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अमृतसर ट्रेन हादसाः खुशकिस्मत रहा ये इंसान, वरना चली जाती 3 लोगों की जान, खत्म हो जाता परिवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर
Updated Sat, 20 Oct 2018 03:16 PM IST
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अमृतसर ट्रेन हादसा
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अमृतसर में हुए ट्रेन हादसे में 61 लोग मर गए, वहीं एक इंसान ऐसा रहा जिसका किस्मत ने साथ दिया। वरना तीन लोगों की जान चली जाती और पूरा परिवार खत्म हो जाता। उसे कुछ अंदेशा हुआ और पत्नी को खींच लिया। वरना उसकी जान चली जाती और साथ में बेटी की, उसकी खुद की भी।
बीबीसी पर चल रही खबर के मुताबिक, ये हैं पवन, जो उस समय पत्नी और बेटी के साथ ट्रैक पर मौजूद थे। पवन ने बताया कि बेटी उनके कंधे पर बैठी थी और पत्नी ने भी हाथ पकड़ रखा था। एक ट्रैक पर ट्रेन की वजह से हादसा हो चुका था। हम दूसरे ट्रैक पर थे, कि दूसरी ट्रेन का हॉर्न सुनाई दिया।
पवन ने बताया कि वे तुरंत रास्ता देने के लिए ट्रैक से हटने लगे कि वह स्पीड से आ गई। गनीमत रही कि उन्होंने पत्नी को हाथ पकड़ खींच लिया और वह ट्रैक की साइड में गिर गई। मैं भी गिर गया, लेकिन बेटी को पकड़ लिया। मेरी आंखों के आगे बिल्कुल अंधेरा छा गया था।
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पवन ने बताया कि भगवान का शुक्र है कि उन्होंने मुझे उसका हाथ खींचने की हिम्मत दी, वरना वो आज मेरे साथ न होती। हमारे जख्म तो भर जाएंगे, लेकिन जिंदगी भर का ये दर्द हम कभी भूला नहीं पाएंगे। हमारी आंखों के सामने इतने लोगों की जान चली गई।
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बीबीसी पर चल रही खबर के मुताबिक, ये हैं पवन, जो उस समय पत्नी और बेटी के साथ ट्रैक पर मौजूद थे। पवन ने बताया कि बेटी उनके कंधे पर बैठी थी और पत्नी ने भी हाथ पकड़ रखा था। एक ट्रैक पर ट्रेन की वजह से हादसा हो चुका था। हम दूसरे ट्रैक पर थे, कि दूसरी ट्रेन का हॉर्न सुनाई दिया।
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पवन ने बताया कि वे तुरंत रास्ता देने के लिए ट्रैक से हटने लगे कि वह स्पीड से आ गई। गनीमत रही कि उन्होंने पत्नी को हाथ पकड़ खींच लिया और वह ट्रैक की साइड में गिर गई। मैं भी गिर गया, लेकिन बेटी को पकड़ लिया। मेरी आंखों के आगे बिल्कुल अंधेरा छा गया था।
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पवन ने बताया कि भगवान का शुक्र है कि उन्होंने मुझे उसका हाथ खींचने की हिम्मत दी, वरना वो आज मेरे साथ न होती। हमारे जख्म तो भर जाएंगे, लेकिन जिंदगी भर का ये दर्द हम कभी भूला नहीं पाएंगे। हमारी आंखों के सामने इतने लोगों की जान चली गई।
घायलों के उपचार के लिए मैदान में उतारीं कई टीमें
AMRITSAR TRAIN
- फोटो : SELF
हादसे में जख्मी होने वाले लोगों का गुरु नानक देव अस्पताल और सिविल अस्पताल के अलावा जिले के 6 अन्य अस्पतालों में उपचार किया जा रहा है। इसके लिए कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को मैदान में उतारकर जिम्मेदारी दी गई है। ताकि किसी घायल के इलाज में कोताही न रहे।
सिविल अस्पताल के लिए सब-रजिस्ट्रार अमृतसर-1 जेपी सलवान और गुरु नानक देव अस्पताल के लिए अटारी के नायब तहसीलदार करणपाल सिंह को लगाया है। -मिलिट्री अस्पताल में बाबा बकाला के तहसीलदार लखविंदर सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हरतेज अस्पताल के लिए नायब तहसीलदार रोबिनजीत कौर, जीटी रोड स्थित अमनदीप अस्पताल में नायब तहसीलदार अमृतसर-1 लखविंदर सिंह, आईवीवाई अस्पताल में जिला माल अधिकारी मुकेश शर्मा को नोडल अधिकारी तैनात किया है। श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय अस्पताल में लोपोके के नायब तहसीलदार जगसीर सिंह, फोर्टिस अस्पताल में जंडियाला के नायब तहसीलदार अजय कुमार मोदगिल को नोडल अफसर तैनात किया गया है।
सिविल अस्पताल के लिए सब-रजिस्ट्रार अमृतसर-1 जेपी सलवान और गुरु नानक देव अस्पताल के लिए अटारी के नायब तहसीलदार करणपाल सिंह को लगाया है। -मिलिट्री अस्पताल में बाबा बकाला के तहसीलदार लखविंदर सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हरतेज अस्पताल के लिए नायब तहसीलदार रोबिनजीत कौर, जीटी रोड स्थित अमनदीप अस्पताल में नायब तहसीलदार अमृतसर-1 लखविंदर सिंह, आईवीवाई अस्पताल में जिला माल अधिकारी मुकेश शर्मा को नोडल अधिकारी तैनात किया है। श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय अस्पताल में लोपोके के नायब तहसीलदार जगसीर सिंह, फोर्टिस अस्पताल में जंडियाला के नायब तहसीलदार अजय कुमार मोदगिल को नोडल अफसर तैनात किया गया है।