Punjab News: एआई कैमरों से लैस होंगी पंजाब की जेलें, हर हरकत होगी कैदी, अप्रैल तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
पंजाब में 26 जेल हैं। इनमें कुछ केंद्रीय जेल भी हैं। इनमें करीब 30 हजार कैदी हैं। अब इन जेलों में एआई कैमरे निगरानी करेंगे। कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से इन कैमरों की मॉनीटरिंग की जाएगी।
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पंजाब की जेलों में कैदियों और संदिग्ध गतिविधियों पर पुलिस की अब सीधी नजर रहेगी। अगर कोई भी हरकत होती है तो इस संबंध में पुलिस को तुरंत अलर्ट मिलेगा। इसके बाद पुलिस समय रहते उसे रोकने की दिशा में उचित कदम उठा पाएगी। यह संभव होने जा रहा है पंजाब की जेलों के सुरक्षा चक्र को मजबूत करने के प्रोजेक्ट से।
इसके तहत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाने के प्रोजेक्ट पर पुलिस ने काम शुरू कर दिया है। प्रोजेक्ट अगले साल अप्रैल तक पूरा हो जाएगा। प्रोजेक्ट निजी कंपनी के सहयोग से आगे बढ़ेगा, जबकि पुलिस इसमें नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी। प्रोजेक्ट कामयाब रहा तो इसे पुलिस से जुड़े अन्य प्रोजेक्टों में भी लागू किया जाएगा। सूबे की जेलों में कई खूंखार कैदी व गैंगस्टर बंद हैं। उन पर नजर रखना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
इसके अलावा जेलों में आए दिन फोन, नशा और अन्य सामान मिलने की घटनाओं ने भी पुलिस की सिरदर्दी बढ़ाई हुई है। ऐसे में पुलिस के थिंक टैंक ने एआई से लैस कैमरे लगाने की रणनीति बनाई है। इस दौरान उन राज्यों के मॉडल की भी स्टडी की गई, जो इस सिस्टम के साथ काम कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत खासकर रात के समय अगर निषिद्ध क्षेत्र में कोई भी अनचाही गतिविधि होगी या किसी व्यक्ति का मूवमेंट होगा तो कैमरा उसे नोटिस करेगा और बीप की आवाज आने लगेगी।
जेल में लगे इन कैमरों की मॉनीटरिंग के लिए कंट्रोल एंड कमांड सेंटर भी बनाया जा रहा है। यहां एक जगह से सभी जेलों की गतिविधि देखी जा सकेंगी। इसके अलावा जेल में वर्चुअल दीवार बनाई जाएगी जिस पर सारी चीज नजर आएगी। अधिकारियों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में काम करने वाली कंपनी ही देखभाल से लेकर अन्य सारी जिम्मेदारी उठाएगी। सूबे में 26 जेल हैं। इनमें करीब 30 हजार कैदी हैं। इनमें कुछ केंद्रीय जेल भी हैं।
यह विशेषता है इन कैमरों की
राज्य की जेलों में पहले से सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। हालांकि गत समय में हो रही गतिविधियों के चलते अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस कैमरे लगाने का फैसला लिया गया है। इनकी सबसे विशेष बात यह है कि आम कैमरों में रात को लाइट पड़ने पर रिकॉर्डिंग खराब हो जाती है जबकि यह कैमरे मूवमेंट के हिसाब से चलते हैं। गाड़ियों के नंबर और चेहरों को एकदम से पहचान सकते हैं और फोन पर अलर्ट देने में भी सक्षम हैं। इसके अलावा मूवमेंट पहचान में सक्षम है। यह आवाज से लेकर अन्य चीजों को कैच करने में सक्षम भी हैं।
जेल ब्रेक कांड समेत कई घटनाएं हो चुकी
पंजाब की जेलें गत कई साल से सुर्खियों में रही हैं। 2015 में नाभा जेल ब्रेक कांड हुआ था। उस समय कई खूंखार कैदी मौका पाकर जेल से भाग गए थे। इसके बाद पंजाब की सारी जेलों की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। जेलों की दीवारों की ऊंचाई बढ़ाने से लेकर करंट वाले तार लगाए थे। इसके बाद कैदियों के भिड़ने की घटनाएं आम हो गईं। इस तरह कैदियों के भिड़ने से कई लोगों की जान तक जा चुकी है। इसके बाद अब खूंखार कैदियों को अलग रखा जाता है। जेलों में नशा और मोबाइल मिलना आम बात है। अब तक सात हजार से ज्यादा मोबाइल पकड़े जा चुके हैं। कई पुलिस वालों पर भी गाज गिरी है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब कैदियों की बैरकों की दो बार चेकिंग होती है।