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‘मैं तुन्हें फिर मिलूंगी’ में देखने को मिली अमृता प्रीतम की लव स्टोरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 22 Sep 2016 09:59 PM IST
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टैगोर थियेटर में अमृता प्रीतम की लव स्टोरी पर आधारित नाटक
- फोटो : अमर उजाला
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साहिर लुधियानवी, अमृता प्रीतम और चित्रकार इमरोज के त्रिकोण प्रेम पर आधारित 'मैं तुन्हें फिर मिलूंगी' का मंचन टैगोर थिएटर में किया गया। इसका आयोजन चंडीगढ़ संगीत व नाटक अकादमी की ओर से किया गया। डॉक्टर रामप्रसाद द्वारा लिखित व डॉक्टर सुरेश प्रसाद रंगा द्वारा निर्देशित इस नाटक को जोधपुर के मयूर नाट्य संस्था के थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने पेश किया।
नाटक में दिखाया गया कि अपनी शर्तों पर जीने वाली अमृता अपने जीवन में बेबाक होकर जीती है। अमृता साहिर से बहुत प्रेम करती है और साहिर भी करता है लेकिन वह उससे कभी अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाता। वह गजलों और शायरी के जरिए ही वो प्यार के बारे में कहता है। इसके बाद कहानी में एक चित्रकार इमरोज अमृता के जिंदगी में आता है। वह अमृता को बहुत प्यार करता है।
अमृता और इमरोज बिना शादी किए 40 साल तक एक दूसरे के साथ रहते है। एक बार वह बुहत बिमार हो जाती है। अमृता के आखिरी समय तक इमरोज उसकी देख रेख करता है। यह सब देखकर अमृता इमरोज से गिरते-गिरते कहती है कि मैं तु हें फिर मिलूंगी इसके बाद अमृता की मृत्यु हो जाती है।
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नाटक में इन कलाकारों ने लिया हिस्सा
अमृता प्रीतम का रोल अनुराधा अडवाणी, साहिर के रोल में डॉ. एसपी रंगा, इमरोज केरोल में एमएस जई ने निभाया। वहीं सेट सज्जा में लाइट में अरुण व्यास, साउंड में हरि वेश्नव, मैकअप में कैलाश गलहौत, सेट को अरुण व्यास, कैलाश, सइद खान ने निभाया। नाटक के निर्देशक डॉक्टर सुरेश प्रसाद रंगा बताते है कि इस नाटक को लिखने से पहले अमृता द्वारा लिखित 15 से 20 किताबें पढ़ी और साहिर लुधियानवी की भी। जिसके बाद ही इस नाटक का लिखा गया।
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नाटक में दिखाया गया कि अपनी शर्तों पर जीने वाली अमृता अपने जीवन में बेबाक होकर जीती है। अमृता साहिर से बहुत प्रेम करती है और साहिर भी करता है लेकिन वह उससे कभी अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाता। वह गजलों और शायरी के जरिए ही वो प्यार के बारे में कहता है। इसके बाद कहानी में एक चित्रकार इमरोज अमृता के जिंदगी में आता है। वह अमृता को बहुत प्यार करता है।
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अमृता और इमरोज बिना शादी किए 40 साल तक एक दूसरे के साथ रहते है। एक बार वह बुहत बिमार हो जाती है। अमृता के आखिरी समय तक इमरोज उसकी देख रेख करता है। यह सब देखकर अमृता इमरोज से गिरते-गिरते कहती है कि मैं तु हें फिर मिलूंगी इसके बाद अमृता की मृत्यु हो जाती है।
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नाटक में इन कलाकारों ने लिया हिस्सा
अमृता प्रीतम का रोल अनुराधा अडवाणी, साहिर के रोल में डॉ. एसपी रंगा, इमरोज केरोल में एमएस जई ने निभाया। वहीं सेट सज्जा में लाइट में अरुण व्यास, साउंड में हरि वेश्नव, मैकअप में कैलाश गलहौत, सेट को अरुण व्यास, कैलाश, सइद खान ने निभाया। नाटक के निर्देशक डॉक्टर सुरेश प्रसाद रंगा बताते है कि इस नाटक को लिखने से पहले अमृता द्वारा लिखित 15 से 20 किताबें पढ़ी और साहिर लुधियानवी की भी। जिसके बाद ही इस नाटक का लिखा गया।