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अमर उजाला संवाद: ट्राइसिटी के विकास के लिए ‘ट्राइसिटी रेग्युलेशन अथॉरिटी’ बनाना जरूरी
Wed, 18 Dec 2019 04:57 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 18 Dec 2019 04:57 PM IST
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अमर उजाला संवाद में हिस्सा लेने आए विशेषज्ञ
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ काफी खूबसूरत शहर है, इसीलिए इसे सिटी ब्यूटीफुल कहते हैं। पंचकूला और मोहाली मिलकर इसकी सुंदरता को चार चांद लगा देते हैं। लेकिन बढ़ती जनसंख्या से ट्राइसिटी के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। अगर समय रहते इसका हल नहीं निकाला गया तो समस्या काफी गंभीर हो जाएगी। मंगलवार को अमर उजाला ने ‘आओ ट्राइसिटी संवारें’ विषय पर शहर के कई विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस समस्याओं पर मंथन किया। साथ ही इनके निराकरण पर भी चर्चा हुई। संवाद में निष्कर्ष निकलकर आया कि चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के लिए एक ट्राइसिटी रेग्युलेशन अथॉरिटी बनानी होगी, तभी भविष्य में ट्राइसिटी का विकास होगा।
कंपनियों के प्रति प्रशासन को बदलनी होगी मानसिकता
वर्तमान में कंपनियां चंडीगढ़ से पलायन कर रही हैं। कोई मोहाली तो कोई पंचकूला की तरफ भाग रहा है। उसका कारण है प्रशासन की सख्ती। हाल ही में एक परिचित ने कहा कि वह जल्द अपनी कंपनी को मोहाली में शिफ्ट कर रहे हैं। ऐसे में उस कंपनी में काम करने वाले 600 कर्मचारियों का क्या होगा। एक्साइज एंड टैक्सेसन डिपार्टमेंट किसी की सुनता नहीं है। इससे चंडीगढ़ के उद्योग जगत में काफी समस्याएं आ रही हैं।
- केशव गर्ग, सीए
शहर के आसपास के गांवों की सुध लेना भूला प्रशासन
चंडीगढ़ के विकास में शहर के आसपास के गांव की सुध लेना प्रशासन भूल ही गया। यहां कुल 50 गांव थे। 28 गांव को मिलाकर चंडीगढ़ बसाया गया। हाल ही में 13 गांव को निगम को सौंप दिया। इसके बाद सरपंच का पद भी खाली हो गया। अब लोग किसके पास जाएं, उन्हें पता नहीं।
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- दीपक राणा, रिसर्च स्कॉलर्स, पीयू
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कंपनियों के प्रति प्रशासन को बदलनी होगी मानसिकता
वर्तमान में कंपनियां चंडीगढ़ से पलायन कर रही हैं। कोई मोहाली तो कोई पंचकूला की तरफ भाग रहा है। उसका कारण है प्रशासन की सख्ती। हाल ही में एक परिचित ने कहा कि वह जल्द अपनी कंपनी को मोहाली में शिफ्ट कर रहे हैं। ऐसे में उस कंपनी में काम करने वाले 600 कर्मचारियों का क्या होगा। एक्साइज एंड टैक्सेसन डिपार्टमेंट किसी की सुनता नहीं है। इससे चंडीगढ़ के उद्योग जगत में काफी समस्याएं आ रही हैं।
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- केशव गर्ग, सीए
शहर के आसपास के गांवों की सुध लेना भूला प्रशासन
चंडीगढ़ के विकास में शहर के आसपास के गांव की सुध लेना प्रशासन भूल ही गया। यहां कुल 50 गांव थे। 28 गांव को मिलाकर चंडीगढ़ बसाया गया। हाल ही में 13 गांव को निगम को सौंप दिया। इसके बाद सरपंच का पद भी खाली हो गया। अब लोग किसके पास जाएं, उन्हें पता नहीं।
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- दीपक राणा, रिसर्च स्कॉलर्स, पीयू
25 प्रतिशत लोगों के पास गाड़ी, प्रदूषण का दंश झेल रहे सभी
वर्तमान में 25 फीसदी लोगों के पास गाड़ी है। लेकिन इन गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को 75 प्रतिशत अन्य लोग भी झेलते हैं। शहर के कई सेक्टर तो ऐसे हैं जहां अमेरिका के सामान्य स्थानों से भी ज्यादा गाड़ियां हैं। गाड़ियों के धुएं से चंडीगढ़ और दिल्ली का प्रदूषण कई बार बराबर हो जाता है। वहीं चंडीगढ़ में प्रति व्यक्ति एक पेड़ है, जबकि उसे पूरे जीवन में 8 पेड़ चाहिए। यह सबसे बड़ी असमानता है।
- विनोद चौधरी, असिस्टेंट प्रोफेसर, पीयू
अधिकारियों के ऊपर इतना निर्भर क्यों?
