फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   an anonymous rage gripped LPU for 24 hours.

Chandigarh News: अफवाह से आगजनी तक, 24 घंटे एलपीयू में हावी रहा बेनाम आक्रोश

Sun, 27 Sep 2026 11:13 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 11:13 PM IST
विज्ञापन
an anonymous rage gripped LPU for 24 hours.
एलपीयू में लाठीचार्ज करती पुलिस।
रात में मोबाइल पर संदेश वायरल, सुबह हाईवे जाम, दोपहर में तोड़फोड़-आगजनी और शाम फिर उबाल
विज्ञापन

न कोई नेता, न बैनर, न मंच; पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल रहा, आखिर बात किससे करें

अमर उजाला ब्यूरो

जालंधर। एक मोबाइल संदेश से शुरू हुई बेचैनी 24 घंटे में ऐसे आक्रोश में बदल गई कि पंजाब की सबसे बड़ी निजी यूनिवर्सिटी में हजारों छात्रों के सामने पुलिस और प्रशासन की पूरी रणनीति उलझती दिखाई दी। शनिवार रात सोशल मीडिया पर एक छात्रा से जुड़ी कथित घटना के अलग-अलग दावे वायरल हुए। किसी में दुष्कर्म, किसी में सामूहिक दुष्कर्म और किसी में आत्महत्या की बात कही गई। आधिकारिक पुष्टि के बिना तेजी से फैलती इन सूचनाओं ने छात्रावासों में बेचैनी पैदा की। रात बढ़ी तो छात्र बाहर आने लगे, करीब दो बजे जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग जाम हो गया। सुबह पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज की, जांच के लिए विशेष जांच दल बनाया और विश्वविद्यालय ने छात्रों को जांच में शामिल करने की बात कही, लेकिन भरोसा तुरंत बहाल नहीं हुआ। इसके बाद गुस्सा और उग्र हुआ, परिसर में तोड़फोड़ हुई, वाहनों को नुकसान पहुंचा और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। रविवार शाम तक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि पुलिस के सामने हजारों छात्र थे, लेकिन बातचीत के लिए कोई एक नेता नहीं था। न कोई छात्र संगठन सामने था, न कोई बैनर, न कोई तय मंच और न कोई ऐसा व्यक्ति जिसे पुलिस भीड़ का प्रतिनिधि मानकर बातचीत आगे बढ़ा सके। अलग-अलग छात्रावासों से छात्र अपने स्तर पर जुड़ते गए और सोशल मीडिया पर चल रही सूचनाएं भीड़ के गुस्से को लगातार हवा देती रहीं। पुलिस एक तरफ कानून-व्यवस्था संभाल रही थी और दूसरी तरफ यह पता लगाने में लगी थी कि वास्तविक शिकायत क्या है, किस सूचना पर भरोसा किया जाए और छात्रों को समझाया किसके जरिए जाए।
विज्ञापन


शनिवार रात करीब पौने दो बजे पुलिस को परिसर में छात्रों के बड़ी संख्या में जुटने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस को पता चला कि छात्रों के बीच कथित दुष्कर्म को लेकर कई तरह के संदेश चल रहे हैं। समस्या यह थी कि सामने कोई एक शिकायतकर्ता नहीं था और न ही कोई ऐसा छात्र नेता था जो पूरी भीड़ की ओर से बात कर सके। रात करीब दो बजे आंदोलन का असर विश्वविद्यालय की सीमा से बाहर निकलकर हाईवे तक पहुंच गया। पुलिस ने छात्रों को समझाने और रास्ता खुलवाने की कोशिश की, लेकिन तब तक छात्रों के बीच यह धारणा मजबूत हो चुकी थी कि उन्हें पूरी सच्चाई नहीं बताई जा रही।
विज्ञापन
विज्ञापन


