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Hindi News ›   Chandigarh ›   Akali Dal withdrew two assembly seats from Bahujan Samaj Party, given Dalit majority seats in return for Punjab Assembly Election

पंजाब: अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी के बीच सीटों की अदला-बदली, बसपा को मिलीं दो दलित बाहुल्य सीटें

Wed, 08 Sep 2021 12:27 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 08 Sep 2021 12:27 PM IST
सार

कृषि कानूनों को लेकर शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा के साथ सितंबर 2020 में गठबंधन तोड़ लिया था। जिसके बाद पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर जून में शिअद ने 25 साल बाद फिर से बसपा के साथ गठबंधन की घोषणा की थी।

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Akali Dal withdrew two assembly seats from Bahujan Samaj Party, given Dalit majority seats in return for Punjab Assembly Election
शिअद और बसपा का गठबंधन। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

पंजाब विधानसभा के मद्देनजर इसी साल बहुजन समाज पार्टी और शिरोमणि अकाली दल का चुनावी गठनबंधन हुआ था। वहीं सीटों को लेकर बुधवार को बड़ा फेरबदल किया गया। शिअद ने बसपा से उसके हिस्से की दो सीटों को वापस ले लिया है। अब अमृतसर उत्तर और सुजानपुर सीटों से शिअद प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। इन सीटों के बदले अब बसपा को दलित बाहुल्य क्षेत्र की शाम चौरासी और कपूरथला सीट दी गई हैं। 

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कृषि कानूनों को लेकर शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा के साथ सितंबर 2020 में गठबंधन तोड़ लिया था। जिसके बाद पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर जून में शिअद ने 25 साल बाद फिर से बसपा के साथ गठबंधन की घोषणा की थी।
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गठबंधन के तहत शिअद की ओर से बसपा को 20 विधानसभा सीटें दी गई थीं और 97 सीटों पर शिअद ने चुनाव लड़ने का एलान किया था। लगभग तीन महीने के बाद अकाली दल की ओर से बसपा के कोटे से अमृतसर उत्तर और सुजानपुर सीटों को वापस लेकर शाम चौरासी और कपूरथला सीटों को दिया गया है। इसकी आधिकारिक पुष्टि शिअद प्रवक्ता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने की है।

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दोआबा में दिखेगा असर

अकाली दल व बसपा गठबंधन का पंजाब में अगले विधानसभा चुनावों में गहरा असर होगा, खासकर दोआबा इस गठबंधन का मुख्य केंद्र बनने जा रहा है। दोआबा में कई सीटों पर बसपा का पूरा प्रभाव है, क्योंकि बसपा के संस्थापक कांशी राम भी दोआबा से चुनाव जीतकर लोकसभा तक जा चुके हैं।

दोआबा की तमाम सीटों पर हाथी जीत हार में अहम भूमिका अदा करता आया है। 2012 के विधानसभा चुनावों में तो बसपा का वोट का ग्राफ काफी तेजी से ऊपर गया तो नतीजतन, कांग्रेस को कई सीटों पर हार देखनी पड़ी और सूबे में शिअद-भाजपा की सरकार बन गई।

पंजाब में भाजपा पहले ही एससी वोट बैंक को लेकर काफी गंभीर चल रही थी, इसलिए पंजाब में 2012 में चुनावों के बाद विधायक दल का नेता भगत चुन्नी लाल को बनाया गया था। भाजपा ने तो पंजाब में अपना सीएम एससी कैटेगरी से बनाने की घोषणा कर रखी है और अकाली दल ने डिप्टी सीएम की कुर्सी एससी के लिए रखी है। आप भी एससी वोट को लेकर मैदान में है और एससी का सीएम बनाने की बात कही जा रही है।  
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