पंजाब व हरियाणा से आए अधिकारी ट्राइसिटी की योजना बनाते हैं। लागू करने तक उनके जाने का समय आ जाता है। हम पूरी तरह से अधिकारियों पर आश्रित हो गए हैं। यहां 100 रुपए के फंड में 90 रुपए तो सैलरी में दे देते हैं। 10 प्रतिशत में क्या विकास करेंगे। प्रशासन को यहां पीपीपी मॉडल लागू करके ज्यादा से ज्यादा लोगों की सहभागिता करानी चाहिए।
- दीपक जुगरान, रिसर्च स्कॉलर, पीयू
दो कार के बाद इलैक्ट्रिक कार्य अनिवार्य करें
हम लोग सिर्फ सरकार और अधिकारियों को दोषी ठहराते हैं। लेकिन असल बात यह है कि हम खुद ही जागरूक नहीं हैं। नियमानुसार व्यवसाय करेंगे तो कभी कोई समस्या नहीं होगी। रही बात ट्रैफिक की तो चाइना और कैलिफोर्निया में यहां से ज्यादा गाड़ियां हैं, लेकिन वहां पॉलिसी है। यहां भी दो कार लेने के बाद इलैक्ट्रिक कार अनिवार्य करें, साथ ही घर में चार्जिंग पॉइंट भी सुनिश्चित करें।
- पुनीत वर्मा, साइबेरियन सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड
- विनोद चौधरी, असिस्टेंट प्रोफेसर, पीयू
अधिकारियों के ऊपर इतना निर्भर क्यों?
पंजाब व हरियाणा से आए अधिकारी ट्राइसिटी की योजना बनाते हैं। लागू करने तक उनके जाने का समय आ जाता है। हम पूरी तरह से अधिकारियों पर आश्रित हो गए हैं। यहां 100 रुपए के फंड में 90 रुपए तो सैलरी में दे देते हैं। 10 प्रतिशत में क्या विकास करेंगे। प्रशासन को यहां पीपीपी मॉडल लागू करके ज्यादा से ज्यादा लोगों की सहभागिता करानी चाहिए।
- दीपक जुगरान, रिसर्च स्कॉलर, पीयू
दो कार के बाद इलैक्ट्रिक कार्य अनिवार्य करें
हम लोग सिर्फ सरकार और अधिकारियों को दोषी ठहराते हैं। लेकिन असल बात यह है कि हम खुद ही जागरूक नहीं हैं। नियमानुसार व्यवसाय करेंगे तो कभी कोई समस्या नहीं होगी। रही बात ट्रैफिक की तो चाइना और कैलिफोर्निया में यहां से ज्यादा गाड़ियां हैं, लेकिन वहां पॉलिसी है। यहां भी दो कार लेने के बाद इलैक्ट्रिक कार अनिवार्य करें, साथ ही घर में चार्जिंग पॉइंट भी सुनिश्चित करें।
- पुनीत वर्मा, साइबेरियन सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड
करना होगा ट्राइसिटी का विकास
चंडीगढ़ की समस्या अब सिर्फ शहर की ही नहीं रह गई है बल्कि पंचकूला और मोहाली की भी है। चंडीगढ़ के ऊपर मोहाली और पंचकूला का दबाव काफी ज्यादा है। इसकी वजह से ट्रैफिक जाम झेलना पड़ रहा है। पार्किंग आदि की समस्या भी है। अब जरूरत है एक ज्वाइंट वेंचर की, जिसके तहत ट्राइसिटी का संयुक्त रूप से विकास किया जा सके। क्योंकि अब पंचकूला और मोहाली का विकास किए बगैर चंडीगढ़ का विकास संभव नहीं है।
- निधि गर्ग, समाज सेविका
बीआरटी सुविधा को चंडीगढ़ में हो लागू
