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Chandigarh News: बायोमैट्रिक अटेंडेंस लागू होने पर भड़के आंगनबाड़ी वर्कर-हेल्पर, बोले- डीसी रेट दें, फिर लागू करें नई व्यवस्था
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चंडीगढ़। केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन की कई योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचाने वालीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं व हेल्पर इन दिनों मानसिक तौर पर बेहद परेशान हैं। एक तो उनका मानदेय बेहद कम है। वर्षों से एक रुपये नहीं बढ़ा है और अब मंगलवार से विभाग ने बायोमैट्रिक अटेंडेंस लागू दिया है। आंगनबाड़ी वर्करों का कहना है कि वह बायोमैट्रिक अटेंडेंस देने के लिए तैयार है लेकिन उन्हें उसके अनुसार वेतन भी मिले। कहा कि डीसी रेट मिलेगा तो वह पूरे टाइम काम करने के लिए तैयार हैं।
आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्परों का कहना है कि वह बच्चों और महिलाओं के पोषण का काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं, लेकिन न तो उनका मानदेय बढ़ाया गया और न ही उनकी अन्य समस्याओं पर ध्यान दिया गया। उल्टा, अब बायोमैट्रिक अटेंडेंस लागू कर परेशान किया जा रहा है। वर्करों का यह भी कहना है कि समाज कल्याण विभाग सेवा की जगह उन्हें नौकरी कराने पर तुला हुआ है। एक आंगनबाड़ी वर्कर ने कहा कि अगर विभाग बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू कर नौकरी ही कराना चाहता है तो उन्हें उतने पैसे भी मिलने चाहिए। बताया कि जहां पंजाब और हरियाणा में उनके समकक्ष वर्करों को 14,000 से 15,000 रुपये तक मानदेय मिलता है, वहीं चंडीगढ़ में वे मात्र 8,100 रुपये में गुजारा करने को मजबूर हैं। इतने कम मानदेय में उनका गुजारा पहले ही मुश्किल है और अब विभाग द्वारा बायोमैट्रिक अटेंडेंस लागू कर उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ा दी गई हैं। उन्होंने मांग की है कि विभाग अगर बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करना चाहता है तो उन्हें पर्याप्त मेहनताना भी दिया जाए। वर्करों और हेल्परों ने चेतावनी दी है कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो वे आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएंगे।
महंगाई कई गुना बढ़ी, मानदेय जस का तस
वर्करों ने यह भी बताया कि उनका मानदेय वर्षों से नहीं बढ़ाया गया है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनकी आय में कोई वृद्धि नहीं हुई। इसके बावजूद उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे हर काम समय पर और बिना किसी शिकायत के पूरा करें। उन्होंने विभाग से अपील की है कि वे उनकी समस्याओं को समझें और उनके हित में फैसले लें। बायोमैट्रिक अटेंडेंस जैसे नियम थोपने की बजाय उनके मानदेय में वृद्धि की जाए और उनकी परिस्थितियों को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। बता दें कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व हेल्परों को केंद्र और प्रशासन की ओर से मानदेय जारी होता है। इनमें से कार्यकर्ताओं को 3600 रुपये प्रशासन और 4500 रुपये केंद्र और हेल्परों को 1800 रुपये प्रशासन और 2500 रुपये केंद्र सरकार से मिलते हैं। यह राशि भी कई बार महीनों बाद मिलती है।
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उपस्थिति से संबंधित त्रुटियों और विसंगतियों को किया जा सकेगा खत्म : समाज कल्याण विभाग
इस मुद्दे पर समाज कल्याण विभाग ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। इसमें कहा है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों की उपस्थिति को पारदर्शी तरीके से ट्रैक करना है। ये कार्यकर्ता 33,500 बच्चों (6 महीने से 6 साल तक), 3,050 गर्भवती महिलाओं और 3,065 स्तनपान कराने वाली माताओं को सेवाएं प्रदान करते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र सुबह 9:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक खुले रहते हैं और पोषण, बाल विकास, स्वास्थ्य जागरूकता और मातृ-शिशु कल्याण से संबंधित सेवाएं प्रदान करते हैं। नई बायोमेट्रिक प्रणाली फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक पर आधारित है और उपस्थिति को स्वचालित रूप से रिकॉर्ड करेगी। इससे उपस्थिति से संबंधित त्रुटियों और विसंगतियों को खत्म किया जा सकेगा। बायोमेट्रिक सत्यापन सुनिश्चित करेगा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायक समय पर केंद्रों में मौजूद रहें। इससे सेवाओं की गुणवत्ता और सुचारू वितरण में सुधार होगा।
