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अमर उजाला संवाद: पर्यावरण प्रेमियों का दर्द-पेड़ों के कटने पर अधिकारियों को नहीं होती पीड़ा, कैसे बचे हरियाली

Sat, 20 Jul 2024 10:43 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 20 Jul 2024 10:43 AM IST
सार

गलत तरीके से प्रूनिंग के कारण सड़क किनारे पेड़ गिर रहे हैं। हर साल लाखों पौधे लग रहे हैं लेकिन जमीनी स्तर पर नजर नहीं आते। गंभीर बात यह है कि पेड़ों के कटने पर शहर के अधिकारियों को कोई पीड़ा नहीं होती तो ये हरियाली कैसे संभालेंगे।

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Amar Ujala Samwad With Environment Lovers in Chandigarh
अमर उजाला संवाद में पहुंचे पर्यावरण प्रेमी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ की हरियाली इसकी पहचान का अभिन्न हिस्सा है। यह शहर सिखाता है कि कैसे एक नियोजित दृष्टिकोण के साथ शहरीकरण और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखा जा सकता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में प्रशासनिक विभागों की लापरवाही की वजह से स्थिति बदल रही है। गलत तरीके से प्रूनिंग के कारण सड़क किनारे पेड़ गिर रहे हैं। हर साल लाखों पौधे लग रहे हैं लेकिन जमीनी स्तर पर नजर नहीं आते। गंभीर बात यह है कि पेड़ों के कटने पर शहर के अधिकारियों को कोई पीड़ा नहीं होती तो ये हरियाली कैसे संभालेंगे। अमर उजाला के 25वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को सेक्टर-9 स्थित कार्यालय में आयोजित संवाद में शहर के पर्यावरण प्रेमियों ने सिटी ब्यूटीफुल को लेकर कई सुझाव भी दिए।

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डिवाइडिंग पर बांस के पेड़ लगाए जाएं

चंडीगढ़ कंक्रीट का शहर बनता जा रहा है। जल पुनर्भरण की जगह ही नहीं है। सभी जगह पेवर ब्लॉक और सीमेंट से ढकी हैं। पेवर ब्लॉक के बीच में घास की जगह होनी चाहिए। यहां के पर्यावरण अनुकूल सड़कों के बीच डिवाइडिंग पर बांस के पेड़ लगाए जाएं। कोनोकार्पस पेड़ से दमा और गाजर घास से एलर्जी होती है, जिसे हटाया जाना चाहिए। - डॉ. विनोद कुमार, अध्यक्ष, पीयू के समाजशास्त्र विभाग

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गलत प्रूनिंग से पेड़ मर रहे हैं

शहर में पौधे लगाने पर जोर है लेकिन उनकी देख-रेख पर नहीं। पौधे लगाने के लिए जगह सुनिश्चित होनी चाहिए और पौधरोपण प्रक्रिया योजनावद्ध तरीके से होने चाहिए। हर कहीं कोई भी पौधे नहीं लगाने चाहिए। पेड़ के स्वास्थ्य के लिए प्रूनिंग बहुत अहम है, जिसकी जानकारी कर्मचारियों को होनी चाहिए। गलत प्रूनिंग से पेड़ मर रहे हैं। तीनों वन विभागों में समन्वय होना चाहिए। - एनके झिंगन, अध्यक्ष, एनवायरमेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया

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शहर में टीटी वाटर इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत

सचिवालय से लेकर दक्षिण के सेक्टरों तक पेड़ के नीचे पेड़ लगाए गए हैं जो कि सही नहीं है। सभी जगह पेड़ के नीचे पेड़ नहीं पनपते। पौधरोपण के साथ शहर में घास भरी जगहें और टीटी वाटर इन्फ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए। शहर के विभिन्न रास्तों पर जेब्रा क्रॉसिंग के साथ बोर्ड लगे हुए हैं, जो छह फीट के हैं और अक्सर लोग उससे टकरा जाते हैं। बोर्ड की ऊंचाई और प्लेसमेंट पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। - डॉ. रविंदर नाथ, ईएसआई, सीसीपीसीआर

5 पी और 5 एस का पालन जरूरी

पर्यावरण सुरक्षा के लिए प्रभावी योजना होना जरूरी है। 5 पी और 5 एस का पालन जरूरी है। पौधरोपण के लिए सबसे पहले योजना बनाना, लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना, पर्यावरण अनुकूल पौधे रोपना और उनकी सुरक्षा करना अहम कदम है। सही जगह की पहचान जरूरी है। पेड़ों की साइंटिफिक प्रूनिंग होनी चाहिए। खैर और कीकर के पेड़ शहर से लुप्त होते जा रहे हैं, जिन्हें लगाना अहम है। - पीएन शाही, निदेशक, जय मधुसूदन जय श्रीकृष्ण फाउंडेशन

जन्मदिन, नववर्ष और नई कक्षा में प्रवेश लेने पर पौधा लगाएं

पर्यावरण संरक्षण के लिए बच्चों को इसके प्रति जागरूक करना और जोड़ना सबसे अहम है। हमारी यह कोशिश रहती है कि बच्चों को यह संकल्प दिलाएं कि वह अपने जन्मदिन, नव वर्ष और नई कक्षा में प्रवेश लेने पर एक पौधा लगाएं और उसकी देखरेख की जिम्मेदारी लें। - पीएस कौशल, महासचिव, एक पेड़-देश के नाम अभियान

