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एनेस्थीसिया में अब मिलेंगे विकल्प, जानने के लिए पढ़ें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 20 Feb 2014 10:12 AM IST
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सर्जरी के दौरान मरीजों को दिया जाने वाला एनेस्थीसिया अब विस्तृत हो गया है। यह मरीज पर निर्भर है कि वह किस प्रकार का एनेस्थीसिया लेना चाहता है।
मरीज अपनी सर्जरी देखना चाहता है तो उसको वैसा एनेस्थीसिया दिया जा सकता है और यदि वह पूरी तरह से बेहोश होना चाहता है कि आपरेशन कब हो गया उसे मालूम न पड़े तो उसके लिए भी विकल्प मौजूद हैं। यही नहीं, एनेस्थीसिया को लेकर हमेशा डरते रहना गलत है।
पीजीआई के डिपार्टमेंट आफ एनेस्थीसिया की प्रेस कान्फ्रेस में डाक्टर ज्योत्सना विज ने कहा कि मरीजों के बीच एनेस्थीसिया को लेकर काफी भ्रम की स्थिति है। अब बाल जितनी सुई है और एनेस्थीसिया की विस्तृत ड्रग्स की रेंज।
यह मरीज का सेंशेसन कम कर देते हैं। यदि किसी मरीज का आपरेशन हो रहा है तो मानीटर बता देता है कि मरीज कब होश में आएगा। ऐसी दवा है जिनका असर सिर्फ आपरेशन के दौरान ही रहता है।
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वहीं डॉक्टर एसके मल्होत्रा ने कहा कि प्रति वर्ष औसतन 50 हजार आपरेशन होते हैं। मरीज कई बार अपनी बातों को छुपाते हैं, जिसकी वजह से नतीजा भी गलत होता है।
मसलन यदि कोई बीपी की दवा लेता है और वह नहीं बताता है तो कई दिक्कत हो सकती है। नशा करने वालों को तो एनेस्थीसिया देने पर परेशानी ही होती है। उनकी ड्रग्स की लत की वजह से दवा भी असर नहीं करती है।
पेनलेस डिलीवरी ठीक पर कामर्शियलाइज ज्यादा
डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के लिए अब पेनलेस डिलीवरी का तरीका है, लेकिन इसका कामर्शियलाइजेशन ज्यादा है।
एनेस्थेलाजिस्ट की भूमिका
सर्जरी के दौरान एनेस्थेलाजिस्ट की अहम भूमिका होती है। एनस्थेलाजिस्ट आपरेशन के दौैरान मौजूद रहता है। इस दौरान दिल, फेफड़े और किडनी को आब्जर्व करने के लिए स्पेशल मानीटर लगाए जाते हैं।
प्री एनेस्थेटिक क्लीनिक
डिपार्टमेंट आफ एनेस्थीसिया और इंटेंसिव केयर द्वारा मरीज का परीक्षण किया जाता है। इसमें मरीज की फिटनेस और उसके सर्जिकल तरीकों को देखा जाता है। इस दौरान एक्स रे, लैब और क्लीनिकल एक्जाम को देखा जाता है। औसतन 17000 नए और फालोअप मरीजों को सर्जिकल डिपार्टमेंट प्रतिवर्ष रेफर किया जाता है।
सर्जरी के लिए यह एनेस्थीसिया
जनरल एनेस्थीसिया
1-रीजनल एनेस्थीसिया
2-लोकल एनेस्थीसिया
टाइप आफ सर्जरी
2011-2012-2013
न्यूरो सर्जरी-3810-4075--4306
जनरल सर्जरी-3414-3741-3806
प्लास्टिक सर्जरी-1847-2063-2422
आर्थोपेडिक्स-3334-3468-4162
यूरोलाजी-1270-1873-2003
ओबीएसटीटी और गायनी-2573-2969-3035
केटीपी-376-398-0
