सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट पर पंजाब विधानसभा में हंगामा, शिअद-भाजपा ने किया वॉकआउट
- सीएम बोले- अकालियों ने पहले केस लटकाया, अब दिलवाई क्लोजर रिपोर्ट।
- चरनजीत सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब केस में फैसला का दिया हवाला।
- एडवोकेट जनरल से रिपोर्ट का विरोध करने को कहा।
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पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का आखिरी दिन सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने सरकार को घेरा। इसके बाद शिअद-भाजपा ने नारेबाजी करते हुए वॉकआउट किया। वहीं इसके जवाब में सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कमान संभाली और अकालियों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने एडवोकेट जनरल को क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करने का निर्देश भी दिया।
सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट से संबंधित बैनर लेकर अंदर जाने की जिद पर अड़े अकाली-भाजपा विधायकों को मंगलवार को पुलिस ने रोक दिया। शून्यकाल शुरू होते ही उन्होंने यह मुद्दा उठाया। इस बीच आप विधायक अमन अरोड़ा ने कहा कि सीएम, एजी और डीजीपी के बयान अलग हैं। सीबीआई के जांच अधिकारी ने कहा है कि पंजाब पुलिस ने कभी उनसे संपर्क नहीं किया।
इसके बाद सीएम ने बेअदबी मामले की जांच में विघ्न डालने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में नाकामी के लिए सीधे अकालियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अकालियों ने पहले जांच लटकाने के लिए केस सीबीआई के हवाले किया। अब सीबीआई पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने का दबाव बनाया गया।
सुखबीर बादल के कहने पर सीबीआई ने जानबूझ कर जांच आगे नहीं बढ़ाई। अकाली विधायक परमिंदर ढींढसा ने दलील दी कि कांग्रेस, आप और पंथक संगठनों के कहने पर ही जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीएम ने जवाबी हमला किया कि क्या डिप्टी सीएम सुखबीर बादल को अपनी पुलिस पर भरोसा नहीं था। इसी बीच अकालियों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। पांच मिनट बाद उन्होंने वॉकआउट कर दिया।
सीएम बोले- सीबीआई के अधिकार में नहीं क्लोजर रिपोर्ट दायर करना
सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि क्लोजर रिपोर्ट दायर करना सीबीआई के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने चरनजीत सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब केस में 25 जनवरी 2019 को आए हाईकोर्ट के फैसले का एक हिस्सा पढ़कर सुनाया जिसमें कहा गया है कि राज्य पुलिस द्वारा एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है। फिर केस सीबीआई को ट्रांसफर किया गया।
इसमें पंजाब सरकार की सहमति एक जांच एजेंसी से दूसरी जांच एजेंसी तब्दील करने तक थी। इसके बाद सीबीआई से केस वापस लेने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। नोटिफिकेशन विधानसभा में पास किए गए प्रस्ताव के अनुसार था। अदालत ने कहा है कि विधानसभा के प्रस्ताव के मुताबिक सहमति वापस लेने के सरकार के फैसले में कोई त्रुटि नजर नहीं आती।
वह सीबीआई से जांच वापस लेने या नोटिफिकेशन रद्द करने संबंधी राज्य सरकार के फैसले में दखलंदाजी महसूस नहीं करती। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी को भी समर्थ बताया। एसआईटी अपनी जांच के लिए सभी फोरेंसिक तकनीक का प्रयोग करती है। इससे स्पष्ट है कि बरगाड़ी केस में क्लोजर रिपोर्ट दायर करना गलत था।
सीएम ने सदन को गमुराह किया : शिअद
अकाली-भाजपा विधायकों ने सदन को गुमराह करने का आरोप लगाकर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव दिया। परमिंदर ढींढसा की अगुवाई में विधायकों ने स्पीकर को प्रस्ताव सौंपा।
उन्होंने कहा कि सीएम ने जनवरी 2019 के केस का हवाला देकर यह साबित करने की कोशिश की है कि पिछली सरकार को जांच सीबीआई को नहीं सौंपनी चाहिए थी। जबकि, सीएम ने 31 जुलाई 2019 को कहा है कि बेअदबी केसों की जांच दोबारा सीबीआई से कराई जाएगी। इससे पहले वह सुप्रीम कोर्ट के जज की अगुवाई में जांच की मांग कर चुके हैं। सीएम ने सदन को गुमराह करने को एक खास अदालती फैसला चुना है।
नशों के मुद्दे पर आप ने दिया धरना
नशों के ओवरडोज से होने वाली मौतों को लेकर आम आदमी पार्टी ने विधानसभा के बाहर धरना दिया। उन्होंने ओवरडोज से मरे एक नौजवान का पुतला लेकर प्रदर्शन किया। जिसकी बाजू में नशे की सीरिंज लगी थी। आप विधायकों ने कैप्टन सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
हरपाल चीमा और अमन अरोड़ा ने कहा कि अकालियों द्वारा दस साल में फैलाई नशे की बीमारी ने अब हर गली-मोहल्ले को चपेट में ले लिया है। चार हफ्ते में नशे खत्म करने की कसम खाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ढाई साल में भी कुछ नहीं किया। अब नशे की ओवरडोज से लड़कियों की भी मौत हो रही है।
अनुच्छेद 370 पर बोल रहे संधू को सीएम ने कराया चुप
शून्यकाल के दौरान आप विधायक कंवर संधू ने अनुच्छेद 370 पर बोलना शुरू किया। उनका कहना था कि केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला पूरी तरह संवैधानिक है। इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा। इसी बीच सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह खड़े हुए। उन्होंने कहा कि आपके सीएम अरविंद केजरीवाल तो इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। फिर आप किस मुंह से इस पर बोल रहे हैं।