पुराने पेड़ों की रक्षा करना जरूरी

नए पौधे लगाने की जगह पुराने पेड़ों की रक्षा करना जरूरी है। जगह-जगह लगे पेवर ब्लॉक, पेड़ के चारों ओर सीमेंट उनकी धीमी मृत्यु का कारण है। पहले चंडीगढ़ के रास्तों में एक से पेड़ होते थे, कहीं इमली के तो कहीं आम के लेकिन अब प्रशासन ने बिना योजना के पेड़ लगाए हैं। 22-23 की सड़क पर बालमखीरा के पेड़ हैं, जो दूसरों पर गिर कर नुकसान कर रहे हैं। - शशि, सदस्य, ईएसआई

बीजारोपण से पौधरोपण की मुहिम चले

साइकिल ट्रैक के रास्ते अच्छे नहीं और न वह रात में चलाने योग्य है क्योंकि लाइट की व्यवस्था नहीं। पर्यावरण संरक्षण के लिए साइक्लिंग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। सरकारी विभागों में निर्धारित दिन साइक्लिंग अनिवार्य होनी चाहिए। हरित घर के सिद्धांत को अपनाना चाहिए, जहां घर पर जगह अनुसार सदस्य करी पत्ता, तुलसी जैसे पौधे लगाएं। बच्चों को पहले बीजारोपण सिखा कर पौधरोपण सिखाया जाए। - देवेंदर सुरा, कांस्टेबल, चंडीगढ़ पुलिस

कचरा नहीं, हरी सब्जियां के छिलके पशुओं के लिए आहार

हम सभी लोग सब्जियों के छिलके को कचरा समझ कर कूड़े में फेंक देते हैं लेकिन वह कचरा नहीं हैं, वह पशुओं का आहार है। हम मटर के छिलके, गाजर के छिलके कूड़े के जगह पशुओं को देकर उनका पेट भरने में मदद कर सकते है। पीयू के 20 में से अधिकतर हॉस्टलों से सब्जियों के छिलके गोशाला में भेजे जा रहे है। - गौरव गौड़, प्रोफेसर, पीयू सामाजिक कार्य विभाग

मुंबई, गुरुग्राम के बाद चंडीगढ़ बन रहा क्रंकीट का जंगल

वह दिन दूर नहीं जब हरा अपना हरा भरा शहर भी मुंबई और गुरुग्राम की तरह क्रंकीट का जंगल बन जाएगा। चंडीगढ़ में विकास के नाम पर पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अंडरग्राउंड तार डालने के नाम पर जेसीबी से पेड़ों की जड़ें काटी जा रही हैं। हम स्कूल में बच्चों को खेती सिखा रहे हैं। उनमें गजब का बदलाव देखने को मिल रहा है। - प्रदीप त्रिवेणी, शिक्षक

पेड़ों को पसंद आता है बारिश का पानी

पेड़-पौधों को बारिश का पानी बेहद पसंद आता है। बरसात के पानी से पौधों का विकास जल्दी होता है इसलिए हम सभी को बारिश के पानी का संरक्षण करना चाहिए और अधिक से अधिक वही पानी पौधों को देना चाहिए। शहर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की जरूरत है। सभी बड़े भवनों पर लगना चाहिए। इसके साथ ही पेड़ों की प्रूनिंग के लिए नियम बनने चाहिए। - अनिल कुमार, व्यापारी

झाड़ियां कटाते समय पौधों का रखा जाए ध्यान

नगर निगम की ओर से झाड़ियां काटने के लिए मशीन का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे में झाड़ियां काटने वाले कर्मचारियों को झाड़ियां साफ करते वक्त छोटे पौधों का विशेष रूप से ध्यान रखना बेहद जरूरी है ताकि पौधों को नुकसान न हो। जो पेड़ कट रहे हैं, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए क्योंकि हम पौधे लगाते हैं और कोई आकर काट जाता है। - यशपाल सिंह, एयरफोर्स से रिटायर

चंडीगढ़ में कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सिग्नल पर इंतजार करने का समय 100-150 सेकंड तक का हो गया है। पूरे समय गाड़ियां चालू रहती हैं। यह पेड़ों को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। पेड़ों के संरक्षण के लिए कानून होना चाहिए। समस्या ये है कि पेड़ों के कटने पर अधिकारियों को पीड़ा नहीं होती। ऐसे में कैसे शहर की हरियाली को संभाला जा सकता है। - शिशुपाल सिंह, समाजसेवी

वन विभाग खुद नहीं चाह रहा पर्यावरण की सुरक्षा

वन विभाग की ओर से लोगों को मुफ्त में पौधे मुहैया करवाए जा रहे हैं। ई-मेल के जरिए आप आवेदन दे सकते हैं। ई-मेल करने के बावजूद विभाग की ओर से उसका प्रिंट निकाला जा रहा है। जो काम ऑनलाइन किए जा सकता है, उसके लिए प्रिंट निकाल कर कागज क्यों खराब किया जा रहा है। पार्कों में युवाओं को खेलने से रोकना चाहिए। एक फोन नंबर होना चाहिए जिस पर लोग पौधों की जानकारी ले सकें। - विक्रांत तंवर, समाज सेवी


हेल्पलाइन नंबर हो जारी

अगर हम कहीं किसी को पेड़ों को नुकसान पहुंचाते या काटते हुए देखते हैं तो ऐसे में हम व्यक्ति के खिलाफ प्रशासन को दे सकें, इसके लिए प्रशासन को हेल्पलाइन नंबर जारी करना चाहिए। आने वाली पीढ़ी के साथ वर्तमान पीढ़ी के लिए पर्यावरण संरक्षण करना बेहद जरूरी है। -होशियार सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता

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