ईएनटी-1557-1556-1968
सीटीयू सर्जरी-1060-1243-1468
पेड्रिआटिक सर्जरी-2358-2785-3100
रेडियोथेरेपी-312-310-409
ओरल हेल्थ साइंस-163-192-245
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मरीज अपनी सर्जरी देखना चाहता है तो उसको वैसा एनेस्थीसिया दिया जा सकता है और यदि वह पूरी तरह से बेहोश होना चाहता है कि आपरेशन कब हो गया उसे मालूम न पड़े तो उसके लिए भी विकल्प मौजूद हैं। यही नहीं, एनेस्थीसिया को लेकर हमेशा डरते रहना गलत है।
पीजीआई के डिपार्टमेंट आफ एनेस्थीसिया की प्रेस कान्फ्रेस में डाक्टर ज्योत्सना विज ने कहा कि मरीजों के बीच एनेस्थीसिया को लेकर काफी भ्रम की स्थिति है। अब बाल जितनी सुई है और एनेस्थीसिया की विस्तृत ड्रग्स की रेंज।
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यह मरीज का सेंशेसन कम कर देते हैं। यदि किसी मरीज का आपरेशन हो रहा है तो मानीटर बता देता है कि मरीज कब होश में आएगा। ऐसी दवा है जिनका असर सिर्फ आपरेशन के दौरान ही रहता है।
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वहीं डॉक्टर एसके मल्होत्रा ने कहा कि प्रति वर्ष औसतन 50 हजार आपरेशन होते हैं। मरीज कई बार अपनी बातों को छुपाते हैं, जिसकी वजह से नतीजा भी गलत होता है।
मसलन यदि कोई बीपी की दवा लेता है और वह नहीं बताता है तो कई दिक्कत हो सकती है। नशा करने वालों को तो एनेस्थीसिया देने पर परेशानी ही होती है। उनकी ड्रग्स की लत की वजह से दवा भी असर नहीं करती है।
पेनलेस डिलीवरी ठीक पर कामर्शियलाइज ज्यादा
डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के लिए अब पेनलेस डिलीवरी का तरीका है, लेकिन इसका कामर्शियलाइजेशन ज्यादा है।
एनेस्थेलाजिस्ट की भूमिका
सर्जरी के दौरान एनेस्थेलाजिस्ट की अहम भूमिका होती है। एनस्थेलाजिस्ट आपरेशन के दौैरान मौजूद रहता है। इस दौरान दिल, फेफड़े और किडनी को आब्जर्व करने के लिए स्पेशल मानीटर लगाए जाते हैं।
प्री एनेस्थेटिक क्लीनिक
डिपार्टमेंट आफ एनेस्थीसिया और इंटेंसिव केयर द्वारा मरीज का परीक्षण किया जाता है। इसमें मरीज की फिटनेस और उसके सर्जिकल तरीकों को देखा जाता है। इस दौरान एक्स रे, लैब और क्लीनिकल एक्जाम को देखा जाता है। औसतन 17000 नए और फालोअप मरीजों को सर्जिकल डिपार्टमेंट प्रतिवर्ष रेफर किया जाता है।
सर्जरी के लिए यह एनेस्थीसिया
जनरल एनेस्थीसिया
1-रीजनल एनेस्थीसिया
2-लोकल एनेस्थीसिया
टाइप आफ सर्जरी
2011-2012-2013
न्यूरो सर्जरी-3810-4075--4306
जनरल सर्जरी-3414-3741-3806
प्लास्टिक सर्जरी-1847-2063-2422
आर्थोपेडिक्स-3334-3468-4162
यूरोलाजी-1270-1873-2003
ओबीएसटीटी और गायनी-2573-2969-3035
केटीपी-376-398-0
ईएनटी-1557-1556-1968
सीटीयू सर्जरी-1060-1243-1468
पेड्रिआटिक सर्जरी-2358-2785-3100
रेडियोथेरेपी-312-310-409
ओरल हेल्थ साइंस-163-192-245