फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   All parties will make a strategy to make their mayor in Chandigarh

जोड़तोड़ से बनेगा चंडीगढ़ का मेयर: सभी दलों को बचाने होंगे अपने पार्षद, आम आदमी पार्टी से भाजपा एक सीट पीछे

Mon, 27 Dec 2021 11:29 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 27 Dec 2021 11:29 PM IST
सार

वर्तमान पार्षदों का कार्यकाल 8 जनवरी तक रहेगा। 30 दिसंबर को निगम सदन की बैठक होनी है। इस बीच तीनों पार्टियां सतर्क रहेंगी, क्योंकि इस कार्यकाल में ही पार्षदों को तोड़ने और जोड़ने का काम चलेगा। भाजपा ने दावा किया है कि मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर हमारे होंगे, वहीं आप ने भी तीनों पदों पर अपना दावा किया है।

विज्ञापन
All parties will make a strategy to make their mayor in Chandigarh
जीत का जश्न मनाते आप कार्यकर्ता। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में जनता ने किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया है। अब मेयर बनाने के लिए जोड़तोड़ की राजनीति शुरू होगी। बहुमत का आंकड़ा बेशक 19 का हो लेकिन यह महज कागजों तक सीमित है। अपना मेयर बनाने के लिए तीनों पार्टियां अब पूरा प्रयास करेंगी। वहीं, तीनों पार्टियों को अपने-अपने पार्षदों को बचाना भी एक बड़ी चुनौती है।

विज्ञापन


खासकर भाजपा और आप का कोई भी पार्षद टूटकर दूसरी पार्टी में गया तो उसी का पलड़ा भारी होगा। निगम चुनाव में दल बदल विरोधी कानून लागू न होने से अब तीनों पार्टियों के पास यही एकमात्र विकल्प बचा है। त्रिकोणीय मुकाबले ने नगर निगम चुनाव को और रोमांचक बना दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मेयर की कुर्सी पर कौन कब्जा जमाएगा। 
विज्ञापन


आप 14 सीटें जीतकर बड़ी पार्टी तो बन गई लेकिन मेयर बनाने के लिए उसे अभी भी कुछ प्रत्याशियों को अपने साथ जोड़ना होगा। वहीं, भाजपा को 12 सीटें मिली हैं। एक वोट सांसद का मिलने से यह संख्या 13 हो जाएगी। भाजपा कांग्रेस या आप में से कुछ पार्षदों को तोड़ने में कामयाब रही तो मेयर बनाने में वह भी सफल हो सकती है। इस पूरे मामले में कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। जिसकी ओर कांग्रेस जाएगी, वह आसानी से अपना मेयर बना लेगा। वहीं, एक मत अकाली दल का भी है। ऐसे में एक दूसरे के पार्षदों को तोड़ने के लिए भाजपा और आप पूरा जोर लगाएंगी, वहीं कांग्रेस मौके का फायदा कैसी उठाएगी और किसके पक्ष में जाएगी यह काफी रोमांचकारी होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


पंजाब को देखकर तय होगा कांग्रेस के साथ गठबंधन
भाजपा और अकाली दल का गठबंधन कुछ दिन पहले ही टूटा है। केंद्र और पंजाब में दोनों दलों के बीच काफी मनमुटाव है। ऐसे में भाजपा-अकाली का गठबंधन मुश्किल है। पंजाब में आप हमेशा कांग्रेस पर हमलावर रहती है। यहां गठबंधन हुआ तो फिर पंजाब की सियासी पिच पर आप का प्रदर्शन गिर जाएगा। भाजपा और कांग्रेस का गठबंधन भी न के बराबर है। ऐसे में पार्षदों को तोड़ने के अलावा विपक्षी पार्टियों के पास कोई विकल्प नहीं होगा।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed