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MSME: उद्यमी बोले, बिजली ने उद्योगों को 'करंट' लगा दिया है
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Fri, 29 Jan 2016 11:56 AM IST
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अमर उजाला एमएसएमई कॉनक्लेव 2016 के तहत आयोजित ‘मेक इन हरियाणा’ की ‘गेट टू गेदर’ में जब पंचकूला के करीब 70 उद्यमियों ने अपनी बात रखी।
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पंचकूला के वेलकम होटल बेलाविस्टा में आयोजित इस गेट टू गेदर में वे उद्यमी मौजूद रहे, जो कि दूसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गए हैं। इसमें बिजली की समस्या हो या एफएआर रेसियो, लोन की बाधाएं हो या फिर सर्विस सेक्टर की समस्याएं। उद्यमियों ने हर एक समस्या को अमर उजाला के समक्ष रखा।
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‘अंगार, विभूषण यह उनका, विद्युत पीकर जो आते हैं, ऊंघती शिखाओं की लौ में, चेतना नई भर जाते हैं।’ रामधारी सिंह दिनकर की कविता की यह पंक्ति पंचकूला के उद्यमियों की आकांक्षाओं और नए विचारों पर एकदम सटीक बैठती है। बेशक उनके सामने लाखों बाधाएं हैं पर चेहरे पर मुस्कान और हौसले की उड़ान तो कोई उनसे सीखे।
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बिजली का संकट
पंचकूला के उद्यमियों के लिए बिजली अब एक बड़ी समस्या बन गई है। बिजली के दाम ज्यादा हैं ही साथ ही एसीडी चार्ज के हव्वे से उद्यमियों की नींद उड़ गई है। इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन पंचकूला के चेयरमैन अरुण ग्रोवर ने कहा कि बिजली ऐसा मुद्दा है, जिससे उद्यमियों का काम काफी प्रभावित हो गया है।
उन्होंने कहा कि बिजली के रेट्स ही नहीं बल्कि बिजली के लिए अब हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम द्वारा एसीडी (एडवांस कंजप्शन डिमांड) चार्ज लाद दिए हैं। पंचकूला के प्रत्येक उद्यमी पर दो से तीन लाख का अतिरिक्त बोझ पड़ने से बजट बिगड़ गया है।
उद्यमियों की मुश्किल यह है कि वह अपने कर्मचारियों को पगार दें या सिक्योरिटी डिपॉजिट करें। अरुण ग्रोवर ने कहा कि उद्यमियों की सुध बुध लेने वाला कोई नहीं है। पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया के रोड टूटे हैं। उन्होंने कहा कि सिंगापुर एक छोटा सा शहर है, लेकिन उनके काम करने की जिजीविषा है, जिस कारण वह एक बड़े डेस्टिनेशन के रूप में उभर गया है।
दो प्रकार की पॉलिसी बनाई जाए
हरियाणा चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष विष्णु गोयल ने कहा कि हरियाणा सरकार की मंशा ठीक है, लेकिन सरकार पूरी तरह उद्यमियों के हक में आगे नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य की नीति तो बना रही है, लेकिन उसे प्रत्येक जिले की अलग अलग औद्योगिक नीति बनानी चाहिए और उसमें वह जिले या राज्य की विशेषताओं को शामिल करना चाहिए। क्योंकि प्रत्येक जिले की अलग अलग आवश्यकताएं हैं और अलग अलग खूबियां हैं।
अमर उजाला कर रहा है उद्यमियों को सपोर्ट
इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन पंचकूला के चेयरमैन अरुण ग्रोवर ने कहा कि अमर उजाला ने देश की ग्रोथ में अहम भूमिका निभाने वाले उद्यमियों की वास्तविकता को सभी के समक्ष रखा है। वास्तव में यह काम सरकार का है और उसको बखूब निभाया है अमर उजाला ने। हरियाणा चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री पंचकूला के अध्यक्ष विष्णु गोयल ने कहा कि जिस तरह से अमर उजाला ने यह इनीशिएटिव लिया है वह काबिले तारीफ है। पार्षद और उद्यमी सीबी गोयल ने कहा कि अमर उजाला ने इंडस्ट्रियलिस्टों की आवाज उठाई और बताया कि यह उद्यमी ही हैं जो न सिर्फ देश की रीढ़ है बल्कि रोजगार देने में भी अग्रणी हैं।
