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सोशल मीडिया पर ट्रोल हुआ अमृतसर ट्रेन हादसा, 59 मौतों के लिए लोगों को ठहराया गया जिम्मेदार!

Sun, 21 Oct 2018 01:03 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 21 Oct 2018 01:03 PM IST
Amritsar Train Accident Trolling on Social Media, Indian Railway
अमृतसर ट्रेन हादसा
अमृतसर ट्रेन हादसे के लिए कौन-कौन दोषी है, ये तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा। लेकिन सोशल मीडिया पर 59 मौतों का जिम्मेदार किस ठहराया जा रहा है, जानना चाहेंगे। दरअसल, अमृतसर ट्रेन हादसा सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल हो रहा है। यूजर्स का एक पक्ष लोगों को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा, यदि लोग होते जागरूक तो हादसे से बचा जा सकता था। लेकिन उससे पहले इन बातों पर सोचना हम सब का फर्ज बनता है कि भविष्य में अमृतसर जैसा हादसा फिर कभी ना हो?


इस हादसे के लिए ट्रैक पर खड़े लोग कितने जिम्मेदार हैं? हादसे के वीडियो देखने से साफ पता चल रहा है कि कुछ लोग अपने मोबाइल से रावण दहन के पुतले का वीडियो बना रहे हैं। आतिशबाजी का शोर और वीडियो बनाने में मशगूल लोगों को ट्रेन के आने का पता नहीं चला। हादसे से ठीक पहले भी ट्रैक से ट्रेन गुजरी थी, तब पटाखे का शोर नहीं था, इससे लोगों को अंदाजा लगा लेना चाहिए कि ट्रैक पर खड़ा होना किसी खतरे से कम नहीं है।


 

ट्रैक सिर्फ रेलगाड़ियों के लिए होता है

Amritsar Train Accident Trolling on Social Media, Indian Railway
Amritsar train accident - फोटो : PTI
इंसान की सुरक्षा के बारे में सबसे ज्यादा वो खुद ही सोच सकता है। इस हादसे के लिए ट्रेन और रेलवे पर सवाल उठाने से पहले यह समझ लेना जरूरी है कि रेलवे ट्रैक रेलगाड़ियों के चलने के लिए होते हैं ना कि खड़े होकर तमाशा देखने के लिए। हादसे के वीडियो साफ बता रहे हैं कि लोग इत्मीनान से रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर रावण दहन का आनंद ले रहे थे। उन्हें ट्रेन के आने जाने से कोई मतलब नहीं है। रेलवे अधिनियम 1989  की धारा 147 में इसके लिए एक कानून भी है, जिसके तहत रेलवे ट्रैक पर किसी कारण बैठना और खड़ा होना एक गंभीर अपराध है। इसके उल्लंघन पर छह माह तक का कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। रेलवे और सरकार को चाहिए इस कानून का कड़ाई से पालन करें।

सेल्फी और वीडियो बनाना भारत में महामारी
इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट आफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलाजी दिल्ली और कर्नजी मेलन यूनिवर्सिटी यूएस की एक स्टडी के मुताबिक सेल्फी लेने के दौरान सबसे ज्यादा मौते भारत में हुई हैं। साल 2014 से लेकर 2018 के बीच कुल 213 मौतें हुईं, जिनमें से 128 मौतें सिर्फ भारत की हैं। बाकी पूरे विश्व की। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में सेल्फी और वीडियो बनाना एक महामारी के तौर पर फैल गया है। सरकार चाहे कितने भी कदम उठा ले तब-तक कोई फायदा नहीं होगा, जब-तक हम खुद ही इन हादसों से सबक लेकर सचेत न हो जाएं।

विशेषज्ञ कहते हैं कि सेल्फी लें लेकिन ऐसे न लें कि अगली बार सेल्फी लेने लायक ही न बचें। अपना भी ख्याल रखें और अपने आस-पड़ोस वालों को भी समझाएं। फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम के चलते और मोबाइल फोन की सहज उपलब्धता के चलते सेल्फी, वीडियो और लाइव तक अब हर किसी की पहुंच है। लेकिन ऐसा करते हुए इतना भी बेसुध नहीं होना चाहिए कि आसपास का बिल्कुल ख्याल ही ना रहे। ये भी भुला दिया जाए कि जिस रेलवे ट्रैक पर खड़े हैं, वहां से कभी भी ट्रेन गुजर सकती है।

ऐसे होती है शुरुआत

Amritsar Train Accident Trolling on Social Media, Indian Railway
Amritsar train accident - फोटो : PTI
फिल्मकार व वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी ने अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा है कि सरकारों की लापरवाही से कभी कोई इंकार नहीं कर सकता लेकिन कुछ सवाल हम सबको खुद से पूछने चाहिए। इस देश में ज्यादातर लोग खुद ही आत्मघाती दस्ता बने हुए हैं। न तो उन्हें अपनी जान की परवाह है और न ही दूसरों की।

रेड लाइट होने पर भी कितने लोग उसे देखते हैं?
- दिल्ली में तो हम हेलमेट, सीट बेल्ट भी पहनते हैं पर ये सब होने के बाद भी यूपी में घुसते ही कितने लोग उतार देते हैं। (ऐसा चंडीगढ़ से पंचकूला व मोहाली में जाते वक्त होता है)
- जल्दबाजी के चक्कर में लोग रॉन्ग साइड पर चलते हैं
- रेलवे क्रॉसिंग हो जाने के बाद भी लोग फाटक के नीचे से साइकिल व बाइक निकालते हैं
- हजार बार मनाही के बावजूद चलती ट्रेन से प्लेटफॉर्म पर कौन उतरता चढ़ता है?

रेलवे ट्रैक पर किसी भी कारण बैठना और खड़ा होना एक अपराध है। प्रतिदिन बढ़ रहे रेल ट्रैक हादसों के मद्देनजर केंद्र सरकार एवं रेलवे को धारा 147 का सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों/टेलीविजन प्रचार प्रसार करना चाहिए। ताकि लोग जागरूक हो सके और सख्त कार्रवाई भी करे।
- हेमंत गुप्ता, वरिष्ठ एडवोकेट पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट

आजकल लोगों में सेल्फी और वीडियो बनाने की लत लग गई है। लोग इसमें इतने मशगूल हो जाते हैं कि वे न सिर्फ अपनी बल्कि दूसरों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। सेल्फी और वीडियो बनाकर वे दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं। ये काम अपनी खूबियों और गुणों से भी हो सकता है। जागरूक इंसान को चाहिए कि वे लोगों को इस बारे में जागरूक करें।
- डॉ. प्रमोद कुमार, वरिष्ठ मनोचिकित्सक चंडीगढ़

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