अमृतसर की तर्ज पर बस रेपिड ट्रांसपोर्ट (बीआरटी) सिस्टम लागू करना चाहिए। इसमें एक ट्रैक पर सिर्फ बसें चल सकेंगी। हर व्यक्ति तक पब्लिक ट्रांसपोटेशन की पहुंच होगी। चंडीगढ़ में एक बड़ी समस्या है कि यहां लोग योजनाएं बनाते हैं, लेकिन यहीं का व्यक्ति उस पर आपत्तियां दर्ज करा देता है। इससे विकास होने की बजाय मामला उलझ जाता है। इसलिए वैचारिक सामंजस्य बनाना भी जरूरी है।
- महेश इंदर सिंह, पार्षद
पब्लिक ट्रांसपोर्ट की समस्या को सुलझाना होगा
हम लोग मोहाली में नौकरी करते हैं। हमारे ऑफिस और घर के बीच चुनिंदा बसें चलतीं हैं। ऑटो भी कई बार नहीं मिलते। ऐसे में सुविधा के अनुसार पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं है। इन्ही कारणों से लोग निजी वाहनों का उपयोग करते हैं। इसकेअलावा सुरक्षा का मुद्दा भी इसी में आता है, क्योंकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा न होने से कई बार रात में समस्या होती है।
- स्वाति रघु, प्राइवेट कंपनी में कार्यरत
- निधि गर्ग, समाज सेविका
बीआरटी सुविधा को चंडीगढ़ में हो लागू
अमृतसर की तर्ज पर बस रेपिड ट्रांसपोर्ट (बीआरटी) सिस्टम लागू करना चाहिए। इसमें एक ट्रैक पर सिर्फ बसें चल सकेंगी। हर व्यक्ति तक पब्लिक ट्रांसपोटेशन की पहुंच होगी। चंडीगढ़ में एक बड़ी समस्या है कि यहां लोग योजनाएं बनाते हैं, लेकिन यहीं का व्यक्ति उस पर आपत्तियां दर्ज करा देता है। इससे विकास होने की बजाय मामला उलझ जाता है। इसलिए वैचारिक सामंजस्य बनाना भी जरूरी है।
- महेश इंदर सिंह, पार्षद
पब्लिक ट्रांसपोर्ट की समस्या को सुलझाना होगा
हम लोग मोहाली में नौकरी करते हैं। हमारे ऑफिस और घर के बीच चुनिंदा बसें चलतीं हैं। ऑटो भी कई बार नहीं मिलते। ऐसे में सुविधा के अनुसार पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं है। इन्ही कारणों से लोग निजी वाहनों का उपयोग करते हैं। इसकेअलावा सुरक्षा का मुद्दा भी इसी में आता है, क्योंकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा न होने से कई बार रात में समस्या होती है।
- स्वाति रघु, प्राइवेट कंपनी में कार्यरत
खुद को जागरूक कर अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करें
हम लोगों की गलतियां निकालते हैं, लेकिन सबसे पहले हमें खुद को जागरूक करना होगा। उसके बाद एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। एक युवा लोगों के लिए अच्छा रोल मॉडल होता है, इसलिए उसके कंधों पर ज्यादा जिम्मेदारी होती है। समस्याओं के निराकरण में जिस दिन युवा इस प्रकार के उदाहरण प्रस्तुत करेगा, सभी समस्याओं का हल हो जाएगा।
- हेमा मेहता, प्राइवेट कंपनी में कार्यरत
ट्राइसिटी रेगुलैरिटी अथॉरिटी बनाने की जरूरत
