जहरीली हुई हवा: दिवाली के दूसरे दिन भी अबोहवा खराब, देश के सर्वाधिक प्रदूषित 20 शहरों में 11 हरियाणा के
हरियाणा में शुक्रवार को 331 स्थानों पर पराली जलाई गई। फतेहाबाद में सर्वाधिक 92 स्थानों पर पराली जलाने की लोकेशन मिली। वहीं, कैथल में 68 और जींद में 61 जगह पर पराली जलाई गई। इस साल पराली जलाने की संख्या दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले 15 अक्तूबर को 363 स्थानों पर पराली जलाई गई। 9 जिलों में पराली जलाने का एक भी केस दर्ज नहीं किया गया।
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दिवाली के दूसरे दिन भी शुक्रवार को हरियाणा की हवा जहरीली रही। देश के सर्वाधिक प्रदूषित 20 शहरों में प्रदेश के 11 जिले शामिल रहे। इन सभी शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 से अधिक रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर शुक्रवार शाम सात बजे दिल्ली के बाद गुरुग्राम का एक्यूआई सर्वाधिक 477 दर्ज किया गया।
हरियाणा सरकार ने दिवाली से पहले एनसीआर के 14 जिलों भिवानी, रोहतक, फरीदाबाद, गुरुग्राम, झज्जर, जींद, पानीपत सोनीपत, चरखी दादरी, करनाल, महेंद्रगढ़, नूंह, पलवल, और रेवाड़ी में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद भी दिवाली की रात जमकर पटाखे फोड़े गए। वहीं, तमाम प्रतिबंधों को दरकिनार कर पराली जलाई गई। नतीजतन दिवाली की रात भी सबसे अधिक प्रदूषित रही। प्रदेश के आठ शहरों का एक्यूआई 400 के पार चला गया था। जींद जिले में देश में सबसे अधिक 482 एक्यूआई दर्ज किया गया।
प्रदूषण केवल सांस और कोरोना के मरीजों के लिए ही नहीं दूसरे लोगों के लिए भी खतरनाक है। इसमें सलाह ये है कि लोग मास्क लगाकर रखें। बाहर निकलें तो आंखों पर चश्मा भी पहनें। बीमार लोगों और खासकर बच्चों का इस दौरान पूरा ध्यान रखें, भीड़ के इलाकों में जाने से बचें। -डॉ. ध्रूव चौधरी, विशेषज्ञ, पीजीआई रोहतक।
शुक्रवार को देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहर
- शहर एक्यूआई
- दिल्ली 486
- नोएडा 480
- गुरुग्राम 477
- फरीदाबाद 475
- जींद 471
- गाजियाबाद 465
- मानेसर 455
- बल्लभगढ़ 454
- वृंदावन 449
- फिरोजाबाद 448
- रोहतक 443
- मेरठ 442
- आगरा 442
- भिवानी 439
- हापुड़ 436
- पानीपत 430
- बुलंदशहर 432
- चरखीदादरी 429
- हिसार 411
- सोनीपत 411
आंखों में जलन के मामले बढ़े
प्रदूषण अधिक होने से खराश, आंखों में जलन के मामले बढ़ गए हैं। वहीं, सबसे ज्यादा दिक्कत सांस रोगियों को उठानी पड़ी। इससे त्वचा संबंधित बीमारियां भी बढ़ने की आशंका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले महीन कण पीएम-2.5 की 24 घंटे की औसत सांद्रता बढ़कर शुक्रवार को 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के पार पहुंच गई, जबकि 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सुरक्षित दर से तकरीबन पांच गुणा ज्यादा है। यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है।