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दो साल बाद 'सरकार' को आई डंपिंग ग्राउंड की याद, काम जल्द पूरा करें...कह कर चले गए
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चंडीगढ़। तत्कालीन प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और सांसद किरण खेर ने 21 दिसंबर 2019 को लीगेसी माइनिंग योजना का शुभारंभ किया था। योजना के तहत कंपनी को 540 दिनों में डड्डूमाजरा से कचरे का पहाड़ खत्म करना था। दावा किया गया था कि यहां फुटबॉल का मैदान बना दिया जाएगा, लेकिन 753 दिन बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है। निगम चुनाव में एक बार फिर डंपिंग ग्राउंड पर खूब शोर मचा तो प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित शुक्रवार को पहली बार डंपिंग ग्राउंड पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को आदेश दिया कि तीन माह में प्लांट का नवीनीकरण कर दें ताकि काम को जल्द निपटाया जा सके। साथ ही कहा कि इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, सब मिलकर इस समस्या से डड्डूमाजरा को छुटकारा दिलाएंगे।
प्रशासक पुरोहित सुबह 11 बजे डंपिंग ग्राउंड पहुंचे। उनके साथ उनके सलाहकार धर्मपाल, मेयर सरबजीत कौर समेत अन्य लोग उपस्थित रहे। प्रशासक को अधिकारियों ने पूरी योजना के बारे में बताया और फिर मशीनों और किस तरह से कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है, उस पूरी प्रक्रिया को दिखाया। स्थानीय पार्षद कुलदीप ने बताया कि ग्राउंड के पीछे भी एक पहाड़ बनाया जा रहा है। इस पर प्रशासक ने अधिकारियों ने पूछा तो जवाब मिला कि ये आरडीएफ है। प्रशासक ने कहा कि इसे यहां क्यों इकट्ठा किया जा रहा है। उन्होंने तुरंत आरडीएफ को हटाने के आदेश दिए।
प्रशासक ने कहा कि काम को जल्द पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वो हर महीने यहां का दौरा करेंगे। प्रशासक ने कहा कि डड्डूमाजरा में काफी लोग रहते हैं, उनकी सेहत से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। पार्षदों से कहा कि डंपिंग ग्राउंड पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी को मिलजुल कर काम करना चाहिए, ताकि इस समस्या से छुटकारा पाया जा सके। इसके बाद प्रशासक उन्होंने जेपी प्लांट का भी दौरा करने को कहा, इस पर पार्षदों ने कहा कि प्लांट बंद पड़ा है।
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स्थानीय पार्षद की मांग- डड्डूमाजरा में बने मिनी अस्पताल, एंबुलेंस मिले
स्थानीय पार्षद कुलदीप कुमार ने प्रशासक को डड्डूमाजरा के हालात के बारे में बताया। कहा कि डड्डूमाजरा में करीब 60 हजार लोग रहते हैं, जो कई बीमारियों से ग्रसित हैं। कूड़े के पहाड़ की वजह से लोगों को सांस लेने, चमड़ी और टीबी जैसी गंभीर बीमारियां हैं। उन्होंने मांग रखी कि डड्डूमाजरा में मिनी अस्पताल होना चाहिए, जिसमें इमरजेंसी व एंबुलेंस की व्यवस्था हो। नियमित मेडिकल कैंप लगाकर लोगों की जांच होनी चाहिए। नई तकनीक के साथ प्लांट चालू कर स्थानीय निवासियों को रोजगार देना चाहिए। इस मौके पर आम आदमी पार्टी के कई पार्षद भी उपस्थित रहे। इनमें पार्षद प्रेमलता, तरुणा मेहता, सुमन अमित शर्मा, दमनप्रीत व पूनम शामिल रहीं। सभी ने प्रशासक से मिल कर लोगों को कूड़े के पहाड़ से जल्द मुक्ति दिलाने की मांग की।
...चलो अच्छा है, इसी बहाने सड़क ठीक हुई, गड्ढे भर गए
प्रशासक के आने से पहले डंपिंग ग्राउंड के पीछे की सड़क को ठीक किया गया और उसे साफ किया गया। पिछले काफी दिनों से सड़क कीचड़ से भरी हुई थी। यहां बारिश के बाद हर बार यही स्थिति बन जाती है। डंपिंग ग्राउंड से कीचड़ बहकर सड़क पर आ जाता है। टू-व्हीलर वाले अक्सर इसमें गिरकर चोटिल होते हैं। इसके अलावा सड़क के बीचोबीच कई बड़े-बड़े गड्ढे थे। प्रशासक के आने से कुछ मिनट पहले ही गड्ढ़ों को भर दिया गया और सड़क से कीचड़ को भी हटा दिया गया। इसे देखकर स्थानीय पार्षद ने भी प्रशासक से आग्रह किया वो हर महीने आएं ताकि यहां सफाई होती रहे।
न सांसद देखने आईं और न प्रशासक ने पूछा
