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हरियाणा में पांव जमाने को अकाली दल तैयार, 19 अगस्त को पिपली में विशाल रैली
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Updated Thu, 16 Aug 2018 09:50 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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अकाली दल बादल व इनेलो की चुनावी दोस्ती टूटने के बाद शिअद अब हरियाणा में अपनी जमीन तलाश रहा है। अकाली दल बादल 19 अगस्त को हरियाणा में जबरदस्त रैली करने जा रहा है, जिसमें 25 हजार लोगों को लाने का टारगेट रखा गया है। शिअद के दिग्गजों की टीम ने पिपली में डेरा डाल लिया है और वहां पर रैली को सफल बनाने में जुट गए हैं। शिअद की तरफ से बलविंदर सिंह भूंदड़, सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बीबी जागीर कौर व विधायक एनके शर्मा, चरणजीत सिंह बराड़ को हरियाणा में भेज दिया गया है, जिन्होंने वहां पर अपना होमवर्क शुरू कर दिया है।
इनेलो ने आने वाले विधानसभा चुनाव में साफ कह दिया है कि बस अब अकाली दल के साथ नहीं मिलकर चुनाव लड़ना। इस बार इनेलो अकेले मैदान में उतरेगा। अकाली दल अब इनेलो से रिश्ता खत्म कर दोबारा भाजपा की तरफ हाथ बढ़ाने जा रहा है, लेकिन भाजपा की तरफ से अभी अकाली दल का हाथ नहीं पकड़ा गया है। यही वजह है कि केंद्र में बैठी भाजपा लीडरशिप को अकाली दल हरियाणा में अपनी ताकत दिखाने की तैयारी कर रहा है।
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रैली में अंबाला, कैथल, कुरुक्षेत्र व करनाल, यमुनानगर से लोगों को लाने के लिए अकाली दल ने अपने नेताओं को जिम्मेदारी सौंप दी है। अकाली दल के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, अकाली दल अगर पिपली की रैली में 25 हजार की भीड़ जमा कर गया तो भाजपा को वह अपनी मनमानी शर्तों पर गठबंधन के लिए तैयार कर सकता है। अगर भाजपा न भी तैयार हुई तो अकाली दल अकेले चुनाव जरूर लड़ेगा, यह तय है।
दरअसल, अकाली दल को भाजपा की केंद्रीय लीडरशिप खासी तवज्जों नहीं दे रही है। हाल ही में राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव में अकाली दल पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल को बैठाने का चाहवान था, लेकिन भाजपा ने अकाली दल की एक नहीं सुनी। बाद में अकाली दल भाजपा के समर्थन के लिए राजी हो गया। अकाली दल व भाजपा में उतना तालमेल नहीं बन पा रहा है, जितना 1997 में था।
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रैली पिपली में 19 अगस्त को होगी, जिसको संबोधित करने के लिए शिअद सुप्रीमो सुखबीर बादल पहुंचेंगे। पिछले विधानसभा चुनाव में अकाली दल व भाजपा का बेशक राष्ट्रीय स्तर पर व पंजाब में मजबूत गठबंधन था लेकिन अकाली दल ने इनेलो के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इनेलो ने अकाली दल को दो सीट थी, जिसमें अकाली दल एक सीट पर जीत गया था। अकाली दल व इनेलो की इस चुनावी दोस्ती पर भाजपा नेता काफी खफा हुआ थे, क्योंकि हरियाणा व पंजाब में पानी को लेकर जबरदस्त ठनी हुई है।
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इनेलो ने आने वाले विधानसभा चुनाव में साफ कह दिया है कि बस अब अकाली दल के साथ नहीं मिलकर चुनाव लड़ना। इस बार इनेलो अकेले मैदान में उतरेगा। अकाली दल अब इनेलो से रिश्ता खत्म कर दोबारा भाजपा की तरफ हाथ बढ़ाने जा रहा है, लेकिन भाजपा की तरफ से अभी अकाली दल का हाथ नहीं पकड़ा गया है। यही वजह है कि केंद्र में बैठी भाजपा लीडरशिप को अकाली दल हरियाणा में अपनी ताकत दिखाने की तैयारी कर रहा है।
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रैली में अंबाला, कैथल, कुरुक्षेत्र व करनाल, यमुनानगर से लोगों को लाने के लिए अकाली दल ने अपने नेताओं को जिम्मेदारी सौंप दी है। अकाली दल के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, अकाली दल अगर पिपली की रैली में 25 हजार की भीड़ जमा कर गया तो भाजपा को वह अपनी मनमानी शर्तों पर गठबंधन के लिए तैयार कर सकता है। अगर भाजपा न भी तैयार हुई तो अकाली दल अकेले चुनाव जरूर लड़ेगा, यह तय है।
दरअसल, अकाली दल को भाजपा की केंद्रीय लीडरशिप खासी तवज्जों नहीं दे रही है। हाल ही में राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव में अकाली दल पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल को बैठाने का चाहवान था, लेकिन भाजपा ने अकाली दल की एक नहीं सुनी। बाद में अकाली दल भाजपा के समर्थन के लिए राजी हो गया। अकाली दल व भाजपा में उतना तालमेल नहीं बन पा रहा है, जितना 1997 में था।