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Chandigarh News: चालान और वाहन पंजीकरण में करोड़ों के घोटाले का आरोप, मामला पहुंचा हाईकोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। चालान और वाहन पंजीकरण में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए दाखिल की गई जनहित याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
लुधियाना निवासी आरटीआई कार्यकर्ता रविंद्र कटारिया ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि परिवहन विभाग के अधिकारी ओवरलोड वाहनों पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम जुर्माना वसूलने के बजाय बेहद कम राशि या कई मामलों में कोई जुर्माना ही नहीं वसूल रहे हैं। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
याचिकाकर्ता के अनुसार अगस्त 2023 से फरवरी 2025 तक इस अनियमितता से 12.26 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है जबकि यदि 2019 से अब तक का आंकड़ा देखा जाए तो यह नुकसान 100 करोड़ से भी अधिक हो सकता है। याचिका में दूसरा बड़ा आरोप कबाड़ और चोरी किए गए वाहनों के अवैध पंजीकरण का है। दावा किया गया है कि परिवहन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से जाली दस्तावेज बनाकर कबाड़ वाहनों को नए नंबरों से पंजीकृत किया जा रहा है। लक्जरी कारों को भी कम कीमत पर पंजीकृत किए जाने के मामले सामने आए हैं।
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कोर्ट को यह भी बताया गया कि पहले इसी मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अधिकारियों के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताई थी और 8 मई को संबंधित अधिकारियों के एक-तिहाई वेतन पर रोक भी लगा दी थी। अब चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने राज्य सरकार, परिवहन विभाग के अधिकारियों, डीजीपी और विजिलेंस ब्यूरो को नोटिस जारी कर 9 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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चंडीगढ़। चालान और वाहन पंजीकरण में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए दाखिल की गई जनहित याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
लुधियाना निवासी आरटीआई कार्यकर्ता रविंद्र कटारिया ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि परिवहन विभाग के अधिकारी ओवरलोड वाहनों पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम जुर्माना वसूलने के बजाय बेहद कम राशि या कई मामलों में कोई जुर्माना ही नहीं वसूल रहे हैं। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
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याचिकाकर्ता के अनुसार अगस्त 2023 से फरवरी 2025 तक इस अनियमितता से 12.26 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है जबकि यदि 2019 से अब तक का आंकड़ा देखा जाए तो यह नुकसान 100 करोड़ से भी अधिक हो सकता है। याचिका में दूसरा बड़ा आरोप कबाड़ और चोरी किए गए वाहनों के अवैध पंजीकरण का है। दावा किया गया है कि परिवहन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से जाली दस्तावेज बनाकर कबाड़ वाहनों को नए नंबरों से पंजीकृत किया जा रहा है। लक्जरी कारों को भी कम कीमत पर पंजीकृत किए जाने के मामले सामने आए हैं।
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कोर्ट को यह भी बताया गया कि पहले इसी मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अधिकारियों के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताई थी और 8 मई को संबंधित अधिकारियों के एक-तिहाई वेतन पर रोक भी लगा दी थी। अब चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने राज्य सरकार, परिवहन विभाग के अधिकारियों, डीजीपी और विजिलेंस ब्यूरो को नोटिस जारी कर 9 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।