चंडीगढ़ के उपर आसपास के क्षेत्रों का काफी दवाब है। अब शहर को बचाने के लिए ट्राइसिटी रेगुलैरिटी अथॉरिटी (टीआरए) बनाने की जरूरत है। सभी को मिलकर समस्याओं का हल निकालना होगा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की हालत सुधारनी होगी। शहर को इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत है। कनेक्टिविटी और टाइमिंग की समस्या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में अभी भी है। प्रशासन को कड़े निर्णय लेने होंगे। ट्राइसिटी को सुगम्य बनाना होगा।
- विवेक त्रिवेदी, रिसर्च स्कॉलर
गंदगी फैलाने वालों पर लगे भारी जुर्माना
स्वच्छ भारत के तमाम दावे किए गए, लेकिन पूरे ट्राइसिटी में गंदगी ही गंदगी है। जागरूकता फैलाई जा रही है, इसके बावजूद सड़कों में आम देखा जा सकता है कि लोग कार का शीशा नीचे करते हैं और कूड़ा सड़क पर फेंक देते हैं। ऐसे लोगों पर भारी जुर्माना लगाना चाहिए। पंचकूला में रेंट पर साइकिल की व्यवस्था शुरू की गई है। चंडीगढ़ और मोहाली में भी ऐसी व्यवस्था शुरू होनी चाहिए।
- लविश अरोड़ा, सेक्रेटरी, पंचकूला बार एसोसिएशन
- हेमा मेहता, प्राइवेट कंपनी में कार्यरत
ट्राइसिटी रेगुलैरिटी अथॉरिटी बनाने की जरूरत
चंडीगढ़ के उपर आसपास के क्षेत्रों का काफी दवाब है। अब शहर को बचाने के लिए ट्राइसिटी रेगुलैरिटी अथॉरिटी (टीआरए) बनाने की जरूरत है। सभी को मिलकर समस्याओं का हल निकालना होगा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की हालत सुधारनी होगी। शहर को इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत है। कनेक्टिविटी और टाइमिंग की समस्या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में अभी भी है। प्रशासन को कड़े निर्णय लेने होंगे। ट्राइसिटी को सुगम्य बनाना होगा।
- विवेक त्रिवेदी, रिसर्च स्कॉलर
गंदगी फैलाने वालों पर लगे भारी जुर्माना
स्वच्छ भारत के तमाम दावे किए गए, लेकिन पूरे ट्राइसिटी में गंदगी ही गंदगी है। जागरूकता फैलाई जा रही है, इसके बावजूद सड़कों में आम देखा जा सकता है कि लोग कार का शीशा नीचे करते हैं और कूड़ा सड़क पर फेंक देते हैं। ऐसे लोगों पर भारी जुर्माना लगाना चाहिए। पंचकूला में रेंट पर साइकिल की व्यवस्था शुरू की गई है। चंडीगढ़ और मोहाली में भी ऐसी व्यवस्था शुरू होनी चाहिए।
- लविश अरोड़ा, सेक्रेटरी, पंचकूला बार एसोसिएशन
सबसे पहले होना चाहिए चरित्र निर्माण
आज समाज में हर कोई विकास की बात करता है। विकास की बात होती है तो ऊंची ऊंची इमारतों की बात होती है। लेकिन कोई भी चरित्र निर्माण की बात नहीं करता। हमें सोचना होगा हम क्या कर रहे हैं। आज बैंक की लाइनों में बुजुर्ग लगे हैं और औलाद घर पर टीवी देख रहे होते हैं। हम इंजीनियर तो तैयार कर रहे हैं, लेकिन हमें इंजीनियर के साथ एक बेटा भी तैयार करने की जरूरत है।
- विशाल जौली, वकील और समाजसेवी
ट्राइसिटी को एक नाम दिया जाना चाहिए
