अच्छी खबर: उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सिर्फ चंडीगढ़-पंचकूला की हवा साफ, पराली जलाने की घटनाएं भी हुईं कम
पर्यावरण विज्ञान विशेषज्ञ रविंद्र खैवाल ने बताया कि हर साल एक नवंबर से पराली जलाने की संख्या कम होनी शुरू हो जाती थी और 15 तक खत्म हो जाती थी। इस बार स्थिति बदल गई है। इसका कारण है मानसून का इस बार देरी से आना और देरी से जाना। उन्होंने बताया कि पराली से निकलने वाले कण को हवा से निकलने में कम से कम 7 से 28 दिन का वक्त लगता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शुक्र मनाइए कि आप चंडीगढ़ में हैं। पंजाब-हरियाणा सहित दिल्ली व एनसीआर में प्रदूषण से लोगों का दम घुट रहा है लेकिन पूरे उत्तर भारत में सिर्फ चंडीगढ़ और पंचकूला ही ऐसे दो शहर हैं, जहां की हवा बिल्कुल साफ है। वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 से भी कम है और हरे स्तर पर बनी हुई है। शनिवार को शाम सात बजे चंडीगढ़ का एक्यूआई 86 दर्ज किया गया।
पंचकूला का एक्यूआई भी 70 रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के समीर एप के अनुसार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के कुछ इलाके कोटा तक हवा बेहद खराब है। एक्यूआई 225 से 439 के बीच है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति दिल्ली की है। आनंद विहार में रात आठ बजे एक्यूआई 439 दर्ज किया गया, जो खतरनाक के स्तर पर है।
समीर एप पर देखा जाए तो सिर्फ चंडीगढ़ और पंचकूला ही हरे रंग में दिखाई दे रहा है। बाकी सभी लाल, गाढ़े लाल और संतरी रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। हालांकि दक्षिण भारत में स्थिति बिल्कुल अलग है। सभी शहर हरे रंग में रंगे हुए हैं। हवा साफ है। पर्यावरण विज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण से राहत तभी मिलेगी, जब बारिश होगी लेकिन अगले कुछ दिन तक बारिश की कोई संभावना नहीं है। पराली जलाने की घटनाएं कम होंगी तो वायु प्रदूषण धीरे-धीरे कम होगा। जो बड़े कण हैं, उनसे छुटकारा जल्द मिल जाएगा लेकिन छोटे कण को हवा से हटने में समय लगता है।
दो सप्ताह बाद पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं हुईं कम
पीजीआई चंडीगढ़ और पंजाब यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विशेषज्ञ सैटेलाइट डाटा के जरिए पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रख रहे हैं। आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार पिछले दो हफ्ते से पराली जलाने की घटनाएं काफी ज्यादा थीं लेकिन शनिवार को इसमें करीब 40 प्रतिशत की कमी आई। पीजीआई के पर्यावरण विज्ञान विशेषज्ञ रविंद्र खैवाल ने बताया कि शनिवार को पंजाब-हरियाणा में करीब 2000 जगह पराली जलाने की घटनाएं हुईं। आने वाले दिनों में भी घटनाएं कम होंगी तो दिल्ली, पंजाब व हरियाणा के प्रदूषण में धीरे-धीरे कमी आएगी। एक हफ्ते बाद इसका असर दिखना शुरू हो जाएगा।
- कब पंजाब-हरियाणा में कितनी जगह जलाई गई पराली
- 8 नवंबर 4685
- 9 नवंबर 5200
- 10 नवंबर 6800
- 11 नवंबर 5400
- 12 नवंबर 4300
- 13 नवंबर 2000