हरियाणा: चर्चित आईएएस अशोक खेमका पर नियमों के विरुद्ध नियुक्तियों का आरोप, आपराधिक केस दर्ज करने की सिफारिश
अशोक खेमका ने कहा कि 12 साल पुराना मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अगर भंडारण निगम के वर्तमान प्रबंध निदेशक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई कर रहे हैं तो भारतीय प्रशासनिक सेवा नियमों के अनुसार पहले मुख्यमंत्री की मंजूरी और फिर उनसे संबंधित मामले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जाना जरूरी है।
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हरियाणा के चर्चित आईएएस अधिकारी डॉ. अशोक खेमका पर नियमों के विरुद्ध नियुक्तियां करने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि 2009-10 में खेमका ने हरियाणा भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक रहते दो प्रबंधकों की नियुक्ति नियमों को ताक पर रखकर की, जिससे उनकी मंशा पर सवाल उठते हैं। निगम के वर्तमान प्रबंधक निदेशक संजीव वर्मा ने 12 साल पुराने मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए खेमका समेत चार पर आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है।
वर्मा ने कार्रवाई के लिए पंचकूला के सेक्टर-पांच स्थित पुलिस थाना के एसएचओ को पत्र लिखा है। नियमों के विरुद्ध नियुक्ति पाने वाले दोनों प्रबंधकों सुरेंद्र सिंह व प्रदीप गुप्ता को 20 अप्रैल 2022 को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। वर्तमान में सुरेंद्र सिंह वरिष्ठ जिला प्रबंधक व प्रदीप प्रबंधक ग्रेड-1 के पद पर पंचकूला मुख्यालय में तैनात थे। वर्मा ने मुख्य सचिव संजीव कौशल को पत्र लिखकर खेमका के खिलाफ नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
उधर, खेमका ने भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि वर्मा भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने अभिलेखागार विभाग में रहते नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा किया है। इसे लेकर उन्होंने वर्मा के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र भी लिखा था। बदले की भावना से उन पर ताजा आरोप लगाए गए हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी। बेबुनियाद आरोप लगाकर उन्हें रोका नहीं जा सकता।
वर्मा ने पुलिस को भेजी शिकायत में कहा है कि खेमका, सेवानिवृत्त प्रबंधक सोमनाथ रतन, सहायक प्रबंधक एससी कांसल व तत्कालीन डीलिंग सहायक नरेश कुमार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करें। इन्होंने नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां की हैं। इसलिए इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई बनती है।
रविंद्र कुमार ने 11 अप्रैल को भेजा था कानूनी नोटिस
नियुक्तियों में धांधली के मामले में हुई कार्रवाई को लेकर रविंद्र कुमार ने 11 अप्रैल 2022 को नोटिस भेजकर जानकारी मांगी थी। मामले की जांच के लिए निगम के एमडी संजीव वर्मा ने तुरंत समिति गठित की, जिसकी रिपोर्ट 18 अप्रैल को आई, उसमें नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध पाई गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियुक्तियां रोस्टर के अनुसार नहीं की गई थी। प्रबंधक ग्रेड-। के पद पर नियुक्त प्रदीप कुमार गुप्ता और सुरिंदर सिंह के पास सीधी भर्ती के मामले में अपेक्षित योग्यता और अनुभव नहीं था।
जांच समिति ने यह दी है रिपोर्ट
2009 में हरियाणा भंडारण निगम ने प्रबंधक ग्रेड-1 के दस पद भरने के लिए विज्ञापन निकाला था। इनमें से छह पदों पर नियुक्ति हुई। पहले चार पद व सात नंबर सामान्य श्रेणी, पांच व दस नंबर पद एससी श्रेणी, छह नंबर बीसी-ए श्रेणी, नौ नंबर बीसी बी श्रेणी व आठ नंबर पद एक्स सर्विसमैन सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित था। 103 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, जिनमें से 13 को साक्षात्कार के लिए बुलाया और सामान्य श्रेणी में दो, बीसी-ए, बीसी-बी में एक-एक और एक्स सर्विसमैन सामान्य श्रेणी में एक-एक नियुक्ति की गई।
जांच समिति ने पाया कि एक्स सर्विसमैन कोटे का एक पद था, जबकि नियुक्तियां दो पदों पर हुईं। नियुक्तियों के लिए गठित कार्यकारी समिति में खेमका भी शामिल थे, जिसने योग्यता पूरी न करने वाले दो उम्मीदवारों को एक्स सर्विसमैन कोटे में नियुक्ति देकर योग्य उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर आपराधिक साजिश रची, इसलिए पीसी एक्ट और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक केस दर्ज किया जाए।
नियुक्ति के लिए ये थी शर्तें
रिपोर्ट में विशेष रूप से उल्लेख किया है कि विज्ञापन में सरकारी विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, प्रबंधकीय या वाणिज्यिक संगठन में कृषि उपज के प्रबंधन और संरक्षण में सात साल का अनुभव होना चाहिए। निगम में प्रबंधक ग्रेड-।। के पद के वेतनमान से कम वेतनमान वाले पद पर पर्यवेक्षी क्षमता, विपणन प्रबंधन में डिप्लोमा या डिग्री रखने वाले व्यक्तियों को वरीयता दी जाएगी। जबकि प्रदीप कुमार गुप्ता ने भारतीय वायु सेना द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है, जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि 688776-एल सार्जेंट प्रदीप गुप्ता को 14 नवंबर 1988 को भारतीय वायुसेना में नामांकित किया गया था, वह विशेष रूप से उपकरण फिटर के कर्तव्यों के लिए प्रशिक्षित थे। उन्होंने 20 साल नौकरी की। इसी प्रकार सुरिंदर सिंह के पास भी अपेक्षित अनुभव नहीं था।
मुख्यमंत्री की मंजूरी और स्पष्टीकरण मांगना जरूरी: खेमका
अशोक खेमका ने कहा कि 12 साल पुराना मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अगर भंडारण निगम के वर्तमान प्रबंध निदेशक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई कर रहे हैं तो भारतीय प्रशासनिक सेवा नियमों के अनुसार पहले मुख्यमंत्री की मंजूरी और फिर उनसे संबंधित मामले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जाना जरूरी है। इसमें बदले की बू आ रही है। वह इसके खिलाफ पूरी लड़ाई लड़ेंगे।
भंडारण निगम की शिकायत को जांच रहे: नेहरा
पंचकूला के एसीपी विजय नेहरा ने कहा कि नियुक्तियों में धांधली को लेकर चार लोगों पर आपराधिक मामला दर्ज करने की शिकायत हरियाणा भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक की तरफ से आई है। उसकी जांच कर रहे हैं। शिकायत के सही पाए जाने पर जो कार्रवाई बनेगी, वह की जाएगी।