अभय ने अजय चौटाला को पार्टी से निकाला, चौधरी देवीलाल की विरासत की जंग में टूट गया इनेलो का चश्मा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चौटाला परिवार में चौधरी देवीलाल की विरासत की जंग में आखिरकार इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) का चश्मा बुधवार को टूट गया। पार्टी में लंबे समय से चली आ रही खींचतान दोफाड़ बदल गई। दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला को पार्टी से निकालने बाद प्रधान महासचिव अजय चौटाला को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया।
चंडीगढ़ में नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला की प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया गया कि अजय का निष्कासन पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के हस्ताक्षर से किया गया है। वहीं, अजय चौटाला और उनके पुत्र दिग्विजय ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह से असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। ओपी चौटाला के जिस पत्र के हवाले से कार्रवाई की गई है वह पत्र चंडीगढ़ में बैठकर तैयार किया गया है। अजय ने कहा कि पार्टी से निकालने वाले पहले पार्टी का संविधान तो पढ़ लेते।
अरोड़ा ने पढ़कर सुनाया अजय का निष्कासन
अभय सिंह चौटाला व अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पार्टी अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि 12 नवंबर को ओमप्रकाश चौटाला ने एक पत्र दिया था, जिसे जारी करने से पहले पार्टी के तमाम नेताओं ने यह प्रयास किया कि अजय सिंह चौटाला जींद की बैठक को रद्द करें और पार्टी पूरी एकजुटता के साथ विरोधी राजनीतिक दलों का मुकाबला करे।
अरोड़ा ने ओपी चौटाला के पत्र को सार्वजनिक करते हुए कहा कि बार-बार प्रयासों के बावजूद अजय द्वारा न केवल 17 नवंबर को जींद में बैठक बुलाकर कार्यकर्ताओं व नेताओं को भ्रमित किया जा रहा है, बल्कि अजय द्वारा पिछले कई दिनों से की जा कार्रवाई से साफ हो गया है कि वह इनेलो के समानांतर संगठन चलाना चाहते हैं। इनेलो हाईकमान जींद में बुलाई गई बैठक को असंवैधानिक करार देता है और अजय सिंह चौटाला को पार्टी के प्रधान महासचिव पद से हटाने के साथ पार्टी से भी निष्कासित करता है।
17 को दोनों गुटों की बैठक, एक की चंडीगढ़ में दूसरे की जींद में
अजय चौटाला को पार्टी से निकालने की घोषणा के बाद अभय चौटाला गुट ने एलान किया गया कि प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक 17 को चंडीगढ़ में जाट भवन में होगी। दूसरी ओर, अजय चौटाला गुट का कहना है कि 17 को जींद में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक जरूर होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि किस खेमे में कितने विधायक जुटते हैं और कितने पदाधिकारी व पूर्व पदाधिकारी शामिल होते हैं। दोनों गुटों के इसी शक्ति प्रदर्शन से असली इनेलो भी तय होगा।
कठिन समय में मैंने पार्टी को जोड़ा और मजबूत बनाया : अभय
नेता विपक्ष अभय चौटाला ने कहा कि अजय चौटाला ने दस साल राजस्थान की राजनीति की है। उस समय मैं उन्हें पीठ पीछे से मजबूती देता रहा। उनसे पहले मैं हरियाणा की राजनीति में सक्रिय था। मैंने पार्टी को मजबूत किया है। ऐसी विषम परिस्थतियों में भी मैं चुनाव लड़कर जीता, जब राष्ट्रीय दलों की राजनीति के आगे लोग आगे आने से डर रहे थे।
मैंने रोड़ी का उपचुनाव 98 प्रतिशत मतों से जीता और रिकार्ड बनाया। अब लोग चार साल बनाम चालीस साल का हवाला दे रहे हैं। जिस समय पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला और अजय चौटाला जेल गए, उस कठिन समय में मैंने पार्टी को जोड़ने और मजबूत बनाने का काम किया। तब यह विधायक मेरे पास आए थे और बोले थे कि आप पार्टी को संभालो, हम आपके साथ हैं। अब परिवार में इस तरह की बातें करना शोभा नहीं देता।
मुझे किस अधिकार से निष्कासित किया गया : अजय
इनेलो से अपने निष्कासन पर अजय चौटाला ने कहा कि यह फैसला अलोकतांत्रिक तरीके से लिया गया है। बैकडोर से वर्चस्व बनाने का काम किया जा रहा है। मुझे किस अधिकार से निष्कासित किया गया है। दुष्यंत और दिग्विजय पर तो गोहाना रैली में नारे लगवाने का आरोप लगाया था, लेकिन मेरे ऊपर तो कोई इल्जाम भी नहीं है।
इनेलो किसी के बाप की बपौती नहीं। 17 को देवीलाल की कर्मभूमि जींद में रैली कर बड़ा फैसला लिया जाएगा। उसी दिन प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक भी होगी। बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब कार्यकर्ता ही फरमान जारी करने वालों को बताएंगे कि तुम हो या हम हैं। उन्होंने कहा कि फैसला लेने वाले पहले संविधान तो पढ़ लें। 12 नवंबर को यदि चौटाला साहब की तरफ से लेटर मिल गया था तो जारी क्यों नहीं किया? साजिश कर रहे थे क्या? उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीका अपनाया जाना चाहिए था। मुझे कोई नोटिस तो दिया जाना चाहिए था।
केसी बांगड़ ने दिया इस्तीफा
उधर, यमुनानगर में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी बांगड़ ने खुले मंच से अपना इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि अजय सिंह चौटाला को निष्कासित करना तानाशाही फैसला है। इससे इनेलो वेंटिलेटर पर चली गई है। अगर में अभय चौटाला की भाषा बोलता हूं तो सही और दुष्यंत के समर्थन में बोलता हूं तो दूध बेचने का काम करने वाले मुझे बिकाऊ कहते हैं।