अमृतसर रेल हादसाः मुआवजे के लिए एक शव को अपना बताने लगे कई लोग, ऐसे आएगा सच सामने
दशहरे के दिन जौड़ा फाटक पर मौत का ग्रास बने 59 मृतकों में एक शव ऐसा है, जिसका सिर धड़ से अलग हो गया है। धड़ तो जीआरपी के पास है लेकिन सिर नहीं मिल पाया है। सिर को झाड़ियों में काफी खोजा गया लेकिन नहीं मिला। पैंट से एक भी दस्तावेज या मोबाइल नहीं मिला, जिससे उसकी शिनाख्त हो सके। इसके बाद राजकीय रेलवे पुलिस ने धड़ को थाने में बर्फ में लगाकर रखा, शायद उसका वारिस आ जाए।
इसके बाद सरकार ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये के मुआवजे का एलान किया था। इंसानियत का हाल यह बना कि मुआवजे की बात सुनकर इस धड़ को लेने के लिए कई लोग थाने आ गए। पहले एक व्यक्ति प्रीतम आया और बोला कि धड़ उसके रिश्तेदार का है। जांच अधिकारी बलवीर सिंह घुम्मण को शंका हुई तो उन्होंने कहा कि अब वह डीएनए टेस्ट करवा लेते हैं। इसके बाद प्रीतम सिंह चुपके से उनके कमरे से निकल गए, कहां गए, कुछ पता ही नहीं चला।
इसके बाद एक महिला थाने में आई, वह कहने लगी कि यह शव उसके पति का है, पुलिस ने हुलिया पूछा तो वह भी कुछ सही उत्तर नहीं दे पाई। बात डीएनए टेस्ट करवाने की हुई तो वह महिला भी थाने से निकल गई। इसके बाद थाने में तीसरा व्यक्ति आया और बोला कि यह शव उसके चचेरे भाई का है, जांच अधिकारी ने उसको धड़ दिखाया तो व्यक्ति ने कहा कि हां, यह शव मेरे चचेरे भाई का है। फिर डीएनए टेस्ट की बात हुई तो वह भी थाने से निकल गया।
अब पुलिस मेडिकल कॉलेज से धड़ का डीएनए टेस्ट करवाएगी। उसके लिए पैसा जमा करवाया गया है और डीएनए का सैंपल लेकर सुरक्षित रखवा दिया गया है। अब अगर कोई क्लेम करने के लिए आएगा तो बिना डीएनए मैच किए उसको वारिस नहीं बनाया जाएगा।
हम पहले से ही सतर्क हैं, इसलिए हमने फैसला लिया है कि डीएनए मैच के बिना इस बॉडी का वारिस किसी को घोषित नहीं किया जाएगा। मृतक की जेब से कोई दस्तावेज, मोबाइल और पर्स नहीं मिला, जिससे उसकी शिनाख्त हो पाती। - बलवीर घुम्मण, एसएचओ, रेलवे पुलिस