शहीदी कुएं की खून से सनी मिट्टी रावी दरिया में विसर्जित
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अजनाला के जिस कुएं से हाल ही में सन 1857 के सैनिकों की अस्थियां निकली गई थीं, उस कुएं की मिट्टी को रविवार को रावी दरिया में प्रवाहित कर दिया गया। कुएं से उन 200 से ज्यादा सैनिकों की अस्थियां निकालकर विसर्जित की गई थीं, जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेते हुए अंग्रेजों का विद्रोह कर दिया था और लाहौर की छावनी से भाग निकले थे। रविवार को दरिया रावी के उसी मुकाम पर अजनाला के कुएं से निकली सैनिकों की रक्तरंजित मिट्टी को जल-प्रवाह किया गया।
31 घड़ों में रखी मिट्टी को जल-प्रवाह किया
गुरुद्वारा शहीद गंज कमेटी के अध्यक्ष अमरजीत सिंह सरकारिया और महासचिव काबल सिंह शाहपुर और इतिहास शोधकर्ता ने सभी देश भक्त और सामाजिक संस्थायों के उक्त समागम में पधारने पर उनका आभार व्यक्त किया। इसके बाद कमेटी के सदस्यों ने विधिपूर्वक 31 घड़ों में रखी मिट्टी को जल-प्रवाह किया और उनके बाद वहां एकत्रित लोगों ने दरिया रावी में शहीद सिपाहियों के पवित्र रक्त में मिली मिट्टी जल-प्रवाह की। इस मौके पर इतिहासकार कोछड़ ने बताया कि हिंदुस्तानियों के रक्त वाली कुछ मिट्टी जांच और अजायब घर में रखने के लिए सुरक्षित रख ली गई है।
रिपोर्ट जमा करवाने के लिए एक दिन शेष
अजनाला के कुएं में 157 वर्षों से दफल सैनिकों की निकाली गईं अस्थियां और वहां बनाए जाने वाले स्मारक के संबंध में मुख्यमंत्री पंजाब द्वारा बनाई सलाहकार कमेटी के सदस्यों के पास अपनी रिपोर्ट जमा कराने के लिए मात्र एक दिन ही शेष बचा है। कल्चरल, पुरातत्व एवं म्युजियम विभाग पंजाब के निदेशक नवजोत सिंह रंधावा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँच चुके अजनाला के शहीदी कुएं के मामले को पंजाब सरकार ने गंभीरता से लेते हुए कमेटी और आर्कोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया को अपनी रिपोर्ट 15 अप्रैल तक जमा कराने के लिए लिखा था। रिपोर्ट के आधार पर ही 16 अप्रैल को आगामी जरूरी कार्रवाई के लिए फैसला लिया जाएगा।
रिपोर्ट कमेटी ने केंद्र के व्यवहार पर जताई नाराजगी
रिपोर्ट कमेटी के चेयरमैन पंजाबी विश्वविद्यालय के उप कुलपति और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को 26 मार्च को ही सौंपी जा चुकी है। रिपोर्ट के साथ भेजे पत्र में केंद्र सरकार की कारगुजारी के प्रति नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि कुएं में से निकाली अस्थियों और मिट्टी की अभी तक न तो कोई जाँच करवाई गई है और न ही अस्थियों को संरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार के पुरातत्व विभाग ने कोई पहल ही की है। रिर्पोट में यह भी स्पष्ट किया गया कि विशेषज्ञों द्वारा अस्थियों का रखरखाव नहीं किए जाने के कारण कुएं से साबुत मिली अस्थियां और खोपड़ियां मिट्टी में तबदील होने लग गई हैं।
कुएं में दफन सैनिकों की पहचान पर रक्षा मंत्रालय सक्रिय
विभाग ने आज स्पष्ट किया कि रक्षा मंत्रालय द्वारा स्मारक तक जाने वाले रास्ते को चौड़ा करने और पार्किंग व अजायब-घर बनाए जाने के लिए जगह उपलब्ध कराने को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही अस्थियों के रखरखाव और डीएनए जांच के लिए केंद्र सरकार से बातचीत की जा रही है। कुएं में दफन सैनिकों की पहचान के लिए भी केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय को लिखा गया है।