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Chandigarh: अकाली नेता बिक्रम मजीठिया को बड़ी राहत, एनडीपीएस केस में एसआईटी के भेजे समन लिए गए वापस
Mon, 08 Jul 2024 11:52 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 08 Jul 2024 11:52 AM IST
सार
20 दिसंबर 2021 को एनडीपीएस एक्ट के तहत तब की कांग्रेस सरकार ने अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया पर मोहाली में पर्चा दर्ज किया था। इस मामले में मजीठिया को बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।
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बिक्रम मजीठिया।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
एनडीपीएस केस में अकाली नेता बिक्रम मजीठिया को बड़ी राहत मिली है। एसआईटी की तरफ से मजीठिया को भेजे समन वापस ले लिए गए हैं।
इस मामले में जांच में शामिल होने के लिए मजीठिया को एसआईटी ने समन भेजे थे। समन को अवैध बताते हुए मजीठिया ने हाईकोर्ट में समन किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।
मजीठिया की तरफ से सीनियर एडवोकेट आरएस चीमा ने हाई कोर्ट को बताया था कि उन्हें भेजे गए समन पूरी तरह गलत हैं, उन्हें बार बार बेवजह बुलाया जा रहा है, अभी तक की जांच में एसआईटी को कुछ नहीं मिला है और यह समन ही अवैध हैं, लिहाजा इसे रद्द किया जाए। सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही पंजाब सरकार के सरकारी वकील ने हाई कोर्ट को बताया कि समन नोटिस को वापिस लिया जा रहा है। इसके बाद हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
एसआईटी ने मजीठिया को 25 जून को जांच में शामिल होने का नोटिस दिया था। जिसे मजीठिया ने हाई कोर्ट में चुनौती दे दी थी। तब सरकार ने कहा था कि उन्हें 8 जुलाई तक पेश होने की जरूरत नहीं है। इसके बाद हाई कोर्ट ने सुनवाई आठ जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी थी।
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इस मामले में जांच में शामिल होने के लिए मजीठिया को एसआईटी ने समन भेजे थे। समन को अवैध बताते हुए मजीठिया ने हाईकोर्ट में समन किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।
मजीठिया की तरफ से सीनियर एडवोकेट आरएस चीमा ने हाई कोर्ट को बताया था कि उन्हें भेजे गए समन पूरी तरह गलत हैं, उन्हें बार बार बेवजह बुलाया जा रहा है, अभी तक की जांच में एसआईटी को कुछ नहीं मिला है और यह समन ही अवैध हैं, लिहाजा इसे रद्द किया जाए। सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही पंजाब सरकार के सरकारी वकील ने हाई कोर्ट को बताया कि समन नोटिस को वापिस लिया जा रहा है। इसके बाद हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
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एसआईटी ने मजीठिया को 25 जून को जांच में शामिल होने का नोटिस दिया था। जिसे मजीठिया ने हाई कोर्ट में चुनौती दे दी थी। तब सरकार ने कहा था कि उन्हें 8 जुलाई तक पेश होने की जरूरत नहीं है। इसके बाद हाई कोर्ट ने सुनवाई आठ जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी थी।
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