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Punjab News: प्रदेश में आनंद विवाह अधिनियम होगा लागू, गुरुपर्व पर सीएम भगवंत मान ने की घोषणा

Tue, 08 Nov 2022 04:07 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 08 Nov 2022 04:07 PM IST
सार

मंगलवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह एलान किया है। यह एक्ट पंजाब में 2016 में बना लेकिन जनता को इस बारे जागरूक नहीं किया गया। 

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Anand Marriage Act will be implemented in Punjab
पंजाब सीएम भगवंत मान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (फाइल फोटो)

विस्तार

श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के पवित्र मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेकने के बाद एलान किया कि आनंद विवाह अधिनियम को पूरी तरह लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस एक्ट को 2016 में अधिसूचित किया गया था लेकिन यह तब से लागू नहीं हो सका है। देश के 22 राज्य इस एक्ट को पहले ही लागू कर चुके हैं लेकिन पंजाब इस मामले में पिछड़ गया है। इस एक्ट को अब सही मायनों में लागू किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि इस एक्ट के बारे में पहले भी सूबे के लोगों को जागरूक नहीं किया गया, जिसके चलते यह एक्ट अब तक लागू नहीं हो सका। उनकी सरकार इस एक्ट को लागू करने के साथ ही इसके बारे में लोगों को जागरूक करेगी और इस संबंध में व्यापक प्रचार भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेककर राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव, शांति और खुशहाली के लिए अरदास की। 
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प्रकाश पर्व के मौके पर संगत को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि वह महान गुरु द्वारा दिखाई सेवा और नम्रता की भावना को अपनाएं और श्री गुरु नानक देव जी की अनमोल विरासत पर चलते हुए शांतिमय, खुशहाल और स्वस्थ समाज की सृजन करने के लिए प्रयास करें।
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क्या है आनंद विवाह अधिनियम
भारत में पहली बार आनंद विवाह अधिनियम ब्रिटिश काल में 1909 में बना लेकिन लागू नहीं किया जा सका। 2007 में जब सुप्रीम कोर्ट ने सभी धर्मों के लिए मैरिज रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया तो सिख समुदाय ने आनंद विवाह अधिनियम को लागू करने की मांग उठाई। हालांकि इससे पहले 1955 में हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन को जोड़ते हुए हिंदू मैरिज एक्ट बनाया गया था लेकिन सिखों की शादियां हिंदू मैरिज एक्ट के तहत ही पंजीकृत होती रहीं हैं।

 सिख समुदाय की यह मांग रही कि उनके विवाह आनंद विवाह अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड हों, जिसे लेकर विदेश में भी सिखों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि पासपोर्ट पर सिख लिखा होता है और विवाह प्रमाणपत्र हिंदू धर्म का होता है। केंद्र सरकार ने 7 जून, 2012 को आनंद मैरिज एक्ट बनाया और संसद ने इसे पारित भी कर दिया। इस एक्ट को लेकर यह मुद्दा भी खड़ा हुआ कि आनंद विवाह अधिनियम में तलाक के बारे में कोई नियम नहीं है। इसे लेकर सिख विद्वानों का कहना है कि सिख धर्म की शादियों में तलाक का कोई प्रावधान नहीं है।

 
 

जगत गुरु श्री गुरु नानक देव जी महाराज के प्रकाश पर्व के अवसर पर आज हम 'आनंद विवाह अधिनियम' को पूरी तरह से लागू कर रहे हैं। इसकी मांग सिख समुदाय लंबे समय से कर रहा था। अब सिख संगत अधिनियम के तहत अपनी शादियों का पंजीकरण करा सकेगी। भगवंत मान, पंजाब के मुख्यमंत्री।

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