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आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्परों का कहना है कि वह बच्चों और महिलाओं के पोषण का काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं, लेकिन न तो उनका मानदेय बढ़ाया गया और न ही उनकी अन्य समस्याओं पर ध्यान दिया गया। उल्टा, अब बायोमैट्रिक अटेंडेंस लागू कर परेशान किया जा रहा है। वर्करों का यह भी कहना है कि समाज कल्याण विभाग सेवा की जगह उन्हें नौकरी कराने पर तुला हुआ है। एक आंगनबाड़ी वर्कर ने कहा कि अगर विभाग बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू कर नौकरी ही कराना चाहता है तो उन्हें उतने पैसे भी मिलने चाहिए। बताया कि जहां पंजाब और हरियाणा में उनके समकक्ष वर्करों को 14,000 से 15,000 रुपये तक मानदेय मिलता है, वहीं चंडीगढ़ में वे मात्र 8,100 रुपये में गुजारा करने को मजबूर हैं। इतने कम मानदेय में उनका गुजारा पहले ही मुश्किल है और अब विभाग द्वारा बायोमैट्रिक अटेंडेंस लागू कर उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ा दी गई हैं। उन्होंने मांग की है कि विभाग अगर बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करना चाहता है तो उन्हें पर्याप्त मेहनताना भी दिया जाए। वर्करों और हेल्परों ने चेतावनी दी है कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो वे आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएंगे।
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महंगाई कई गुना बढ़ी, मानदेय जस का तस
वर्करों ने यह भी बताया कि उनका मानदेय वर्षों से नहीं बढ़ाया गया है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनकी आय में कोई वृद्धि नहीं हुई। इसके बावजूद उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे हर काम समय पर और बिना किसी शिकायत के पूरा करें। उन्होंने विभाग से अपील की है कि वे उनकी समस्याओं को समझें और उनके हित में फैसले लें। बायोमैट्रिक अटेंडेंस जैसे नियम थोपने की बजाय उनके मानदेय में वृद्धि की जाए और उनकी परिस्थितियों को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। बता दें कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व हेल्परों को केंद्र और प्रशासन की ओर से मानदेय जारी होता है। इनमें से कार्यकर्ताओं को 3600 रुपये प्रशासन और 4500 रुपये केंद्र और हेल्परों को 1800 रुपये प्रशासन और 2500 रुपये केंद्र सरकार से मिलते हैं। यह राशि भी कई बार महीनों बाद मिलती है।
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उपस्थिति से संबंधित त्रुटियों और विसंगतियों को किया जा सकेगा खत्म : समाज कल्याण विभाग
इस मुद्दे पर समाज कल्याण विभाग ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। इसमें कहा है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों की उपस्थिति को पारदर्शी तरीके से ट्रैक करना है। ये कार्यकर्ता 33,500 बच्चों (6 महीने से 6 साल तक), 3,050 गर्भवती महिलाओं और 3,065 स्तनपान कराने वाली माताओं को सेवाएं प्रदान करते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र सुबह 9:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक खुले रहते हैं और पोषण, बाल विकास, स्वास्थ्य जागरूकता और मातृ-शिशु कल्याण से संबंधित सेवाएं प्रदान करते हैं। नई बायोमेट्रिक प्रणाली फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक पर आधारित है और उपस्थिति को स्वचालित रूप से रिकॉर्ड करेगी। इससे उपस्थिति से संबंधित त्रुटियों और विसंगतियों को खत्म किया जा सकेगा। बायोमेट्रिक सत्यापन सुनिश्चित करेगा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायक समय पर केंद्रों में मौजूद रहें। इससे सेवाओं की गुणवत्ता और सुचारू वितरण में सुधार होगा।