठक के एजेंडे में यह मामला नहीं शामिल था। कैबिनेट बैठक शुरू होते ही जोशी ने यह मामला उठा दिया। उनका कहना था कि बजट चर्चा के दौरान इस मुद्दे को स्वीकार करने के बावजूद इसकी विधिवत अधिसूचना जारी नहीं होती तो कैबिनेट बैठक में हिस्सा लेने का कोई फायदा नहीं है। माहौल गर्माता देख बादल ने खुद हस्तक्षेप किया और मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि दस अगस्त को होने वाली कैबिनेट की अगली बैठक में इस मुद्दे को एजेंडे में शामिल किया जाए, ताकि कैबिनेट मुहर के बाद व्यापारियों को राहत दी जा सके।
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विधानसभा में बजट के दौरान मंत्री अनिल जोशी ने अपने गृह क्षेत्र अमृतसर स्थित प्रदेश की सबसे बड़ी मसाला मंडी का मामला उठाते हुए दिल्ली की तर्ज पर साबुत हल्दी को वैट मुक्त करने और धनिया, जीरा, काली मिर्च और अजवाइन पर वैट कम करने का मुद्दा उठाया था। उस वक्त उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने इसे स्वीकार करते हुए वित्त मंत्री को आवश्यक कदम उठाने को कहा था। उसके बाद काफी समय तक इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं हुई और जोशी लगातार मामला उठाते रहे। इसी दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि तकनीकी रूप से इस मामले को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही अधिसूचना जारी होगी।
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उधर, जोशी ने पहले ही कह दिया था कि इस बार कैबिनेट के एजेंडे में इस मुद्दे को शामिल न किया गया तो वह बायकॉट करेंगे। इसके बावजूद कैबिनेट की बैठक के एजेंडे में यह मामला नहीं शामिल था। कैबिनेट बैठक शुरू होते ही जोशी ने यह मामला उठा दिया। उनका कहना था कि बजट चर्चा के दौरान इस मुद्दे को स्वीकार करने के बावजूद इसकी विधिवत अधिसूचना जारी नहीं होती तो कैबिनेट बैठक में हिस्सा लेने का कोई फायदा नहीं है। माहौल गर्माता देख बादल ने खुद हस्तक्षेप किया और मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि दस अगस्त को होने वाली कैबिनेट की अगली बैठक में इस मुद्दे को एजेंडे में शामिल किया जाए, ताकि कैबिनेट मुहर के बाद व्यापारियों को राहत दी जा सके।
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