दिसंबर 2019 में प्लांट के उद्घाटन के दौरान प्रशासक ने कहा था कि सांसद किरण खेर हर 15 दिन में निरीक्षण करने आएंगी। इसके अलावा वह खुद हर महीने प्लांट का निरीक्षण करेंगे, ताकि पता चल सके कि कंपनी किस तरह से काम कर रही है और कितनी तेजी से कचरा निस्तारित हो रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि न सांसद ने कभी इस तरफ मुड़कर देखा और न प्रशासक ने इसकी रिपोर्ट ली। अब दीवार बना दी गई है, लेकिन कूड़े का पहाड़ जस का तस है लेकिन दीवारें ऊंची करने से न तो बदबू को कम किया जा सकता है और न ही बीमारी को खत्म किया जा सकता है।
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प्रशासक पुरोहित सुबह 11 बजे डंपिंग ग्राउंड पहुंचे। उनके साथ उनके सलाहकार धर्मपाल, मेयर सरबजीत कौर समेत अन्य लोग उपस्थित रहे। प्रशासक को अधिकारियों ने पूरी योजना के बारे में बताया और फिर मशीनों और किस तरह से कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है, उस पूरी प्रक्रिया को दिखाया। स्थानीय पार्षद कुलदीप ने बताया कि ग्राउंड के पीछे भी एक पहाड़ बनाया जा रहा है। इस पर प्रशासक ने अधिकारियों ने पूछा तो जवाब मिला कि ये आरडीएफ है। प्रशासक ने कहा कि इसे यहां क्यों इकट्ठा किया जा रहा है। उन्होंने तुरंत आरडीएफ को हटाने के आदेश दिए।
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प्रशासक ने कहा कि काम को जल्द पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वो हर महीने यहां का दौरा करेंगे। प्रशासक ने कहा कि डड्डूमाजरा में काफी लोग रहते हैं, उनकी सेहत से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। पार्षदों से कहा कि डंपिंग ग्राउंड पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी को मिलजुल कर काम करना चाहिए, ताकि इस समस्या से छुटकारा पाया जा सके। इसके बाद प्रशासक उन्होंने जेपी प्लांट का भी दौरा करने को कहा, इस पर पार्षदों ने कहा कि प्लांट बंद पड़ा है।
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स्थानीय पार्षद की मांग- डड्डूमाजरा में बने मिनी अस्पताल, एंबुलेंस मिले
स्थानीय पार्षद कुलदीप कुमार ने प्रशासक को डड्डूमाजरा के हालात के बारे में बताया। कहा कि डड्डूमाजरा में करीब 60 हजार लोग रहते हैं, जो कई बीमारियों से ग्रसित हैं। कूड़े के पहाड़ की वजह से लोगों को सांस लेने, चमड़ी और टीबी जैसी गंभीर बीमारियां हैं। उन्होंने मांग रखी कि डड्डूमाजरा में मिनी अस्पताल होना चाहिए, जिसमें इमरजेंसी व एंबुलेंस की व्यवस्था हो। नियमित मेडिकल कैंप लगाकर लोगों की जांच होनी चाहिए। नई तकनीक के साथ प्लांट चालू कर स्थानीय निवासियों को रोजगार देना चाहिए। इस मौके पर आम आदमी पार्टी के कई पार्षद भी उपस्थित रहे। इनमें पार्षद प्रेमलता, तरुणा मेहता, सुमन अमित शर्मा, दमनप्रीत व पूनम शामिल रहीं। सभी ने प्रशासक से मिल कर लोगों को कूड़े के पहाड़ से जल्द मुक्ति दिलाने की मांग की।
...चलो अच्छा है, इसी बहाने सड़क ठीक हुई, गड्ढे भर गए
प्रशासक के आने से पहले डंपिंग ग्राउंड के पीछे की सड़क को ठीक किया गया और उसे साफ किया गया। पिछले काफी दिनों से सड़क कीचड़ से भरी हुई थी। यहां बारिश के बाद हर बार यही स्थिति बन जाती है। डंपिंग ग्राउंड से कीचड़ बहकर सड़क पर आ जाता है। टू-व्हीलर वाले अक्सर इसमें गिरकर चोटिल होते हैं। इसके अलावा सड़क के बीचोबीच कई बड़े-बड़े गड्ढे थे। प्रशासक के आने से कुछ मिनट पहले ही गड्ढ़ों को भर दिया गया और सड़क से कीचड़ को भी हटा दिया गया। इसे देखकर स्थानीय पार्षद ने भी प्रशासक से आग्रह किया वो हर महीने आएं ताकि यहां सफाई होती रहे।
न सांसद देखने आईं और न प्रशासक ने पूछा
दिसंबर 2019 में प्लांट के उद्घाटन के दौरान प्रशासक ने कहा था कि सांसद किरण खेर हर 15 दिन में निरीक्षण करने आएंगी। इसके अलावा वह खुद हर महीने प्लांट का निरीक्षण करेंगे, ताकि पता चल सके कि कंपनी किस तरह से काम कर रही है और कितनी तेजी से कचरा निस्तारित हो रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि न सांसद ने कभी इस तरफ मुड़कर देखा और न प्रशासक ने इसकी रिपोर्ट ली। अब दीवार बना दी गई है, लेकिन कूड़े का पहाड़ जस का तस है लेकिन दीवारें ऊंची करने से न तो बदबू को कम किया जा सकता है और न ही बीमारी को खत्म किया जा सकता है।