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अकांक्ष सेन मर्डर केस में बचाव पक्ष का तर्क, कहा- हवा सिंह ने कैसे लिखा रुक्का, वह मौके पर था नहीं
Fri, 23 Aug 2019 11:19 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Aug 2019 11:19 AM IST
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अकांक्ष सेन मर्डर केस
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हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी के भतीजे अकांक्ष सेन मर्डर केस की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज राजीव गोयल की अदालत में अंतिम बहस के दूसरे दिन मामले में नया मोड़ आ गया। बचाव पक्ष केवकील एनपीएस वड़ैच ने केस के जांच अधिकारी एएसआई बीरेंद्र सिंह को उन्हीं के बयानों में उलझा दिया है। दरअसल, एएसआई बीरेंद्र सिंह ने अपने पहले बयान में कहा था कि 9 फरवरी 2017 को पीजीआई पुलिस चौकी से मैसेज आया कि एक्सीडेंट केस में घायल अकांक्ष सेन पीजीआई में दाखिल हुआ है।
सूचना मिलते ही वह अपने साथी हेड कांस्टेबल दिलीप सिंह, कांस्टेबल खुशी मोहम्मद और लेडी कांस्टेबल सुखविंदर कौर के साथ पीजीआई के ट्रोमा सेंटर पहुंचे। बीरेंद्र सिंह का यह बयान 19 मार्च 2018 को रिकार्ड किया गया था। उसके बाद आठ जुलाई 2019 को बीरेंद्र सिंह ने क्रास एग्जामिनेशन के दौरान बताया था कि इस केस के गवाह अदम्य सिंह का बयान हेड कांस्टेबल हवा सिंह ने लिखा था। बीरेंद्र सिंह के मुताबिक अदम्य का स्टेटमेंट लिखने के बाद हस्ताक्षर उसने किए थे।
वीरवार को अंतिम बहस में बचाव पक्ष के वकील ने सवाल किया कि बीरेंद्र सिंह के पहले बयान के मुताबिक वह जिन साथियों के साथ पीजीआई पहुंचा था, उसमें हवा सिंह का नाम नहीं था। उसके बाद क्रास एग्जामिनेशन में हवा सिंह का जिक्र कर दिया, जबकि हवा सिंह तो वहां गया ही नहीं। तो फिर उसने रुक्का कैसे लिख दिया।
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इस दौरान उन्होंने यह भी सवाल पूछा कि केस के मुख्य गवाहों ने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन किया था, लेकिन आज तक ये नहीं पूछा गया कि उनमें से किसने पुलिस को फोन किया था और फोन कर क्या बताया था। बचाव पक्ष के इन सवालों के साथ ही वीरवार को इस मामले की सुनवाई खत्म हो गई है। अब अगली सुनवाई 27 अगस्त को होनी है।
यह है पूरा मामला
हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री के भतीजे अकांक्ष की हत्या 9 फरवरी 2017 को सेक्टर 9 में बीएमडब्लयू से कुचलकर कर दी गई थी। पुलिस को शिकायत दी गई थी कि अकांक्ष सेन पर जानबूझ कर गाड़ी चढ़ाई गई थी। अकांक्ष सेक्टर-9 में ही रहता था और उसी सेक्टर में उसका एक दोस्त शेरा भी रहता था। रात को वह शेरा के पास ही रुका था।
इस मामले में हरमेहताब सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया था। हरमेहताब को 16 फरवरी 2017 को गिरफ्तार कर लिया गया था। शिकायत के अनुसार बलराज रंधावा गाड़ी चला रहा था और हरमेहताब उससे कह रहा था इसे टक्कर मारो और खत्म कर दो। रंधावा को अब तक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। बाद में उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है।
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सूचना मिलते ही वह अपने साथी हेड कांस्टेबल दिलीप सिंह, कांस्टेबल खुशी मोहम्मद और लेडी कांस्टेबल सुखविंदर कौर के साथ पीजीआई के ट्रोमा सेंटर पहुंचे। बीरेंद्र सिंह का यह बयान 19 मार्च 2018 को रिकार्ड किया गया था। उसके बाद आठ जुलाई 2019 को बीरेंद्र सिंह ने क्रास एग्जामिनेशन के दौरान बताया था कि इस केस के गवाह अदम्य सिंह का बयान हेड कांस्टेबल हवा सिंह ने लिखा था। बीरेंद्र सिंह के मुताबिक अदम्य का स्टेटमेंट लिखने के बाद हस्ताक्षर उसने किए थे।
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वीरवार को अंतिम बहस में बचाव पक्ष के वकील ने सवाल किया कि बीरेंद्र सिंह के पहले बयान के मुताबिक वह जिन साथियों के साथ पीजीआई पहुंचा था, उसमें हवा सिंह का नाम नहीं था। उसके बाद क्रास एग्जामिनेशन में हवा सिंह का जिक्र कर दिया, जबकि हवा सिंह तो वहां गया ही नहीं। तो फिर उसने रुक्का कैसे लिख दिया।
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इस दौरान उन्होंने यह भी सवाल पूछा कि केस के मुख्य गवाहों ने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन किया था, लेकिन आज तक ये नहीं पूछा गया कि उनमें से किसने पुलिस को फोन किया था और फोन कर क्या बताया था। बचाव पक्ष के इन सवालों के साथ ही वीरवार को इस मामले की सुनवाई खत्म हो गई है। अब अगली सुनवाई 27 अगस्त को होनी है।
यह है पूरा मामला
हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री के भतीजे अकांक्ष की हत्या 9 फरवरी 2017 को सेक्टर 9 में बीएमडब्लयू से कुचलकर कर दी गई थी। पुलिस को शिकायत दी गई थी कि अकांक्ष सेन पर जानबूझ कर गाड़ी चढ़ाई गई थी। अकांक्ष सेक्टर-9 में ही रहता था और उसी सेक्टर में उसका एक दोस्त शेरा भी रहता था। रात को वह शेरा के पास ही रुका था।
इस मामले में हरमेहताब सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया था। हरमेहताब को 16 फरवरी 2017 को गिरफ्तार कर लिया गया था। शिकायत के अनुसार बलराज रंधावा गाड़ी चला रहा था और हरमेहताब उससे कह रहा था इसे टक्कर मारो और खत्म कर दो। रंधावा को अब तक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। बाद में उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है।