वर्टिकल डेवलपमेंट है समय की मांग
उद्यमियों ने कहा कि अब वर्टिकल डेवलपमेंट समय की मांग है। पंचकूला में फ्लोर एरिया रेसो अब 1.5 कर दिया गया है, जबकि यह पंजाब में तीन है। पंजाब ने जब इस बात को समझ लिया है तो हरियाणा को भी इसी लीक पर काम करना चाहिए। अब जगह कम होती जा रही है और डेवलपमेंट ज्यादा चाहिए। ऐसे में मेक इन हरियाणा को बेहतर करने के लिए एफएआर को तीन करना चाहिए।
अब स्लोगन नहीं एक्शन चाहिए
पंचकूला के पार्षद और उद्यमी सीबी गोयल ने कहा कि सिर्फ स्लोगन देने से ही काम नहीं चलेगा। मेक इन इंडिया हो या मेक इन हरियाणा तभी संभव है, जब एक्शन होने लगे। उन्होंने कहा कि सरकार काम तो कर रही है, लेकिन अभी भी बहुत सुधार की आवश्यकता है।
स्किल डेवलपमेंट सेंटर हैं जरूरी
पंचकूला के उद्यमियों के अनुसार अब स्किल डेवलपमेंट सेंटर सबसे आवश्यक हैं। इंडस्ट्री को स्किल्ड लेबर चाहिए और यह तभी मिल सकती है, जबकि सरकार की ओर से स्किल डेवलपमेंट सेंटर हर जगह पर खोले जाएं। पंचकूला के उद्यमियों ने कहा कि जीएसटी अब जरूरी हो गया है, जितनी जल्दी जीएसटी आएगा उतनी ही जल्दी डेवलपमेंट होगा।
अब सस्ता इनपुट चाहिए
हरियाणा चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री पंचकूला के वाइस प्रेसीडेंट एएल अग्रवाल ने कहा कि सरकार की सोच अच्छी है। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को सस्ते इनपुट की दरकार है। उन्होंने कहा कि लांग प्रोडक्ट पर ड्यूटी नहीं लगानी चाहिए और सेफ्टी ड्यूटी नहीं लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को बेस रेट पर बैंक लोन मिलना चाहिए और ब्याजदर कम होना चाहिए। इसके साथ ही सरकार को नए कानून बनाने की आवश्यकता नहीं। उन्होंने कहा कि टैक्सेशन काफी हैवी है, जिसकी वजह से उद्यमियों को परेशानी होती है।
उद्यमियों की समस्याओं को उठाने के लिए बाध्य
अमर उजाला के स्थानीय संपादक संजय अभिज्ञान ने कहा कि अमर उजाला का यह अभियान उद्यमियों की समस्याओं और मुद्दों को एक बड़े मंच पर मजबूती के साथ रखने के लिए बाध्य है। स्माल स्केल यूनिट प्रतिकूल परिस्थितियों में काम चला रहा है। हवाओं के रुख की परवाह न करते हुए नाव को पार ले जाना बड़ी बात है। ऐसे ही उद्यमियों को अवार्ड देने के लिए एमएसएमई कॉनक्लेव की अमर उजाला ने शुरूआत की है।
हर ओर हैं बाधाएं ही बाधाएं
श्री केशव हीट ट्रीटर्स के मालिक रमाकांत भारद्वाज ने कहा कि इंडस्ट्री की मुश्किलें कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि फैक्टरी एक्ट में इतनी ज्यादा बाधाएं हैं कि उद्यमी परेशान हो जाते हैं। एक ही शेड के लिए कई जगह से क्लीयरेंस लेने की बाध्यता ही देखें। सरकार की एक एजेंसी प्लाट बनाकर देती है और उसके लिए भी सरकार की दूसरी एजेंसी से क्लीयरेंस लेनी पड़ती हैॅ। उन्होंने कहा कि कम से कम ऐसी बाधाओं को तो हटाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रति वर्ष फैक्ट्री को पास करवाने के लिए आवेदन करना पड़ता है, यदि समय पर न करें तो पेनल्टी लगा दी जाती है जो कि इंडस्ट्री की बड़ी परेशानी है।
काम करने की दीजिए इजाजत
