Haryana Panchayat Election: अब सभी दल बिछाने लगे चेयरमैनी की बिसात, निर्दलीयों पर टिकीं सभी की निगाहें
वर्ष 2016 के चुनाव की बात करें तो उस समय भाजपा ने परचम लहराया था और कांग्रेस साफ हो गई थी। हालांकि, पिछली बार भाजपा ने बिना सिंबल के चुनाव लड़ा था। पूर्व सीएम हुड्डा के गढ़ में भाजपा ने अपना चेयरमैन बनाया था। इसके अलावा, भाजाप जिला सिरसा को छोड़कर प्रदेश के सभी 20 जिलों में जिला परिषदों के अध्यक्ष बनाने में सक्षम रही थी।
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जिला परिषद और ब्लॉक समिति के चुनाव परिणामों में मिली हार और जीत के बाद अब प्रधानी के लिए बिसात बिछ गई है। जिलों में अपनी सरकार बनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। जिला परिषद चेयरमैन और ब्लॉक समिति चेयरमैन बनाने के लिए सभी दलों की नजरें निर्दलीय सदस्यों पर टिकी हुई हैं। शह और मात के इस खेल में सभी दलों के नेताओं ने निर्दलीयों को तोड़ने के लिए पासे फेंक दिए हैं। साथ ही सभी निर्दलीय सदस्यों पर निगरानी बढ़ा दी है और उनको आफॅर तक दे दिए हैं। हालांकि, अभी तक निर्दलीयों ने स्थिति साफ नहीं है, वह किसी भी दल को टोह नहीं दे रहे हैं।
22 जिला परिषदों में 22 चेयरमैन और इतने ही वाइस चेयरमैन चुने जाने हैं। इसी प्रकार कुल 143 ब्लॉक समिति में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के पद हैं। जिला परिषद की 411 और ब्लॉक समिति की 3081 सीटों पर हुए चुनाव के परिणाम सभी दलों के लिए चौंकाने वाले रहे हैं। इस बार दलों के प्रत्याशियों के बजाय निर्दलीय अधिक जीतकर आए हैं।
ग्रामीण मतदाताओं द्वारा निर्दलीय पर दिखाए गए इस भरोसे को भुनाने के लिए राजनीतिक दलों ने जोड़ तोड़ शुरू कर दी है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी, जननायक जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता परिणाम जारी होने के तुरंत बाद से ही निर्दलीयों से संपर्क साध रहे हैं। मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को इस काम के लिए लगाया गया है, ताकि अधिक से अधिक निर्दलीय सदस्यों को अपने पाले में लाया जा सके। दलों ने स्थिति को देखते हुए चेयरमैन और वाइस चेयरमैन बनाने के ऑफर कर रहे हैं।
इधर, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, इनेलो ने अपनी ताकत झोंक दी है। अपने अपने गढ़ों में अपने समर्थकों को प्रधान बनाने के लिए अभी लाबिंग शुरू हो गई है। सिरसा जिले में अभय चौटाला के बेटे कर्ण चौटाला को चेयरमैन बनाने के लिए अभय चौटाला कमान संभाले हैं। इसी प्रकार, रोहतक में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हु्ड्डा, सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने अपने समर्थकों के साथ साथ निर्दलीयों को साधना शुरू कर दिया है।
यहां पर भाजपा के पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर भी निर्दलीयों को अपने पाले में लाने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। कुरुक्षेत्र में कांग्रेस के अधिक सदस्य जीतने के चलते कांग्रेस यहां पर पूरा जोर लगाए है। पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा निर्दलीयों को बधाई दे रहे हैं। उधर, स्थानीय भाजपा विधायक सुभाष सुधा भी निर्दलीयों को भाजपा में लाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
पंचकूला में बेशक भाजपा साफ हो गई लेकिन चेयरमैन बनाने की उम्मीद अभी नहीं छोड़ी। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने निर्दलीय सदस्यों को साधना शुरू कर दिया है। उधर, कांग्रेस के पूर्व डिप्टी सीएम चंद्रमोहन और कालका से विधायक प्रदीप चौधरी निर्दलीयों को कांग्रेस समर्थित बता रहे हैं।
इसी प्रकार, करनाल, पानीपत, यमुनानगर, सोनीपत, जींद, कैथल आदि जिलों में भी तमाम दलों के नेता अपने अपने चेयरमैन बनाने के समीकरणों में जुटे हैं। क्योंकि जिलों में बनने वाली सरकार से ही आगामी 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव का माहौल बनेगा, इसलिए कोई भी दल इसमें कसर नहीं छोड़ रहा है। सभी दलों का दावा है कि उनके सदस्य अधिक जीते हैं और प्रधानी पर भी उन्हीं का कब्जा होगा लेकिन ये तो समय ही बताएगा कि ताज किसके सिर पर सजता है और कौन सा दल इसमें बाजी मारता है।
2016 में खिला था कमल, कांग्रेस हो गई थी साफ
वर्ष 2016 के चुनाव की बात करें तो उस समय भाजपा ने परचम लहराया था और कांग्रेस साफ हो गई थी। हालांकि, पिछली बार भाजपा ने बिना सिंबल के चुनाव लड़ा था। पूर्व सीएम हुड्डा के गढ़ में भाजपा ने अपना चेयरमैन बनाया था। इसके अलावा, भाजाप जिला सिरसा को छोड़कर प्रदेश के सभी 20 जिलों में जिला परिषदों के अध्यक्ष बनाने में सक्षम रही थी।