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मंच पर बच्चों ने पेश की वो कहानी, सोचने को मजबूर हुआ दिमाग इंसानी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 07 Nov 2016 08:35 PM IST
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पंजाब कला भवन में बच्चों ने पेश किया नाटक
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चंडीगढ़ स्थित पंजाब कला भवन में मंच पर बच्चों ने गुरु और चेले की ऐसी कहानी पेश की कि हर कोई सोचने पर मजबूर हो गया। लालच आदमी की आंखों पर पट्टी बांध देता है, जिस कारण वह सही - गलत में अंतर नहीं कर पाता और गलत रास्ते पर चल पड़ता है। कुछ ऐसा ही संदेश ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ नाटक ने दिया। इसका मंचन सोमवार को पंजाब कला भवन के ओपन एयर थिएटर में हुआ।
डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस नाटक में स्काई वर्ल्ड स्कूल पंचकूला के 22 कलाकारों ने प्रस्तुति दी। नाटक का निर्देशन कामिनी मेहता ने किया था। नाटक की कहानी एक शहर के इर्द-गिर्द घूमती है जहां हर चीज बहुत ही कम कीमत में उपलब्ध होती है। उस शहर में एक गुरु अपने दो शिष्यों के साथ आता है। यहां का माहौल देखकर शिष्य बहुत हैरान होते हैं और गुरु से यहीं ठहरने का आग्रह करते हैं।
तब गुरु उन्हें समझाता है कि जिस नगर के राजा को पैसे की अहमियत न पता हो वह समझदार नहीं हो सकता और ऐसे में कभी न कभी इस नगर में आर्थिक संकट जरूर आएगा। लेकिन एक चेला अपने गुरु की बात काटकर वहां हठ पूर्वक रुक जाता है। गुरु जाने से पहले उसे यह नसीहत देकर जाता है कि एक न एक दिन तुम जरूर इस लालच के कारण मुसीबत में फंसोगे।
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नाटक के अंत में यही होता भी है। उसे बिना किसी गलती के राजा फांसी पर लटकाने का आदेश दे देता है। तब चेला अपने गुरु की बात याद करता है और वहां उसका गुरु आ जाता है। इसके बाद गुरु चेले को बचाने के लिए कह देता है कि इस समय जो भी व्यक्ति इस फांसी के फंदे पर चढ़ेगा वह पूरे साम्राज्य का बादशाह बन जाएगा। राजा गुरु की इस बात में आ जाता है और खुद फंदे पर लटक जाता है। इस तरह ज्यादा साम्राज्य की लालसा राजा की जान ले लेती है।
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डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस नाटक में स्काई वर्ल्ड स्कूल पंचकूला के 22 कलाकारों ने प्रस्तुति दी। नाटक का निर्देशन कामिनी मेहता ने किया था। नाटक की कहानी एक शहर के इर्द-गिर्द घूमती है जहां हर चीज बहुत ही कम कीमत में उपलब्ध होती है। उस शहर में एक गुरु अपने दो शिष्यों के साथ आता है। यहां का माहौल देखकर शिष्य बहुत हैरान होते हैं और गुरु से यहीं ठहरने का आग्रह करते हैं।
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तब गुरु उन्हें समझाता है कि जिस नगर के राजा को पैसे की अहमियत न पता हो वह समझदार नहीं हो सकता और ऐसे में कभी न कभी इस नगर में आर्थिक संकट जरूर आएगा। लेकिन एक चेला अपने गुरु की बात काटकर वहां हठ पूर्वक रुक जाता है। गुरु जाने से पहले उसे यह नसीहत देकर जाता है कि एक न एक दिन तुम जरूर इस लालच के कारण मुसीबत में फंसोगे।
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नाटक के अंत में यही होता भी है। उसे बिना किसी गलती के राजा फांसी पर लटकाने का आदेश दे देता है। तब चेला अपने गुरु की बात याद करता है और वहां उसका गुरु आ जाता है। इसके बाद गुरु चेले को बचाने के लिए कह देता है कि इस समय जो भी व्यक्ति इस फांसी के फंदे पर चढ़ेगा वह पूरे साम्राज्य का बादशाह बन जाएगा। राजा गुरु की इस बात में आ जाता है और खुद फंदे पर लटक जाता है। इस तरह ज्यादा साम्राज्य की लालसा राजा की जान ले लेती है।