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चंडीगढ़: प्रतिबंध बेअसर, खूब चले पटाखे, वायु प्रदूषण ने तोड़ा पांच साल का रिकॉर्ड

Sat, 06 Nov 2021 01:35 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 06 Nov 2021 01:35 AM IST
सार

चंडीगढ़ में दशहरा पर भी पटाखे चले थे और अब दीपावली पर भी जमकर चले। दीपावली पर शाम से पटाखे चलने शुरू हो गए थे लेकिन आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस और एसडीएम की टीम नदारद रही। देबेंद्र दलाई ने बताया कि शहर में सुबह से शाम तक हवा ठीक रही लेकिन शाम और रात के समय ये खराब रही। आसपास के एरिया में भी पटाखे चलने से असर पड़ा।

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Air pollution broke the record of last five years in Chandigarh
चंडीगढ़ में जमकर चले पटाखे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में पटाखों के धुएं के साथ प्रतिबंध के आदेश भी उड़ गए। कुछ सेक्टरों को छोड़कर शहरभर में खूब आतिशबाजी हुई। इसका असर ये हुआ कि प्रदूषण के स्तर ने पिछले पांच वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। सेक्टर-25 में दिवाली की रात 10 से 11 बजे के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) गंभीर श्रेणी में 465 तक पहुंच गया, जबकि सेक्टर-22 में 409 दर्ज किया गया। वहीं, ध्वनि प्रदूषण में भी आम दिनों के मुकाबले बढ़ोतरी देखने को मिली।

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वर्ष 2019 में दिवाली की रात शहर में एक्यूआई 341 रहा था, जो बीते वर्ष कोरोना के चलते दीपावली पर कम होकर 140 पर आ गया था लेकिन इस बार शाम और रात के समय वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया था। पटाखों पर पाबंदी के बावजूद देर रात तक पटाखे चलते रहे। सेक्टर-25 के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के अनुसार, सुबह 7 बजे से शाम तक शहर में वायु प्रदूषण का स्तर नियंत्रित था, जो शाम 6 बजे के बाद मॉडरेट और रात 10 से 11 बजे के बीच 465 तक पहुंच कर गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। 
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 इसी तरह रात 11 से लेकर 2 बजे के बीच यह बहुत खराब की श्रेणी में पहुंच गया। बाद में दोबारा ठीक होता चला गया। इसी तरह सेक्टर-22 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के अनुसार, उस इलाके में सुबह 7 से लेकर शाम 4 बजे तक एक्यूआई संतोषजनक रहा। इसके बाद ये मॉडरेट और शाम 7 बजे के बाद बहुत खराब व 9 से 10 बजे के बीच गंभीर स्थिति में पहुंच गया। रात 2 बजे के बाद ये फिर संतोषजनक होने लगा।

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ध्वनि प्रदूषण भी काफी बढ़ा 

दिवाली पर ध्वनि प्रदूषण में भी आम दिनों के मुकाबले बढ़ोतरी देखने को मिली। सेक्टर-17 में 58.4 डेसीबल था, जबकि सेक्टर-39 में ध्वनि प्रदूषण स्तर अधिकतम 78.2 डेसीबल दर्ज किया गया। अगर पिछले साल की बात की जाए तो ध्वनि प्रदूषण 66.6 डेसीबल दर्ज किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, रात के वक्त वातावरण में 35 डेसीबल और दिन में 45 डेसीबल से ज्यादा शोर नहीं होना चाहिए।

पीजीआई के एनवायरमेंट हेल्थ विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. रविंद्र खैवाल ने कहा कि मोहाली और पंचकूला में चलाए गए पटाखों का असर चंडीगढ़ पर भी पड़ा है। चंडीगढ़ में भी कुछ जगह पटाखे चले हैं। गाड़ियों की संख्या भी सड़कों पर काफी रही, इसलिए प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (सीपीसीसी) के सदस्य सचिव देबेंद्र दलाई ने कहा कि कोविड-19 के मरीजों को देखते हुए व सांस की बीमारी से परेशान लोगों के मद्देनजर यह प्रतिबंध लगाया था। लोगों को इसमें प्रशासन से तालमेल बनाना होगा।

पटाखे चलाने पर 28 केस दर्ज, 13 लोग मौके से गिरफ्तार
पटाखों पर प्रतिबंध के आदेश का पालन कराने के नाम पर पुलिस ने महज खानापूर्ति की। पुलिस को पटाखों की बिक्री और चलाने से संबंधित 90 सूचनाएं मिलीं। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आईपीसी-188 और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51बी के तहत 28 केस दर्ज किए। इनमें 24 पटाखे चला रहे थे, जबकि चार बेच रहे थे। पुलिस ने 13 लोगों को मौके से गिरफ्तार किया। पुलिस के पास पूरे दिन में कुल 818 फोन आए। आग लगने की भी छोटी-छोटी 10 घटनाएं हुईं। 63 जगह एंबुलेंस गईं। दीपावली की रात लड़ाई झगड़े के 137 मामले सामने आए हैं।
 

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