विश्वविद्यालय की ओर से सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को गलत और भ्रामक बताया गया और आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की अपील की गई। पुलिस ने भी कहा कि उसे शुरुआत में ऐसी घटना की कोई शिकायत नहीं मिली थी। लेकिन डिजिटल माध्यम पर चल रही खबरों और दावों की रफ्तार इतनी तेज थी कि आधिकारिक अपील पीछे छूट गई। रात में मुख्य गेट के पास आगजनी और वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। देखते ही देखते मामला अफवाह की जांच से निकलकर कानून-व्यवस्था की गंभीर चुनौती बन गया।

सुबह पुलिस ने छात्रों के बयान के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। जांच के लिए विशेष जांच दल बनाया गया। विश्वविद्यालय ने भी छात्रों के प्रतिनिधियों को जांच प्रक्रिया में शामिल करने की बात कही। इसके बावजूद गुस्सा कम नहीं हुआ। परिसर में तोड़फोड़ और आगजनी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैलने लगीं। यहां एक अजीब स्थिति पैदा हुई—जिस सोशल मीडिया से अफवाहों ने जन्म लिया था, वही अब आंदोलन की तस्वीरों और वीडियो को हजारों-लाखों लोगों तक पहुंचा रहा था। हर नया वीडियो भीड़ के बीच नई चर्चा और नई प्रतिक्रिया पैदा कर रहा था।

पुलिस के लिए चुनौती इसलिए भी असाधारण थी क्योंकि यह परंपरागत छात्र आंदोलन नहीं था। सामान्य स्थिति में पुलिस छात्र संगठनों के नेताओं से बातचीत करती है, उनकी मांगें सुनती है और उन्हीं के जरिए भीड़ को शांत करने की कोशिश करती है। एलपीयू में यह रास्ता मौजूद नहीं था। यहां कोई एक नेतृत्व नहीं था। भीड़ किसी एक आदेश पर नहीं जुट रही थी और किसी एक व्यक्ति के कहने पर पीछे हटने की स्थिति भी नहीं बन रही थी। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार भी कोई व्यक्तिगत छात्र भीड़ का नेता सामने नहीं आया।

एलपीयू में करीब 35 हजार छात्र पढ़ते हैं और बड़ी संख्या में विद्यार्थी परिसर के छात्रावासों में रहते हैं। कई छात्रावासों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी होने के कारण घटनाक्रम तेजी से फैलता गया। डीआईजी नवीन सिंगला ने खुद मौके पर मोर्चा संभाला। कई जिलों से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाया गया। पुलिस ने दबाव बनाने के साथ छात्रों को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन भीड़ लगातार घटनाक्रम के साथ अपना रुख बदलती रही। यही वजह रही कि एक जगह स्थिति संभलती दिखाई देती तो दूसरी जगह से फिर तनाव की सूचना आने लगती।

रविवार शाम तक एलपीयू का माहौल पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया। 24 घंटे के इस घटनाक्रम ने एक ऐसे छात्र आक्रोश की तस्वीर सामने रखी, जिसका कोई औपचारिक चेहरा नहीं था। यह किसी संगठन की घोषणा से पैदा नहीं हुआ था, बल्कि सोशल मीडिया पर चल रहे संदेशों, आपसी चर्चाओं, आशंकाओं और जवाब की मांग से धीरे-धीरे आकार लेता गया। यही कारण रहा कि पुलिस के लिए इसे संभालना पारंपरिक आंदोलन से कहीं ज्यादा मुश्किल साबित हुआ।


पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल यही कु भीड़ का कोई नेता नहीं है, तो बातचीत किससे की जाए? रात की अफवाह ने भीड़ पैदा की, भीड़ ने जवाब मांगा, जवाब से संतुष्टि नहीं हुई तो गुस्सा बढ़ा और गुस्सा बढ़ते-बढ़ते तोड़फोड़ और आगजनी तक पहुंच गया। एलपीयू में 24 घंटे तक पुलिस के सामने सिर्फ भीड़ नहीं थी, बल्कि एक ऐसा बेनाम आक्रोश था, जिसका कोई एक चेहरा नहीं था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed