राम रहीम को माफी पर अकाल तख्त का Uटर्न, फैसला वापिस
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पांच सिंह साहिबान की ओर से डेरा सच्चा सौदा सिरसा के मुखी गुरमीत राम रहीम सिंह को जाम-ए-इंसां पिलाने के मामले में दी गई माफी को रद्द कर दिया गया। पांच सिंह साहिबान की बैठक में यह फैसला लिया गया।
बैठक में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह, पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह, केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी मल सिंह, अकाल तख्त साहिब ग्रंथी ज्ञानी गुरमख सिंह और दरबार साहिब के ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह शामिल हुए।
तख्त हजूर साहिब के जत्थेदार बैठक में शामिल नहीं हुए तो फोन पर उनसे इस मुद्दे पर सहमति ली गई। बाद दोपहर तक चली पांच सिंह साहिबान की बैठक के बाद जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि डेरा मुखी को माफ करने का जो फैसला 24 सितंबर को लिया गया था, उसे सिख संगत की भावनाओं को देखते हुए रद्द किया जाता है।
उन्होंने कहा कि डेरा मुखी को माफी दिए जाने से संबंधित फैसले को पंथ ने स्वीकार नहीं किया। इसलिए इस पर दोबारा विचार किया गया।
यह था 8 साल पुराना मामला
दरअसल, मामला दशम गुरु गोबिंद सिंह जी से मिलते-जुलते कपड़े पहनकर संगत को अमृतपान कराने का था। गत 25 सितंबर को पांच सिंह साहिबान की बैठक में डेरा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह की तरफ से भेजे गए माफीनामे मंजूर कर लिया गया। साथ में डेरा प्रमुख को हिदायत दी गई कि भविष्य में ऐसी कोई भी गलती न करने की चेतावनी भी दी।
बैठक के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि सिखों में यह रिवायत है कि जब भी कोई धार्मिक गलती करने वाला अपराधी अपनी माफी श्री अकाल तख्त साहिब पर निम्रता सहित मांगता है तो उसे माफ कर दिया जाता है। संत राम रहीम ने भी निम्रता से अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी थी।
कुछ साल पहले जब इस मामले में डेरा प्रमुख की फोटो रिलीज हुई थी तो सिखों में हड़कंप मच गया था। कई सिख संगठनों ने श्री अकाल तख्त साहिब पर प्रार्थना पत्र देकर मांग की थी कि डेरा प्रमुख के खिलाफ धार्मिक कार्रवाई की जाए। इसके बाद पांच सिंह साहिबान ने श्री अकाल तख्त साहिब से आदेश जारी करके कहा था कि सिख कौम और सिख पंथ डेरा प्रमुख के साथ किसी भी तरह का संपर्क न रखें और उनके हर कार्यक्रम का पूर्ण बायकाट किया जाए।
इन आदेशों के बाद डेरा प्रेमियों और सिखों के बीच धार्मिक और राजनीतिक टकराव बढ़ गया था। कई बार हिंसक झड़पें भी हुई। अब डेरा प्रमुख की फिल्म एमएसजी-2 के खिलाफ भी सिख संगठनों ने आवाज उठाई। पंजाब में यह फिल्म रिलीज नहीं हुई, जिसके विरोध में डेरा प्रेमियों की ओर से राज्य भर में प्रदर्शन भी की किया गया था।