पंचकूला में ट्रैफिक की काफी समस्या है। महिलाओं के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट में खास सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए। ट्राइसिटी को एक नाम दिया जाना चाहिए, ताकि इसे एक पहचान मिले और तेजी से इस पूरे इलाके का विकास हो सके। यह सच है कि चंडीगढ़ का विकास तभी संभव है जब पंचकूला और मोहाली को तेजी से विकसित किया जाएगा।
- रमा कौशल, समाज सेविका
युवा उद्यमियों से प्रशासन को लेने चाहिए सुझाव
प्रशासन ने पॉलीथीन तो बैन कर दिए, लेकिन बायो डिग्रेडेबल कैरी बैग को लेकर लोगों में जागरूकता नहीं फैलाई गई। इसकी वजह से उन्हें भी कुछ साल पहले काफी समस्या झेलनी पड़ी। प्रशासन के बिल्डिंग बायलॉज काफी सख्त है। इसमें नरमी बरतने की जरूरत है। उद्यमी को मौके प्रदान करने चाहिए, तभी वह प्रोत्साहित होंगे। प्रशासन को युवा उद्यमियों के साथ एक कांफ्रेंस करना चाहिए और उनसे सुझाव लेने चाहिए। सीएनजी को प्रोमोट तो किया जा रहा है लेकिन उद्यमियों का सहयोग नहीं किया जा रहा है।
- सिद्धांत दास, उद्यमी
- विशाल जौली, वकील और समाजसेवी
ट्राइसिटी को एक नाम दिया जाना चाहिए
पंचकूला में ट्रैफिक की काफी समस्या है। महिलाओं के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट में खास सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए। ट्राइसिटी को एक नाम दिया जाना चाहिए, ताकि इसे एक पहचान मिले और तेजी से इस पूरे इलाके का विकास हो सके। यह सच है कि चंडीगढ़ का विकास तभी संभव है जब पंचकूला और मोहाली को तेजी से विकसित किया जाएगा।
- रमा कौशल, समाज सेविका
युवा उद्यमियों से प्रशासन को लेने चाहिए सुझाव
प्रशासन ने पॉलीथीन तो बैन कर दिए, लेकिन बायो डिग्रेडेबल कैरी बैग को लेकर लोगों में जागरूकता नहीं फैलाई गई। इसकी वजह से उन्हें भी कुछ साल पहले काफी समस्या झेलनी पड़ी। प्रशासन के बिल्डिंग बायलॉज काफी सख्त है। इसमें नरमी बरतने की जरूरत है। उद्यमी को मौके प्रदान करने चाहिए, तभी वह प्रोत्साहित होंगे। प्रशासन को युवा उद्यमियों के साथ एक कांफ्रेंस करना चाहिए और उनसे सुझाव लेने चाहिए। सीएनजी को प्रोमोट तो किया जा रहा है लेकिन उद्यमियों का सहयोग नहीं किया जा रहा है।
- सिद्धांत दास, उद्यमी
बैन का क्या फायदा.. आसानी से मिल रहा पॉलीथीन
शहर में प्लास्टिक की समस्या काफी बड़ी है। हमारे स्कूल की तरफ से हर हफ्ते इलाके के प्लास्टिक को एकत्रित किया जाता है और दिल्ली के एक प्लांट में भेजा जाता है। इससे टाइल्स आदि बनाए जाते हैं। चंडीगढ़ में प्रशासन ने प्लॉस्टिक बैन कर दिया, लेकिन आज भी हर मार्केट, मंडी में आसानी से प्लास्टिक लोगों के हाथों में दिख जाते हैं। इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
- विसर कौर जौहर, छात्र नौंवी कक्षा
युवाओं को प्रशासन मौके प्रदान करे
