सर्वदलीय बैठकः पंजाब के पास फालतू पानी नहीं, नॉन-बेसिन इलाकों को न दे केंद्र सरकार
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में गुरुवार को राज्य के जल संकट पर सर्वदलीय बैठक हुई। इसमें सभी दलों के नेताओं ने एकसुर में कहा कि पंजाब के पास फालतू पानी नहीं है। केंद्र सरकार को यह यकीनी बनाना चाहिए कि पंजाब के तीन नदियों का पानी किसी भी हालत में बेसिन से नॉन-बेसिन (जो नदी के आसपास न हो) इलाकों को स्थानांतरित न किया जाए। सभी ने इस पर चिंता जताते हुए पानी की उपलब्धता का फिर से मूल्यांकन किए जाने की मांग की।
बैठक में अकाली दल की तरफ से एक प्रस्ताव पेश कर पंजाब के पानी के मसले का हल राइपेरियन सिद्धांत के तहत निकालने पर जोर दिया। वहीं, आम आदमी पार्टी ने पंजाब के दरियाओं के पानी की अन्य राज्यों द्वारा लूट का मुद्दा उठाते हुए प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकारों को निशाने पर लिया। इसके अलावा जहरीले होते भूजल के लिए पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जिम्मेदार ठहराया।
बैठक में सभी पार्टियों ने सर्वसम्मति से नए ट्रिब्यूनल की स्थापना के लिए प्रस्तावित अंतरराज्यीय नदी जल विवाद एक्ट में जरूरी संशोधन करने की मांग की ताकि पंजाब को इसकी कुल मांग और भावी पीढ़ियों की आजीविका के लिए अतिरिक्त पानी मुहैया करवाया जा सके।
हर छह माह बाद बुलाएंगे सर्वदलीय बैठक: कैप्टन
मुख्यमंत्री ने सभी राजनैतिक दलों की ओर से सकारात्मक और रचनात्मक सुझाव पेश करने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा पंजाब का मामला रखने के लिए वे प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगेंगे। उन्होंने कहा कि भारत में नदी पानी के विभाजन के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए गए तटीय सिद्धांत (राइपेरियन प्रिंसिपल) को दरकिनार किया गया था। उन्होंने इसमें सुधार करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यह भी एलान किया कि उनकी सरकार राज्य से संबंधित महत्वपूर्ण मसलों पर विचार करने के लिए हर छह महीनों बाद सर्वदलीय बैठक बुलाएगी।
प्रस्ताव में एसवाईएल का जिक्र नहीं :
बैठक में जो प्रस्ताव पढ़ा गया, उसमें सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर का जिक्र नहीं किया गया। हालांकि शिअद और आम आदमी पार्टी (आप) सहित सभी राजनैतिक पार्टियों ने एकसुर में कहा कि नहर के निर्माण की ओर उठाया गया कोई भी कदम राज्य के लिए घातक सिद्ध होगा। सभी पार्टियों ने इस नाजुक मसले पर सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए मुख्यमंत्री के कदम की सराहना की।
एसवाईएल का मसला आपस में नहीं सुलझाना चाहता पंजाब: मनोहर
उधर, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सर्वदलीय बैठक के फैसले से साफ हो गया है कि पंजाब, एसवाईएल का मसला आपस में सुलझाना ही नहीं चाहता। अभी तक जो समय बर्बाद हो रहा था, वह अब बचेगा। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपस में मामला सुलझाने के लिए कहा था, लेकिन पंजाब समाधान निकालने से पीछे हट गया है। अच्छा हुआ पंजाब ने इस पर कोई निर्णय ले लिया। इसका लाभ हरियाणा को मिलने वाला है। इस मामले में पंजाब के नेताओं के बयान का कोई औचित्य नहीं है। फैसला हरियाणा के पक्ष में आ चुका है, अब सुप्रीम कोर्ट को सिर्फ क्रियान्वयन आदेश देने हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट ही हरियाणा को एसवाईएल का पानी दिलाएगा। हमारे हिस्से का पानी कोई नहीं रोक सकता। हरियाणा अपने हिस्से का पानी लेकर रहेगा। - दुष्यंत चौटाला, उप मुख्यमंत्री, हरियाणा
सर्वदलीय बैठक में पढ़ा गया प्रस्ताव, पंजाब के मरुस्थल बनने का अंदेशा
ऐसी स्थिति में यह सर्वसम्मति से संकल्प लिया जाता है कि केंद्र सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि पंजाब के दरियाई पानी को तीन दरियाओं (रावी, सतलुज और ब्यास) के बेसिन से नॉन-बेसिन इलाकों में दुनिया भर में अपनाए गए तटीय सिद्धांत (राइपेरियन प्रिंसिपल) के मुताबिक किसी भी सूरत में स्थानांतरित न किया जाए। पानी की उपलब्धता के पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रस्तावित अंतरराज्यीय नदी जल विवाद एक्ट के अधीन नया ट्रिब्यूनल स्थापित करने संबंधी संशोधन किया जाए ताकि पंजाब को इसकी कुल मांग के लिए पानी मुहैया करवाया जा सके।