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क्यों और किसके कारण भंग हुई अंबाला कमिश्नरी, असली सच आया सामने

Fri, 21 Oct 2016 09:28 AM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 21 Oct 2016 09:28 AM IST
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Ambala Commissioner breached due to ias lobby of haryana administeration
हरियाणा कैबिनेट की बैठक​ - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा सरकार ने अंबाला की कमिश्नरी भंग करने का फैसला लेने में देर न लगाई और ऐसा होने का कारण जानकर आपको हैरानी होगी। दरअसल, हरियाणा की चुस्त-दुरुस्त अफसरशाही ने इस बार सूबे की आईपीएस लॉबी को कमिश्नरी भंग करने के खेल में पीछे छोड़ दिया।
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आईएएस अधिकारियों की आंखों में खटक रही अंबाला कमिश्नरी आखिरकार भंग होकर पुरानी व्यवस्था लागू हो गई। जबकि आईपीएस अधिकारी इस फैसले के हक में नहीं थे। सारा कुछ इतनी जल्दी हुआ कि विरोध की कोई गुंजाइश नहीं रही।
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दोपहर को मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला हुआ और शाम को अधिकारियों के तबादले जारी हो गए। मजेदार बात यह रही कि कमिश्नरी सिस्टम भंग होते ही अंबाला के डीसी ने शाम को धारा 144 लागू कर दी।
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अंदरखाते चल रहा था आईएएस लॉबी में विरोध

Ambala Commissioner breached due to ias lobby of haryana administeration
हरियाणा कैबिनेट की बैठक​
सूत्रों के मुताबिक आईपीएस अधिकारी शत्रुजीत कपूर को बिजली बोर्ड का चेयरमैन और भारती अरोड़ा को राई स्पोर्ट्स स्कूल का निदेशक लगाने के बाद प्रदेश की आईएएस लॉबी में अंदरखाते विरोध शुरू हो चुका था। कमिश्नरी को समाप्त करने केलिए सुगबुगाहट करीब एक साल पहले शुरू हुई थी, जब अनिल विज ने यह मुद्दा उठाया था।

साल 2011 में जब कमिश्नरी बनी थी उस समय भी आईएएस अधिकारियों ने विरोध किया था, क्योंकि कमिश्नरी बनने से डीसी की शक्तियां कम हो जाएंगी और पुलिस आयुक्त के पास धारा 144 लगाने से लेकर शस्त्र लाइसेंस देने सहित मजिस्ट्रेट की शक्तियां आ जाएंगी।

उस समय आईएएस अधिकारियों का विरोध इस लिए सिरे नहीं चढ़ सका, क्योंकि सीआईडी के मुखिया पीवी राठी और हरियाणा के डीजीपी रंजीव दलाल पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खास थे। दोनों अधिकारियों ने हुड्डा पर दबाव बनाते हुए कमिश्नरी की घोषणा करवा ली थी।

डीजीपी सिंघल के समय भी उठा था मामला

Ambala Commissioner breached due to ias lobby of haryana administeration
पंचकूला में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री खट्टर - फोटो : अमर उजाला
पूर्व डीजीपी यशपाल सिंघल के समय में भी कमिश्नरी को समाप्त करने का यह मामला उठा था, लेकिन उस समय एडीजीपी सीआईडी शत्रुजीत कपूर और डीजीपी सिंघल अपनी बात समझा ले जाने में कामयाब हो गए थे। कपूर और सिंघल के हटते ही कमिश्नरी भंग करने का फैसला पूरा हो गया।

पंचकूला ट्राईसिटी का हिस्सा था, इसलिए शामिल किया
साल 2011 में पंचकूला को पुलिस कमिश्नरी में इसलिए शामिल किया गया था कि वह ट्राईसिटी का हिस्सा था। अकेले पंचकूला कमिश्नरी की शर्तों को पूरा नहीं करता था, इसलिए अंबाला को भी शामिल किया गया था।
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