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन पंचकूला के महासचिव और श्री राम ग्लास एंड प्लाइवुड के पार्टनर राकेश गर्ग ने कहा कि पंचकूला एक अच्छा और महंगा सिटी है। यहां टैलेंट है लेकिन उस टैलेंट को मंच नहीं मिलता। दूसरी ओर ऐसी इंडस्ट्री हैं जो कि लगभग बंद होने की कगार पर हैं। यदि टैलेंट और बंद होने वाली यूनिट्स का कांबिनेशन किया जाए तो रिजल्ट अच्छे होंगे। बंद होने वाली यूनिट्स को यदि युवाओं के लिए किराए पर देने की अनुमति मिले तो टैलेंट भी निखरेगा, रेवेन्यू भी आएगा और यूनिट्स भी चलेंगी।
सेल्फ सर्टिफिकेशन है सबसे जरूरी
इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव राजन नंदा ने कहा कि अब सेल्फ सर्टिफिकेशन का दौर है। उद्यमियों को इसकी इजाजत दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की नई औद्योगिक नीति बेहतर है लेकिन इसमें सर्विस सेक्टर के संबंध में स्पष्टता की जानी चाहिए। जिससे उद्यमियों को भी यह स्पष्ट हो सके।
पॉल्यूशन बना उद्यमियों की परेशानी
टिंबर और प्लाइवुड के उद्यमियों के लिए पॉल्यूशन एक बड़ी समस्या बन चुका है। अरविंद निखंज ने कहा कि हरके इंडस्ट्री के लिए कई विभागों से क्लीयरेंस लेना अब टेढ़ी खीर हो चुका है। मसलन, टिंबर इंडस्ट्री में पॉल्यूशन नहीं होता, सर्टिफिकेट अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि कई ऐसी बाधाएं हैं जिनकी वजह से उद्योग पनप नहीं पा रहे हैं। सरकार को सिंगल विंडो सिस्टम करना चाहिए।
सर्विस सेक्टर को दी जाए इजाजत
पंचकूला के ज्यादातर उद्यमियों का कहना है कि पंचकूला में सर्विस सेक्टर को इजाजत दी जानी चाहिए। जिससे डेवलपमेंट हो सके। पंचकूला फेज-2 स्थित मार्टिंस के कृष्ण गोपाल गुलाटी ने कहा कि अब इंटरनेशनल एयरपोर्ट पंचकूला के करीब है और यदि यहां सर्विस सेक्टर को इजाजत दे दी जाए तो इंडस्ट्रियल एरिया की स्थिति एकदम बदल जाएगी।
पावर गेम में पिसे उद्यमी
पीवीआर मेटेलर्जी के प्रोपराइटर पीपी चोपड़ा ने कहा कि उद्यमी पावर गेम में ही पिस गए हैं। अब उनको पावर कंजप्शन का चार्ज तो देना ही पड़ता है और उसके साथ ही फिक्स चार्ज भी अलग से वसूले जाते हैं। जिससे उद्यमियों पर ज्यादा भार पड़ने लगा है। धीरे धीरे फ्यूल चार्ज भी बढ़ा दिए जा रहे हैं जो कि बोझ बन गया है।
सरकारी कमेटियों में हो भागेदारी
इंडस्ट्री वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि अलग अलग इंडस्ट्री एसोसिएशन के सदस्यों को जिला स्तर पर उद्योग के लिए बनाई गई सरकारी कमेटियों में शामिल किया जाना चाहिए। जिससे उद्यमी सरकार से तालमेल करके सक्रिय भूमिका निभा सकें। प्रशासन के साथ भागेदारी बढ़ाई जा सके और सरकार उद्यमियों के विचार जाने और उनके मुताबिक कानून बनाए। उद्यमियों ने कहा कि पालिसी को पब्लिक डोमेन में डाला जाए। जिससे हरके को सही जानकारी मिल सके।
यह उद्यमी रहे मौजूद
इस गेट टू गेदर में राकेश गर्ग, अशोक गर्ग, कृष्णा गोपाल गुलाटी, पीपी चोपड़ा, अरविंद निखंज और मोनो निखंज, पवन कुमार, विशाल ओसवाल, वरुण कपूर, परवेज सैफी, दीपक शर्मा, सुभाष चंद्र, रविंदर कंबोज, रमाकांत भारद्वाज, टेकचंद गोयल, अजय गुप्ता, भूषण कुमार, कुनाल जैन, अश्वनी गुप्ता, राजन नंदा, सुनील जैन, जय दयाल, नरेश कुमार शर्मा, अमरनाथ गोयल, डीपी सिंघल, दीनदयाल, सुरेश बंसल, सीवी सचदेवा, जगदीप अत्री, पियूष जैन, मंदीप अत्री, सुरेश कुमार, दिनेश कुमार, सुमित अग्रवाल, ओपी चुग, केएल चौहान, डीपी आर्या, सुभाष सैनी, कृष्ण चलाना, एसके धीर, नितिन गोयल, अमित मेहरा, एनके शर्मा, अमरनाथ गोयल, जतिन छाबड़ा पीवी सिंघल, टीसी गोयल, पीयूष कुमार, गुरदीप सिंह, अंशुल, दिनेश कुमार।