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Chandigarh News: चंडीगढ़ में एनीमिया से महिलाओं की स्थिति खराब, 60 प्रतिशत में खून की कमी

Wed, 01 Mar 2023 02:11 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 01 Mar 2023 02:11 AM IST
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Anemia worsens the condition of women in Chandigarh, anemia in 60 percent
चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल की आधे से अधिक महिलाएं एनीमिया ग्रस्त हैं। खून की कमी के कारण तमाम तरह की परेशानियों से जूझ रही हैं। चिंता की बात यह है कि जानकारी के अभाव में उपलब्ध संसाधनों के बावजूद खानपान में लापरवाही बरत खून की कमी का शिकार हो रही हैं। इसकी पुष्टि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) की रिपोर्ट कर रही है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 14 साल से 49 साल के बीच की 60 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। वहीं किशोरियों में यह अनुपात 57 प्रतिशत है। दोनों ही स्तर बेहद खतरनाक है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किशोरावस्था में खून की कमी को दूर नहीं किया गया तो आगे चलकर वह मां और होने वाले बच्चे दोनों के लिए घातक साबित हो सकता है। इंडियन सोसायटी ऑफ असिस्टेंट रिप्रोडक्शन की पूर्व अध्यक्ष एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गुरप्रीत कौर ने बताया कि एनीमिया का सबसे बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी होना है। जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं औ, बॉडी को जरूरत के अनुसार डाइट नहीं मिलती तो इससे खून की कमी होने लगती है। इसके साथ ज्यादातर ये परेशानी किशोरावस्था और महिलाओं में माहवारी के दौरान खून की कमी से भी हो जाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि शरीर में एनीमिया की कमी से दूसरी अन्य बीमारी होने का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं पीजीआई ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के प्रमुख प्रोफेसर रतिराम शर्मा का कहना है कि खून की कमी के कारण महिलाएं चाह कर भी रक्तदान नहीं कर पाती। ऐसे में जरूरी है कि वह आयरन युक्त आहार लें।
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इन लक्षणों पर करें गौर
कमजोरी, थकान, पीली त्वचा, सांस की तकलीफ, हाइपरटेंशन, बार-बार सिरदर्द होना, चिड़चिड़ा, फटी या लाल जीभ, भूख में कमी।
इनसेट-
सामान्य हीमोग्लोबिन स्तर
पुरुष: 13.8 से 17.2 ग्राम/डीएल
महिलाएं: 12.1 से 15.1 ग्राम/डीएल
बच्चे: 11 से 16 ग्राम/डीएल
गर्भवती महिलाएं: 11 से 15.1 ग्राम/डीएल
इनसेट-
बढ़ाना है खून तो इसका सेवन करें
आयरन- आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे बीफ, मीट, बीन्स, दाल, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां और सूखे मेवे।
फोलेट-यह पोषक तत्व और इसका सिंथेटिक रूप फोलिक एसिड, फल और फलों के रस, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां, हरी मटर, राजमा, मूंगफली और अनाज प्रोडक्ट्स जैसे रोटी, पास्ता और चावल में पाया जा सकता है।
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विटामिन बी 12- विटामिन बी-12 से भरपूर खाद्य पदार्थों में मांस, डेयरी प्रोडक्ट और सोया से बनी चीजें शामिल हैं।
विटामिन सी- विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों में खट्टे फल और जूस, मिर्च, ब्रोकोली, टमाटर, खरबूजे और स्ट्रॉबेरी शामिल हैं।
नोट- जैसा जीएमएसएच 16 की आहार विशेषज्ञ मनीषा अरोड़ा ने बताया।
सर्वे की रिपोर्ट बयां कर रही चंडीगढ़ में एनीमिया की गंभीरता (एनएफएचएस 5)
- 6 से 59 माह के एनीमिया ग्रस्त बच्चे- 55 प्रतिशत
- 15 से 49 साल की एनीमिया ग्रस्त महिलाएं- 60.3 प्रतिशत
- 15 से 19 साल की एनीमिया ग्रस्त किशोरियां- 57.5 प्रतिशत
- 15 से 49 साल के एनीमिया ग्रस्त पुरूष- 8.1 प्रतिशत

भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान को लेकर अनदेखी गंभीर स्थिति उत्पन्न कर रही है। खास तौर पर महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित हैं। इसका मुख्य कारण असमय व असंतुलित भोजन करना है। कामकाजी महिलाएं जहां फास्ट फूड व अनियमित खानपान की आदत के कारण एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो रही हैं, वहीं गृहणी खुद के सेहत की अनदेखी से बीमारियों की चपेट में आ रही हैं। ऐसे में जरूरी है खुद के लिए समय निकालना व संतुलित आहार लेना।
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-प्रो पूनम खन्ना, आहार विशेषज्ञ पीजीआई सामुदायिक स्वास्थ्य विभाग
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