चंडीगढ़ में पढ़ना हर किसी का सपना होता है। यहां पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों से युवा पढ़ने आते हैं। कई बार देखा गया है कि यहां आने के बाद से युवाओं को अचानक काफी आजादी मिल जाती है। हमें कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे इन युवाओं की ऊर्जा को अच्छे काम में लगाया जा सके। चंडीगढ़ में कल्चर के क्षेत्र में भी अपार संभावनाए हैं। चंडीगढ़ को रिटायर्ड लोगों का शहर भी कहा जाता है।
- प्रतिभा, एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत
आज तक डिस्टर्ब एरिया की सूची में है चंडीगढ़
चंडीगढ़ को वर्ष 1983 में ‘डिस्टर्ब एरिया’ की सूची में डाला गया। इसकी वजह से पूरे साल चंडीगढ़ में धारा 144 लगी रहती है। पंजाब ने खुद को इस सूची से बाहर कर लिया, लेकिन चंडीगढ़ आज तक ऐसा नहीं कर पाया। इसकी वजह से पर्यटकों को काफी समस्या आती है। वे यहां आने से वह कतराते हैं। कुछ अफसरों के सिर पर यह शहर चलता है। इसकी वजह से चंडीगढ़ के काम प्रभावित होते हैं।
- विपिन कुमार, वकील
- विसर कौर जौहर, छात्र नौंवी कक्षा
युवाओं को प्रशासन मौके प्रदान करे
चंडीगढ़ में पढ़ना हर किसी का सपना होता है। यहां पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों से युवा पढ़ने आते हैं। कई बार देखा गया है कि यहां आने के बाद से युवाओं को अचानक काफी आजादी मिल जाती है। हमें कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे इन युवाओं की ऊर्जा को अच्छे काम में लगाया जा सके। चंडीगढ़ में कल्चर के क्षेत्र में भी अपार संभावनाए हैं। चंडीगढ़ को रिटायर्ड लोगों का शहर भी कहा जाता है।
- प्रतिभा, एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत
आज तक डिस्टर्ब एरिया की सूची में है चंडीगढ़
चंडीगढ़ को वर्ष 1983 में ‘डिस्टर्ब एरिया’ की सूची में डाला गया। इसकी वजह से पूरे साल चंडीगढ़ में धारा 144 लगी रहती है। पंजाब ने खुद को इस सूची से बाहर कर लिया, लेकिन चंडीगढ़ आज तक ऐसा नहीं कर पाया। इसकी वजह से पर्यटकों को काफी समस्या आती है। वे यहां आने से वह कतराते हैं। कुछ अफसरों के सिर पर यह शहर चलता है। इसकी वजह से चंडीगढ़ के काम प्रभावित होते हैं।
- विपिन कुमार, वकील
अस्पतालों पर दबाव ज्यादा
पीजीआई, जीएमएसएच-16, जीएमसीएच-32, डिस्पेंसरी आदि हैं, लेकिन यहां सिफारिशी लोगों का काम जल्दी होता है। आम आदमी को बहुत धक्के खाने पड़ते हैं। एक सर्जरी के लिए 4-5 महीने तक इंतजार करना पड़ता है। पीजीआई पर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों का दबाव है। एक डॉक्टर के पास कई मरीज हैं। प्रशासन ने अभी तक घरों में नर्सिंग होम की पॉलिसी पर कोई काम नहीं किया। आयुष्मान योजना को लेकर भी पूरी तरह से जागरूकता नहीं फैलाई गई है।
- डॉ. संजीव भाटिया
- डॉ. संजीव भाटिया